उज्जैन को 1133 करोड़ जल परियोजना
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1133.67 करोड़ की जलावर्धन परियोजना से उज्जैन में पेयजल संकट समाप्त करने और 17 नई टंकियों के निर्माण का बड़ा निर्णय।
सिंहस्थ 2028 को विश्वस्तरीय बनाने की तैयारी, धार्मिक पर्यटन और बुनियादी ढांचे के विस्तार पर सरकार का विशेष फोकस।
Ujjain/ उज्जैन में विकास की नई इबारत लिखते हुए मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कालिदास अकादमी परिसर में 1133.67 करोड़ रुपये की बहुप्रतीक्षित जलावर्धन परियोजना का भूमि पूजन किया। इसके साथ ही 47.23 करोड़ रुपये के अन्य विकास कार्यों का भी शिलान्यास किया गया। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने उज्जैन को धार्मिक, सांस्कृतिक और औद्योगिक दृष्टि से देश का अग्रणी शहर बनाने का संकल्प दोहराया और कई महत्वपूर्ण घोषणाएं कीं।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि वर्ष 2028 में आयोजित होने वाला सिंहस्थ महाकुंभ विश्वस्तरीय होगा। इसके लिए अभी से व्यापक स्तर पर तैयारियां शुरू कर दी गई हैं। हरियाखेड़ी जल योजना के माध्यम से शहर में पेयजल व्यवस्था को सुदृढ़ किया जाएगा। इस परियोजना के तहत उज्जैन में 17 नई पानी की टंकियों का निर्माण होगा, जिससे जल आपूर्ति की समस्या का स्थायी समाधान संभव होगा।
मुख्यमंत्री ने उज्जैन को औद्योगिक रूप से सशक्त बनाने की दिशा में भी महत्वपूर्ण घोषणा की। उन्होंने बताया कि रेडीमेड गारमेंट उद्योग के विस्तार से 5000 से अधिक महिलाओं को रोजगार मिलेगा। इससे महिला सशक्तिकरण को बढ़ावा मिलेगा और स्थानीय अर्थव्यवस्था मजबूत होगी।
इसके अलावा उज्जैन में 1200 लोगों की क्षमता वाला भव्य गीता भवन बनाया जाएगा, जो प्रदेश का सबसे बड़ा गीता भवन होगा। सांदीपनि आश्रम के विकास कार्यों को भी गति दी जाएगी। मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि उज्जैन को पूर्णतः शराब मुक्त नगर घोषित किया गया है और प्रदेश के सभी धार्मिक नगरों में शराबबंदी लागू की गई है, जिससे सुरक्षित और सकारात्मक वातावरण सुनिश्चित हो सके।
स्वास्थ्य क्षेत्र में बड़ी घोषणा करते हुए मुख्यमंत्री ने उज्जैन में आयुर्वेद एम्स स्थापित करने की बात कही। साथ ही प्रस्तावित तीन नए मेडिकल कॉलेजों में से एक उज्जैन में खोले जाने की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि इन योजनाओं से उज्जैन महानगर के रूप में विकसित होगा और धार्मिक पर्यटन के साथ-साथ शिक्षा एवं स्वास्थ्य के क्षेत्र में भी नई पहचान बनाएगा।