इस ताजा हमले को अमेरिका-इजरायल गठबंधन की कार्रवाई का हिस्सा माना जा रहा है, हालांकि इस पर आधिकारिक पुष्टि सीमित है। ईरान ने इसे “क्रूर हमला” बताते हुए अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन करार दिया है। ईरानी परमाणु ऊर्जा संगठन के प्रमुख मोहम्मद इस्लामी ने अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (IAEA) को पत्र लिखकर दावा किया कि नतांज पर दो बार हमला किया गया।
सैटेलाइट तस्वीरों से यह सामने आया है कि हमले में फैसिलिटी के प्रवेश द्वार और कुछ इमारतों को नुकसान पहुंचा है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, कम से कम तीन इमारतें पूरी तरह नष्ट हो गई हैं। हालांकि IAEA प्रमुख रफाएल ग्रॉसी ने कहा कि नतांज के कुछ हिस्सों में क्षति जरूर हुई है, लेकिन मुख्य भूमिगत यूरेनियम संवर्धन हॉल सुरक्षित है और किसी बड़े रेडियोलॉजिकल खतरे की आशंका नहीं है।
यह हमला उस पुराने तनाव की याद भी दिलाता है, जब जून 2025 में ईरान और इजरायल के बीच 12 दिनों तक संघर्ष चला था। उस दौरान भी नतांज समेत कई परमाणु स्थलों को निशाना बनाया गया था, जिससे ईरान की परमाणु गतिविधियों को बड़ा झटका लगा था।
ईरान लगातार यह दावा करता रहा है कि उसका परमाणु कार्यक्रम पूरी तरह शांतिपूर्ण उद्देश्यों के लिए है, लेकिन अंतरराष्ट्रीय समुदाय, खासकर पश्चिमी देश, इस पर संदेह जताते रहे हैं। हाल के महीनों में IAEA ने भी नतांज में कुछ गतिविधियों का संकेत दिया था, हालांकि उनकी प्रकृति स्पष्ट नहीं थी।
विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे हमले ईरान के परमाणु कार्यक्रम को कुछ समय के लिए पीछे जरूर धकेल सकते हैं, लेकिन इसे पूरी तरह खत्म करना आसान नहीं होगा। दूसरी ओर, ईरान ने इस हमले के बाद जवाबी कार्रवाई की चेतावनी दी है, जिससे क्षेत्र में तनाव और बढ़ने की संभावना है।
कुल मिलाकर, नतांज पर हुआ यह हमला सिर्फ एक सैन्य कार्रवाई नहीं, बल्कि वैश्विक राजनीति और सुरक्षा के लिहाज से बेहद संवेदनशील मुद्दा बन गया है, जिस पर पूरी दुनिया की नजर टिकी हुई है।