SC-NDWL की 88वीं बैठक

Mon 19-Jan-2026,03:58 PM IST +05:30

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SC-NDWL की 88वीं बैठक SC-NBWL-88Th-Meeting-Wildlife-Conservation-Development
  • एससी-एनबीडब्ल्यूएल की 88वीं बैठक में संरक्षित क्षेत्रों से जुड़े 70 विकास और सार्वजनिक उपयोगिता प्रस्तावों पर संतुलित दृष्टिकोण से विचार।

  • लद्दाख और सिक्किम के सीमावर्ती क्षेत्रों में रक्षा अवसंरचना को पर्यावरणीय सुरक्षा शर्तों के साथ मंजूरी की अनुशंसा।

Delhi / New Delhi :

Naw Delhi/ बैठक के दौरान स्थायी समिति ने वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम, 1972 के तहत कुल 70 प्रस्तावों पर विचार किया। ये प्रस्ताव सार्वजनिक उपयोगिता सेवाओं, रक्षा आवश्यकताओं और अवसंरचना विकास से संबंधित थे, जो संरक्षित और संवेदनशील क्षेत्रों के भीतर या उनके आसपास प्रस्तावित हैं। समिति ने प्रत्येक प्रस्ताव का मूल्यांकन पारिस्थितिक संवेदनशीलता, वैधानिक प्रावधानों और स्थानीय समुदायों की बुनियादी आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए किया।

प्रमुख सार्वजनिक उपयोगिता प्रस्तावों में जल जीवन मिशन के अंतर्गत पेयजल आपूर्ति, प्राथमिक एवं सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों की स्थापना, सड़कों का चौड़ीकरण, 4जी मोबाइल टावरों की स्थापना और बिजली ट्रांसमिशन लाइनों का निर्माण शामिल रहा। इसके साथ ही मध्य प्रदेश की एक मध्यम सिंचाई परियोजना पर भी विचार किया गया, जिसका उद्देश्य बुंदेलखंड क्षेत्र में पेयजल और सिंचाई सुविधाओं को सुदृढ़ करना है। यह परियोजना घड़ियाल सहित जलीय वन्यजीवों के लिए बेहतर जल प्रबंधन को भी प्रोत्साहित करती है।

बैठक में लद्दाख और सिक्किम के सीमावर्ती तथा उच्च ऊंचाई वाले क्षेत्रों से जुड़े 17 रक्षा संबंधी प्रस्तावों पर भी चर्चा हुई। राष्ट्रीय सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए समिति ने इन प्रस्तावों को वन्यजीव संरक्षण और पर्यावरणीय सुरक्षा उपायों के कड़े पालन के साथ अनुशंसित किया।

इसके अतिरिक्त, समिति ने पूर्व बैठकों के निर्णयों पर आधारित कार्रवाई रिपोर्ट (एटीआर) की समीक्षा की। नीतिगत सुधार, प्रक्रियाओं के सरलीकरण और ‘परिवेश पोर्टल’ के सुदृढ़ीकरण पर विशेष ध्यान दिया गया। समिति ने भविष्य की बैठकों में निगरानी तंत्र को और प्रभावी बनाने पर विस्तृत चर्चा करने का निर्णय लिया।

राष्ट्रीय वन्यजीव बोर्ड की स्थायी समिति एक वैधानिक निकाय है, जो वन्यजीवों और वनों के संरक्षण के साथ-साथ विकास गतिविधियों को टिकाऊ और संतुलित ढंग से आगे बढ़ाने में सरकार को मार्गदर्शन प्रदान करती है।