श्रीलंका में ईंधन संकट गहराया: पेट्रोल-डीजल 25% महंगा, 4 दिन का वर्किंग वीक लागू
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Sri Lanka Fuel Crisis
पेट्रोल-डीजल की कीमतों में 25% तक बढ़ोतरी.
पेट्रोल-डीजल की कीमतों में 25% तक बढ़ोतरी.
मिडिल ईस्ट तनाव से तेल सप्लाई पर असर.
Sri Lanka / श्रीलंका इस समय एक बार फिर गंभीर आर्थिक और ऊर्जा संकट की ओर बढ़ता नजर आ रहा है। कच्चे तेल की सप्लाई में आई भारी बाधा के बीच सरकार ने पेट्रोल और डीजल की कीमतों में करीब 25% तक की बढ़ोतरी कर दी है। 22 मार्च को हुई इस बढ़ोतरी के बाद देश में रेगुलर पेट्रोल की कीमत 81 श्रीलंकाई रुपए बढ़कर 398 रुपए प्रति लीटर हो गई है, जबकि डीजल 79 रुपए महंगा होकर 382 रुपए प्रति लीटर पर पहुंच गया है।
दो हफ्तों में दूसरी बार बढ़े दाम
गौर करने वाली बात यह है कि यह महज दो हफ्तों के भीतर दूसरी बार कीमतों में इजाफा किया गया है। इससे पहले पिछले हफ्ते ही ईंधन के दामों में 8% की बढ़ोतरी की गई थी। लगातार बढ़ती कीमतों ने आम जनता की चिंता बढ़ा दी है, क्योंकि इसका सीधा असर परिवहन, खाद्य वस्तुओं और रोजमर्रा के खर्चों पर पड़ता है।
4 दिन का वर्किंग वीक और वर्क फ्रॉम होम
हालात की गंभीरता को देखते हुए राष्ट्रपति अनुरा कुमारा दिसानायके ने बड़ा कदम उठाते हुए देश में ‘4 डे वर्किंग वीक’ लागू कर दिया है। अब सरकारी और निजी दफ्तर हफ्ते में केवल चार दिन ही काम करेंगे। इसके साथ ही कंपनियों को निर्देश दिए गए हैं कि जहां संभव हो, कर्मचारियों को वर्क फ्रॉम होम की सुविधा दी जाए, ताकि सड़कों पर वाहनों की संख्या कम हो और ईंधन की बचत हो सके।
मिडिल ईस्ट युद्ध का असर
इस संकट के पीछे सबसे बड़ी वजह मिडिल ईस्ट में जारी तनाव है। ईरान, अमेरिका और इजरायल के बीच चल रहे संघर्ष ने वैश्विक तेल आपूर्ति को बुरी तरह प्रभावित किया है। खासतौर पर ईरान द्वारा ‘स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज’ को प्रभावी रूप से बंद करने से स्थिति और गंभीर हो गई है। यह वही समुद्री मार्ग है, जहां से दुनिया के लगभग 20% तेल का निर्यात होता है।
आयात पर निर्भरता बना बड़ी समस्या
श्रीलंका अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए पूरी तरह आयात पर निर्भर है। कच्चा तेल मुख्य रूप से मिडिल ईस्ट से आता है, जबकि रिफाइंड पेट्रोलियम उत्पाद सिंगापुर, मलेशिया और दक्षिण कोरिया से मंगाए जाते हैं। सप्लाई बाधित होने के कारण देश के पास ईंधन का स्टॉक तेजी से घट रहा है। यहां तक कि देश की इकलौती रिफाइनरी, जो ईरान से जुड़े स्रोतों पर निर्भर है, वह भी कच्चे तेल की कमी से जूझ रही है।
2022 जैसा संकट फिर लौटने का खतरा
सरकार ने चेतावनी दी है कि अगर यह स्थिति लंबी चली, तो देश एक बार फिर 2022 जैसे आर्थिक संकट में फंस सकता है। उस समय श्रीलंका को विदेशी मुद्रा भंडार खत्म होने के कारण 46 अरब डॉलर के कर्ज पर डिफॉल्ट घोषित करना पड़ा था। हालांकि बाद में IMF से 2.9 अरब डॉलर का राहत पैकेज मिला, जिससे स्थिति कुछ हद तक संभली थी।
ईंधन राशनिंग और भविष्य की चुनौती
सरकार ने पहले ही ईंधन की राशनिंग शुरू कर दी है, ताकि जरूरी सेवाओं के लिए स्टॉक बचाया जा सके। लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि अगर वैश्विक हालात जल्द नहीं सुधरे, तो श्रीलंका को एक बार फिर गंभीर आर्थिक और सामाजिक चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है।