ईरान-अमेरिका तनाव चरम पर: सीजफायर की कोशिशें, मिसाइल हमलों से हालात और बिगड़े
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Iran Israel Missile Attack
अमेरिका-ईरान के बीच सीजफायर पर बातचीत जारी.
अमेरिका-ईरान के बीच सीजफायर पर बातचीत जारी.
मिसाइल हमलों से मिडिल ईस्ट में तनाव बढ़ा.
Tehran / अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव के बीच अब सीजफायर की संभावनाओं पर चर्चा शुरू हो गई है, लेकिन हालात अभी भी बेहद नाजुक बने हुए हैं। खबरों के मुताबिक, डोनाल्ड ट्रम्प की टीम ईरान के साथ युद्ध विराम को लेकर बातचीत करना चाहती है। इस प्रक्रिया में ट्रम्प के करीबी सलाहकार जेरेड कुशनर और स्टीव विटकॉफ भी सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं। हालांकि यह बातचीत सीधे तौर पर नहीं हो रही है, बल्कि मिस्र, कतर और ब्रिटेन जैसे देश मध्यस्थ के रूप में काम कर रहे हैं।
ईरान ने बातचीत के लिए कुछ सख्त शर्तें रखी हैं। उसका कहना है कि पहले युद्ध को पूरी तरह रोका जाए, फिर उसे हुए नुकसान का मुआवजा दिया जाए और भविष्य में किसी भी हमले से बचाने की ठोस गारंटी दी जाए। लेकिन दूसरी तरफ ट्रम्प ने साफ कर दिया है कि अमेरिका फिलहाल ईरान की सभी शर्तें मानने के लिए तैयार नहीं है, खासकर मुआवजे की मांग को लेकर उसका रुख सख्त है।
अमेरिका की ओर से भी कुछ शर्तें सामने आई हैं। वॉशिंगटन चाहता है कि ईरान अपने मिसाइल प्रोग्राम को रोक दे, यूरेनियम एनरिचमेंट बंद करे और अपने परमाणु ठिकानों को निष्क्रिय करे। इसके अलावा अमेरिका चाहता है कि ईरान हिजबुल्लाह और हमास जैसे संगठनों को आर्थिक मदद देना भी बंद करे। इन मांगों के चलते दोनों देशों के बीच सहमति बनना फिलहाल मुश्किल नजर आ रहा है।
इसी बीच ईरान के राष्ट्रपति मसूद पजशकियान ने भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से फोन पर बातचीत की। उन्होंने BRICS देशों से अपील की कि वे ईरान पर हो रहे हमलों को रोकने में सक्रिय भूमिका निभाएं। उनका कहना था कि BRICS को बिना किसी बाहरी दबाव के स्वतंत्र रूप से इस मुद्दे पर कदम उठाना चाहिए। साथ ही उन्होंने मिडिल ईस्ट के देशों को मिलकर एक नया क्षेत्रीय सुरक्षा ढांचा बनाने का सुझाव भी दिया, जिससे इलाके में स्थिरता बनी रहे और बाहरी हस्तक्षेप कम हो।
हालात की गंभीरता का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि जमीनी स्तर पर हमले लगातार जारी हैं। ईरान ने रविवार सुबह इजराइल पर चार बैलिस्टिक मिसाइलें दागीं, जिसमें 300 से ज्यादा लोग घायल हो गए। घायलों में कई बच्चे भी शामिल बताए जा रहे हैं। इससे पहले शनिवार रात को भी ईरान ने डिमोना और अराद शहरों को निशाना बनाया था, जहां इजराइल का अहम परमाणु संयंत्र स्थित है।
इन हमलों के पीछे ट्रम्प की हालिया चेतावनी को भी एक बड़ी वजह माना जा रहा है। ट्रम्प ने सोशल मीडिया पर कहा था कि अगर 48 घंटे के भीतर होर्मुज स्ट्रेट को नहीं खोला गया, तो अमेरिका ईरान के पावर प्लांट्स पर हमला करेगा। इसके जवाब में ईरान ने भी सख्त चेतावनी दी है कि अगर उसके ऊर्जा ढांचे को नुकसान पहुंचाया गया, तो वह मिडिल ईस्ट में अमेरिका और इजराइल से जुड़े सभी ऊर्जा प्रतिष्ठानों को निशाना बनाएगा।
इस बीच अमेरिका ने दावा किया है कि उसने ईरान की एक मिसाइल फैक्ट्री को तबाह कर दिया है। अमेरिकी सेंट्रल कमांड के अनुसार, तेहरान के दक्षिण-पूर्व में स्थित ‘कुह-ए बरजमाली मिसाइल असेंबली फैसिलिटी’ पर हमला किया गया, जहां छोटे और मध्यम दूरी की बैलिस्टिक मिसाइलें बनाई जा रही थीं।
कुल मिलाकर, एक तरफ कूटनीतिक बातचीत की कोशिशें जारी हैं, तो दूसरी तरफ जमीनी स्तर पर संघर्ष और तेज हो रहा है। ऐसे में आने वाले दिन यह तय करेंगे कि यह तनाव शांति की ओर बढ़ेगा या फिर और बड़े टकराव में बदल जाएगा।