अमेरिका-ईरान तनाव से तेल 100 डॉलर पार, वैश्विक बाजारों में भारी गिरावट
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अमेरिका-ईरान वार्ता विफल होने के बाद कच्चे तेल की कीमतें 100 डॉलर पार पहुंचीं, जिससे वैश्विक बाजारों में अस्थिरता और निवेशकों की चिंता बढ़ गई है।
होर्मुज जलडमरूमध्य पर खतरा बढ़ने से वैश्विक सप्लाई चेन प्रभावित होने की आशंका, जिससे तेल कीमतें और महंगाई बढ़ सकती है।
US Iran/ अमेरिका और ईरान के बीच कूटनीतिक वार्ता विफल होने के बाद वैश्विक स्तर पर आर्थिक अस्थिरता का माहौल बन गया है। पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद में हुई शांति वार्ता के टूटते ही कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल आया और दुनिया भर के शेयर बाजारों में गिरावट दर्ज की गई। इस घटनाक्रम ने वैश्विक निवेशकों की चिंता बढ़ा दी है और आने वाले दिनों में आर्थिक दबाव बढ़ने के संकेत मिल रहे हैं।
वार्ता विफल होने के तुरंत बाद अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में जोरदार तेजी देखी गई। WTI क्रूड करीब 8 प्रतिशत बढ़कर 104 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गया, जबकि ब्रेंट क्रूड लगभग 102 डॉलर प्रति बैरल के स्तर पर ट्रेड करता नजर आया। विशेषज्ञों का मानना है कि मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव और सप्लाई बाधित होने की आशंका ने बाजार को प्रभावित किया है।
तेल की कीमतों में उछाल का असर वैश्विक शेयर बाजारों पर साफ दिखाई दिया। एशियाई बाजारों में भारी गिरावट दर्ज की गई, जहां जापान का निक्केई इंडेक्स 600 अंक से ज्यादा टूट गया। हांगकांग का हैंग सेंग इंडेक्स करीब 400 अंक गिरा, जबकि दक्षिण कोरिया का कोस्पी 1.5 प्रतिशत नीचे फिसल गया। यूरोपीय बाजारों में भी कमजोरी का माहौल रहा और प्रमुख सूचकांक लाल निशान में बंद हुए।
ग्लोबल संकेतों का असर भारतीय बाजार पर भी पड़ने की संभावना है। गिफ्ट निफ्टी शुरुआती कारोबार में ही करीब 300 अंक गिरकर 23,700 के स्तर पर आ गया, जिससे बाजार में संभावित गिरावट का संकेत मिला है। हालांकि पिछले सत्र में सेंसेक्स और निफ्टी में अच्छी तेजी देखी गई थी, लेकिन वर्तमान हालात निवेशकों के लिए चिंता का विषय बने हुए हैं।
शांति वार्ता विफल होने के बाद अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump का रुख और सख्त हो गया है। रिपोर्ट्स के अनुसार ईरानी बंदरगाहों की नौसैनिक नाकेबंदी के आदेश दिए गए हैं और संभावित सैन्य कार्रवाई पर भी विचार किया जा रहा है। इससे क्षेत्र में युद्ध की आशंका और गहरा गई है।
विशेषज्ञों के अनुसार, होर्मुज जलडमरूमध्य सबसे बड़ा जोखिम बना हुआ है, क्योंकि दुनिया की करीब 20 प्रतिशत तेल आपूर्ति इसी रास्ते से होती है। यदि यहां किसी प्रकार की बाधा आती है, तो वैश्विक सप्लाई चेन पर गंभीर असर पड़ सकता है।
करेंसी और कमोडिटी बाजारों में भी हलचल देखने को मिली है। अमेरिकी डॉलर मजबूत हुआ है, जबकि अन्य मुद्राओं में कमजोरी आई है। आने वाले दिनों में यह स्थिति वैश्विक अर्थव्यवस्था पर व्यापक प्रभाव डाल सकती है।