NMPB चिंतन शिविर: औषधीय पादप क्षेत्र को नई नीति व नवाचार दिशा

Wed 11-Feb-2026,05:29 PM IST +05:30

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NMPB चिंतन शिविर: औषधीय पादप क्षेत्र को नई नीति व नवाचार दिशा NMPB-Chintan-Shivir-Medicinal-Plants-Policy-Innovation
  • विज्ञान भवन में आयोजित एनएमपीबी चिंतन शिविर में औषधीय वनस्पतियों के संरक्षण, अनुसंधान और वैश्विक प्रतिस्पर्धा पर व्यापक नीति मंथन किया गया।

  • आयुष मंत्री ने किसानों की आय बढ़ाने और आत्मनिर्भर भारत के लक्ष्य के लिए उच्च मूल्य औषधीय फसलों को बढ़ावा देने पर जोर दिया।

Delhi / New Delhi :

New Delhi/ आयुष मंत्रालय के तहत राष्ट्रीय औषधीय पादप बोर्ड (एनएमपीबी) ने नई दिल्ली के विज्ञान भवन में औषधीय वनस्पतियों पर एक दिवसीय चिंतन शिविर आयोजित किया। इस कार्यक्रम में नीति निर्माताओं, वैज्ञानिकों, उद्योग प्रतिनिधियों और राज्य अधिकारियों ने भाग लेकर औषधीय पादप क्षेत्र को स्थायी नियमों, अनुसंधान और नवाचार के माध्यम से सशक्त बनाने पर मंथन किया। शिविर का उद्देश्य ‘विकसित भारत’ और ‘आत्मनिर्भर भारत’ के लक्ष्यों के अनुरूप एक सशक्त रोडमैप तैयार करना रहा।
नई दिल्ली के विज्ञान भवन में आयोजित इस चिंतन शिविर का उद्घाटन आयुष राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) एवं स्वास्थ्य राज्य मंत्री श्री प्रतापराव जाधव ने किया। उन्होंने कहा कि औषधीय वनस्पतियां भारत की पारंपरिक ज्ञान प्रणाली की आधारशिला हैं और देश की जैविक व आर्थिक विरासत का महत्वपूर्ण हिस्सा भी हैं। आयुर्वेद और अन्य आयुष पद्धतियों की वैश्विक स्वीकृति बढ़ने से भारत के पास औषधीय पौधों और हर्बल उत्पादों का प्रमुख वैश्विक आपूर्तिकर्ता बनने का सुनहरा अवसर है।

मंत्री ने बताया कि सरकार किसानों को वर्षा आधारित और कम उपजाऊ भूमि पर उच्च मूल्य वाली औषधीय फसलें उगाने के लिए प्रोत्साहित कर रही है। इससे किसानों की आय में वृद्धि के साथ पर्यावरण संरक्षण और जनस्वास्थ्य सुरक्षा को भी मजबूती मिल रही है। उन्होंने एनएमपीबी के 25 गौरवशाली वर्षों के उपलक्ष्य में स्मारिका और टेरेस गार्डन पुस्तिका का विमोचन किया। साथ ही सीएसआईआर-सीआईएमएपी, लखनऊ द्वारा विकसित एनासाइक्लस पाइरेथ्रम की नई किस्म भी जारी की गई।

इस अवसर पर एनएमपीबी और अगरकर अनुसंधान संस्थान के बीच सहयोगात्मक अनुसंधान को बढ़ावा देने के लिए समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए गए। मंत्री ने कहा कि पिछड़े और अग्रगामी संबंधों को मजबूत कर, बाजार पहुंच बढ़ाकर और गुणवत्ता व प्रामाणिकता सुनिश्चित कर औषधीय पादप क्षेत्र को वैश्विक प्रतिस्पर्धा के लिए तैयार किया जा सकता है।

आयुष मंत्रालय के सचिव वैद्य राजेश कोटेचा ने कहा कि एनएमपीबी की रजत जयंती आत्मनिरीक्षण और नवाचार का अवसर है। उन्होंने वैज्ञानिक प्रमाणीकरण, ट्रेसबिलिटी और जलवायु अनुकूलन पर ध्यान केंद्रित करने की आवश्यकता पर बल दिया, ताकि भारत की जैव विविधता का संरक्षण और अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप उपयोग सुनिश्चित हो सके।

अपर सचिव एवं वित्तीय सलाहकार श्री होवेदा अब्बास ने वित्तीय अनुशासन और समयबद्ध निधि उपयोग की आवश्यकता रेखांकित की। उन्होंने राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों को स्थायी वित्तीय मॉडल अपनाने और स्थानीय समुदायों तक पहुंच बढ़ाने का आह्वान किया।

एनएमपीबी के सीईओ डॉ. महेश कुमार दाधीच ने कहा कि बोर्ड संरक्षण, क्षमता निर्माण और अनुसंधान प्रोत्साहन के माध्यम से संपूर्ण मूल्य श्रृंखला को मजबूत करने के लिए प्रतिबद्ध है। चिंतन शिविर में अनुसंधान एवं विकास, गुणवत्ता आश्वासन, उद्योग सहयोग और सर्वोत्तम खेती प्रथाओं पर तकनीकी सत्र आयोजित किए गए। इन चर्चाओं से औषधीय पादप क्षेत्र के अगले चरण के विकास के लिए एक ठोस नीतिगत आधार तैयार होने की उम्मीद है।