भारत-मोरक्को रक्षा संबंधों को नई मजबूती, पहली संयुक्त रक्षा समिति की बैठक नई दिल्ली में हुई

Tue 08-Sep-2026,09:49 PM IST +05:30

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भारत-मोरक्को रक्षा संबंधों को नई मजबूती, पहली संयुक्त रक्षा समिति की बैठक नई दिल्ली में हुई India Morocco Defence Relations
  • भारत-मोरक्को के बीच पहली संयुक्त रक्षा समिति की बैठक नई दिल्ली में हुई।

  • सैन्य अभ्यास, साइबर सुरक्षा, रक्षा उद्योग और चिकित्सा सहयोग पर चर्चा हुई।

  • दोनों देशों ने सह-उत्पादन और तकनीकी साझेदारी बढ़ाने पर सहमति जताई।

Delhi / Delhi :

Delhi / भारत और मोरक्को के बीच रक्षा सहयोग को और मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाया गया है। दोनों देशों के बीच संयुक्त रक्षा समिति (Joint Defence Committee) की पहली बैठक 8 सितंबर 2026 को नई दिल्ली में आयोजित हुई। बैठक में दोनों पक्षों ने रक्षा और सैन्य सहयोग से जुड़े कई महत्वपूर्ण क्षेत्रों पर विस्तार से विचार-विमर्श किया। भारत और मोरक्को ने अपने रक्षा संबंधों को और व्यापक बनाने तथा आपसी सहयोग को नई ऊंचाई देने पर सहमति जताई।

बैठक के दौरान प्रशिक्षण एवं सैन्य शिक्षा, शांति स्थापना अभियानों, सैन्य अभ्यास, चिकित्सा सहयोग, साइबर सुरक्षा और रक्षा उद्योग जैसे क्षेत्रों को प्रमुखता से चर्चा में शामिल किया गया। दोनों देशों ने इन क्षेत्रों में सहयोग की संभावनाओं को आगे बढ़ाने पर जोर दिया। यह बैठक इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि वर्ष 2027 में भारत और मोरक्को के बीच द्विपक्षीय सहयोग की 70वीं वर्षगांठ मनाई जाएगी।

दोनों देशों के अधिकारियों ने की सह-अध्यक्षता
संयुक्त रक्षा समिति की बैठक की सह-अध्यक्षता भारत की ओर से रक्षा मंत्रालय के संयुक्त सचिव (अंतर्राष्ट्रीय सहयोग) अमिताभ प्रसाद और मोरक्को की रॉयल आर्म्ड फोर्सेज के द्वितीय ब्यूरो के प्रमुख ब्रिगेडियर जनरल अब्देल्लाह अथमानी ने की।

भारतीय प्रतिनिधिमंडल में रक्षा विभाग, तीनों सेनाओं, एकीकृत रक्षा कार्मिक मुख्यालय, रक्षा उत्पादन विभाग, सशस्त्र बल चिकित्सा सेवा महानिदेशालय, रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) और विदेश मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारी शामिल हुए। इससे साफ है कि बैठक में रक्षा सहयोग को केवल सैन्य स्तर तक सीमित रखने के बजाय व्यापक संस्थागत और तकनीकी सहयोग के नजरिए से भी देखा गया।

7 से 10 सितंबर तक भारत दौरे पर मोरक्को का प्रतिनिधिमंडल
मोरक्को का प्रतिनिधिमंडल 7 से 10 सितंबर 2026 तक भारत के दौरे पर है। दौरे की शुरुआत ब्रिगेडियर जनरल अब्देल्लाह अथमानी ने नई दिल्ली स्थित राष्ट्रीय समर स्मारक पर वीर सैनिकों को श्रद्धांजलि अर्पित करके की।

इसके बाद मोरक्को के प्रतिनिधिमंडल ने भारत की बढ़ती रक्षा उत्पादन क्षमताओं से परिचित होने के लिए नई दिल्ली स्थित DPSU भवन में रक्षा उद्योगों के प्रतिनिधियों के साथ बातचीत की। इस दौरान दोनों देशों ने रक्षा क्षेत्र में भविष्य की साझेदारी के विभिन्न विकल्पों पर चर्चा की।

दोनों पक्षों ने सह-उत्पादन, संयुक्त उद्यम, प्रौद्योगिकी सहयोग, रखरखाव और दीर्घकालिक सहयोग जैसे क्षेत्रों में साझेदारी की संभावनाएं तलाशने पर सहमति जताई। इससे दोनों देशों के बीच रक्षा संबंधों में औद्योगिक और तकनीकी सहयोग का दायरा बढ़ने की उम्मीद है।

सैन्य चिकित्सा क्षेत्र में भी सहयोग
मोरक्को का प्रतिनिधिमंडल भारत की सैन्य चिकित्सा क्षमताओं और विशेषज्ञताओं से परिचित होने के लिए आर्मी हॉस्पिटल (रिसर्च एंड रेफरल) का दौरा भी करेगा। इससे सैन्य चिकित्सा के क्षेत्र में दोनों देशों के अनुभव और विशेषज्ञता साझा करने की संभावनाओं को बल मिल सकता है।

भारत और मोरक्को के बीच रक्षा सहयोग को संस्थागत रूप देने की दिशा में पिछले वर्ष भी महत्वपूर्ण पहल हुई थी। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने सितंबर 2025 में मोरक्को की यात्रा की थी। इस दौरान दोनों देशों के बीच रक्षा क्षेत्र में सहयोग के लिए एक समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए गए थे।

2027 में संबंधों की 70वीं वर्षगांठ
सितंबर 2025 की रक्षा मंत्री की यात्रा और उसके दौरान हुए समझौते ने दोनों देशों के रक्षा संबंधों को नई गति दी थी। अब संयुक्त रक्षा समिति की पहली बैठक उसी समझौता ज्ञापन के तहत स्थापित संस्थागत तंत्र का महत्वपूर्ण हिस्सा बनकर सामने आई है।

भारत और मोरक्को के बीच संबंध केवल रक्षा क्षेत्र तक सीमित नहीं हैं। दोनों देशों के बीच लंबे समय से द्विपक्षीय सहयोग के विभिन्न आयाम रहे हैं। ऐसे में 2027 में दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय सहयोग की 70वीं वर्षगांठ का अवसर भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

नई दिल्ली में हुई पहली संयुक्त रक्षा समिति की बैठक से यह संकेत मिलता है कि भारत और मोरक्को रक्षा क्षेत्र में सहयोग को अधिक व्यवस्थित, व्यापक और दीर्घकालिक बनाने की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं। प्रशिक्षण से लेकर रक्षा उत्पादन, साइबर सुरक्षा, सैन्य चिकित्सा और तकनीकी सहयोग तक कई क्षेत्रों को साथ लेकर दोनों देश अपनी साझेदारी को मजबूत करने की कोशिश कर रहे हैं।