बायोप्सी को लेकर डर क्यों? विशेषज्ञ बोले “जांच से नहीं फैलता कैंसर, समय पर निदान है जरूरी”
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Cancer Diagnosis
बायोप्सी से कैंसर फैलने की धारणा गलत.
सही और समय पर निदान के लिए जरूरी जांच.
विशेषज्ञों ने अफवाहों से बचने की दी सलाह.
Nagpur / अस्पतालों की ओपीडी में एक सवाल बार-बार सुनाई देता है—“डॉक्टर साहब, बायोप्सी कराने से कहीं कैंसर फैल तो नहीं जाएगा?” इस आशंका के कारण कई मरीज जरूरी जांच टाल देते हैं। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि यह डर अधूरी जानकारी और फैलती अफवाहों का परिणाम है। आधुनिक चिकित्सा विज्ञान में ऐसा कोई प्रमाण नहीं है कि बायोप्सी से कैंसर फैलता है। उल्टा, यह जांच बीमारी की सही पहचान और समय पर इलाज के लिए सबसे भरोसेमंद तरीका मानी जाती है।
डॉक्टरों के अनुसार जब शरीर में गांठ, सूजन, लंबे समय से न भरने वाला घाव, बार-बार खून आना, अचानक वजन कम होना या रिपोर्ट में किसी गंभीर बीमारी का संकेत मिलता है, तब बायोप्सी की सलाह दी जाती है। इस प्रक्रिया में संदिग्ध हिस्से से बहुत छोटा सा टिशू लेकर माइक्रोस्कोप से जांच की जाती है। इससे स्पष्ट होता है कि समस्या संक्रमण, टीबी, सूजन, प्री-कैंसर अवस्था या कैंसर जैसी बीमारी से जुड़ी है या नहीं।
विशेषज्ञ बताते हैं कि आज अधिकांश बायोप्सी प्रक्रियाएं सरल और सुरक्षित हैं। नीडल बायोप्सी में पतली सुई से कोशिकाएं ली जाती हैं, जिसमें मामूली असुविधा होती है। पेट और आंत की जांच के दौरान एंडोस्कोपी या कोलोनोस्कोपी से भी सैंपल लिया जाता है। त्वचा संबंधी मामलों में छोटा सा हिस्सा लेकर जांच की जाती है। अधिकतर मामलों में मरीज को अस्पताल में भर्ती होने की जरूरत नहीं पड़ती और वह उसी दिन घर जा सकता है।
स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि बायोप्सी को लेकर चार बड़ी भ्रांतियां आम हैं—पहली, इससे कैंसर फैलता है; दूसरी, बायोप्सी का मतलब कैंसर तय है; तीसरी, यह बेहद दर्दनाक प्रक्रिया है; और चौथी, बिना जांच कराए बीमारी अपने आप ठीक हो जाएगी। डॉक्टर इन सभी धारणाओं को गलत बताते हैं। उनका कहना है कि बीमारी पहले से मौजूद होती है, बायोप्सी केवल उसकी सच्चाई सामने लाती है।
ऑन्कोलॉजी विशेषज्ञों के मुताबिक, कई बार मरीज डर के कारण महीनों तक जांच नहीं कराते, जिससे बीमारी आगे बढ़ जाती है। समय पर बायोप्सी होने से न सिर्फ सही निदान होता है, बल्कि इलाज की दिशा भी स्पष्ट हो जाती है। शुरुआती चरण में पहचान होने पर कई गंभीर बीमारियों का सफल उपचार संभव है।
डॉक्टरों ने लोगों से अपील की है कि वे सोशल मीडिया या सुनी-सुनाई बातों पर भरोसा न करें। किसी भी शंका की स्थिति में अपने चिकित्सक से खुलकर चर्चा करें। बायोप्सी कोई बड़ा ऑपरेशन नहीं, बल्कि सटीक निदान का वैज्ञानिक साधन है। विशेषज्ञों का कहना है कि डर नहीं, जागरूकता ही बेहतर स्वास्थ्य की कुंजी है।