बैतूल में 11 केवी लाइन शिफ्टिंग में मजदूर की दर्दनाक मौत
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बिजली सप्लाई बंद होने के दावे के बावजूद हादसा, शव दो घंटे तक खंभे पर लटका रहा, पुलिस ने मर्ग कायम कर जांच शुरू की।
बिजली विभाग और ठेकेदार की भूमिका जांच के दायरे में, सुरक्षा मानकों पर गंभीर सवाल खड़े हुए।
Betul/ मध्यप्रदेश के बैतूल जिले के मुलताई क्षेत्र में 11 केवी बिजली लाइन शिफ्टिंग के दौरान एक मजदूर की करंट लगने से मौके पर ही मौत हो गई। हादसा इतना भयावह था कि मृतक का शव करीब दो घंटे तक बिजली के खंभे पर ही लटका रहा। पुलिस और प्रशासन ने कड़ी मशक्कत के बाद शव को नीचे उतारकर पोस्टमार्टम के लिए भेजा। घटना ने बिजली कार्यों में सुरक्षा मानकों पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
बैतूल जिले के मुलताई-बिरुल रोड पर उस समय हड़कंप मच गया, जब 11 केवी बिजली लाइन शिफ्टिंग के दौरान एक मजदूर की करंट लगने से मौत हो गई। जानकारी के अनुसार वाइटल कंपनी के ठेकेदार द्वारा लाइन शिफ्टिंग का कार्य कराया जा रहा था। काम शुरू करने से पहले बिजली सप्लाई बंद किए जाने का दावा किया गया था।
बताया जा रहा है कि मजदूर सुमारु कुलस्ते, जो मंडला जिले का निवासी था, खंभे पर चढ़कर लाइन बदलने का कार्य कर रहा था। इसी दौरान अचानक उसे तेज करंट लगा और वह खंभे पर ही अचेत होकर लटक गया। प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक हादसा इतना अचानक हुआ कि अन्य मजदूर कुछ समझ ही नहीं पाए।
घटना के बाद मौके पर अफरा-तफरी का माहौल बन गया। साथी मजदूर डालचंद यादव सदमे में आकर बेहोश हो गया, जिसे तुरंत अस्पताल में भर्ती कराया गया। करीब दो घंटे की मशक्कत के बाद पुलिस और बिजली विभाग की टीम ने शव को नीचे उतारा।
साइड इंजीनियर का कहना है कि कार्य शुरू करने से पहले विद्युत आपूर्ति बंद करवा दी गई थी। बावजूद इसके करंट कैसे आया, यह जांच का विषय है। मुलताई पुलिस ने मर्ग कायम कर मामले की जांच शुरू कर दी है। साथ ही बिजली विभाग और ठेकेदार की भूमिका भी जांच के दायरे में है। इस हादसे ने एक बार फिर बिजली विभाग के कार्यों में सुरक्षा प्रोटोकॉल और निगरानी व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। स्थानीय लोगों ने जिम्मेदारों पर कार्रवाई की मांग की है। प्रशासन का कहना है कि जांच रिपोर्ट आने के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी।