दवा परीक्षण नियमों में बड़ा बदलाव
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गैर-व्यावसायिक दवा निर्माण के लिए परीक्षण लाइसेंस की अनिवार्यता समाप्त, ऑनलाइन पूर्व सूचना प्रणाली लागू की गई।
BA/BE अध्ययनों में अनुमति प्रक्रिया सरल होने से जेनेरिक दवाओं के विकास और नवाचार को बढ़ावा मिलेगा।
Delhi/ स्वास्थ्य मंत्रालय द्वारा अधिसूचित इन संशोधनों को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के “न्यूनतम सरकार, अधिकतम सुशासन” और व्यापार सुगमता बढ़ाने के विजन के अनुरूप माना जा रहा है। मंत्रालय के अनुसार, इन बदलावों से देश में दवा विकास, नैदानिक अनुसंधान और नवाचार को नई गति मिलेगी।
मौजूदा व्यवस्था के तहत, दवा कंपनियों को परीक्षण, अनुसंधान या विश्लेषण के लिए सीमित मात्रा में दवाओं के निर्माण हेतु केंद्रीय औषधि मानक नियंत्रण संगठन (CDSCO) से परीक्षण लाइसेंस लेना अनिवार्य था। यह प्रक्रिया समयसाध्य होने के साथ-साथ उद्योग पर अतिरिक्त नियामक बोझ डालती थी।
अब अधिसूचित संशोधनों के तहत, गैर-व्यावसायिक उद्देश्यों के लिए दवाओं के निर्माण पर परीक्षण लाइसेंस की अनिवार्यता समाप्त कर दी गई है। इसके स्थान पर पूर्व सूचना प्रणाली लागू की गई है, जिसके तहत कंपनियां केवल CDSCO को ऑनलाइन सूचना देकर दवा विकास से जुड़े कार्य शुरू कर सकेंगी। हालांकि, यह छूट कुछ उच्च जोखिम वाली दवाओं पर लागू नहीं होगी, जिनमें साइटोटॉक्सिक दवाएं, मादक द्रव्य और मनोरोगी पदार्थ शामिल हैं।
स्वास्थ्य मंत्रालय का अनुमान है कि इस बदलाव से दवा विकास के जीवन चक्र में कम से कम 90 दिनों की बचत होगी। वहीं, जिन श्रेणियों में अभी भी परीक्षण लाइसेंस आवश्यक है, उनके लिए वैधानिक समय सीमा को 90 दिनों से घटाकर 45 दिन कर दिया गया है। यह कदम खास तौर पर महत्वपूर्ण है, क्योंकि CDSCO हर साल लगभग 30,000 से 35,000 परीक्षण लाइसेंस आवेदनों का निपटारा करता है।
नैदानिक अनुसंधान को और गति देने के लिए कम जोखिम वाली कुछ श्रेणियों के जैवउपलब्धता और जैवसमतुल्यता (BA/BE) अध्ययनों के लिए पूर्व अनुमति की शर्त भी समाप्त कर दी गई है। अब ऐसे अध्ययन केवल एक साधारण ऑनलाइन सूचना देकर शुरू किए जा सकेंगे। इससे विशेष रूप से जेनेरिक दवाओं के क्षेत्र में अनुसंधान प्रक्रिया तेज और सरल होगी। गौरतलब है कि CDSCO प्रतिवर्ष लगभग 4,000 से 4,500 BA/BE अध्ययन आवेदनों पर कार्रवाई करता है।
इन संशोधनों के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए राष्ट्रीय एकल खिड़की प्रणाली और सुगम पोर्टल पर विशेष ऑनलाइन मॉड्यूल उपलब्ध कराए जाएंगे। इससे उद्योग को पारदर्शी, डिजिटल और परेशानी-मुक्त व्यवस्था मिलेगी।
स्वास्थ्य मंत्रालय का कहना है कि इन सुधारों से न केवल उद्योग को लाभ होगा, बल्कि CDSCO अपने मानव संसाधनों का बेहतर उपयोग कर सकेगा। इससे नियामक निगरानी की गुणवत्ता और प्रभावशीलता में भी सुधार आएगा। समग्र रूप से, यह पहल जन विश्वास सिद्धांत को मजबूत करते हुए भारत को दवा अनुसंधान और विकास के लिए एक विश्वसनीय वैश्विक केंद्र के रूप में स्थापित करने की दिशा में महत्वपूर्ण मील का पत्थर मानी जा रही है।