ईरान-इजरायल संघर्ष बढ़ा: 12 इस्लामिक देशों की चेतावनी, कतर ने ईरानी अधिकारियों को निकाला

Thu 19-Mar-2026,05:48 PM IST +05:30

ताजा खबरों से अपडेट रहने के लिए हमारे Whatsapp Channel को Join करें |

Follow Us

ईरान-इजरायल संघर्ष बढ़ा: 12 इस्लामिक देशों की चेतावनी, कतर ने ईरानी अधिकारियों को निकाला Middle East Tension 2026
  • ईरान के हमलों पर 12 देशों की कड़ी प्रतिक्रिया.

  • कतर ने ईरानी अधिकारियों को देश छोड़ने का आदेश दिया.

  • खाड़ी क्षेत्र में बढ़ता तनाव और ऊर्जा संकट की आशंका.

Doha / Doha :

Doha / इजरायल और ईरान के बीच जारी संघर्ष अब एक व्यापक क्षेत्रीय संकट का रूप लेता जा रहा है। हालात इतने गंभीर हो चुके हैं कि खाड़ी क्षेत्र के कई देशों की सुरक्षा सीधे खतरे में आ गई है। हाल ही में इजरायल द्वारा ईरान के सबसे बड़े गैस प्रोजेक्ट साउथ पार्स फील्ड पर हमले के बाद ईरान ने जवाबी कार्रवाई करते हुए कतर और संयुक्त अरब अमीरात के गैस प्लांट्स को निशाना बनाया। इस हमले के बाद पूरे पश्चिम एशिया में तनाव और ज्यादा बढ़ गया है।

स्थिति की गंभीरता को देखते हुए 12 अरब और इस्लामिक देशों के विदेश मंत्रियों ने एक संयुक्त बयान जारी कर ईरान के हमलों की कड़ी निंदा की है। सऊदी अरब की राजधानी रियाद में हुई इस बैठक में अजरबैजान, बहरीन, मिस्र, जॉर्डन, कुवैत, लेबनान, पाकिस्तान, कतर, सऊदी अरब, सीरिया, तुर्किए और संयुक्त अरब अमीरात के प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया। सभी देशों ने एक स्वर में ईरान से तुरंत हमले रोकने और अंतरराष्ट्रीय कानून का सम्मान करने की अपील की।

संयुक्त बयान में यह भी कहा गया कि ईरान ने रिहायशी इलाकों, तेल सुविधाओं, एयरपोर्ट, जल संयंत्रों और कूटनीतिक परिसरों को निशाना बनाकर गंभीर गलती की है। ऐसे हमले न सिर्फ अंतरराष्ट्रीय नियमों का उल्लंघन हैं, बल्कि क्षेत्रीय स्थिरता के लिए भी बड़ा खतरा हैं। विदेश मंत्रियों ने यह भी स्पष्ट किया कि किसी भी देश की संप्रभुता का उल्लंघन बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

इस बीच, कतर ने अपने यहां रास लफ्फान इंडस्ट्रियल सिटी पर हुए हमले की कड़ी प्रतिक्रिया दी है। कतर सरकार ने इसे अपनी संप्रभुता और राष्ट्रीय सुरक्षा पर सीधा हमला बताया। इतना ही नहीं, कतर ने ईरानी दूतावास के सैन्य और सुरक्षा अधिकारियों को ‘पर्सोना नॉन ग्राटा’ घोषित कर दिया और उन्हें 24 घंटे के भीतर देश छोड़ने का आदेश दे दिया। यह कदम इस बात का संकेत है कि कतर अब इस मामले को बेहद गंभीरता से ले रहा है।

दूसरी ओर, ईरान ने भी अमेरिका और इजरायल पर अपने ऊर्जा ठिकानों को निशाना बनाने का आरोप लगाया है। यानी दोनों पक्ष एक-दूसरे पर हमलों का आरोप लगा रहे हैं, जिससे हालात और जटिल हो गए हैं।

कुल मिलाकर, यह संघर्ष अब केवल दो देशों तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि पूरे क्षेत्र को अपनी चपेट में ले रहा है। खाड़ी देशों की अर्थव्यवस्था और वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति पर इसका सीधा असर पड़ सकता है। ऐसे में अंतरराष्ट्रीय समुदाय की चिंता बढ़ना स्वाभाविक है।

अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या यह तनाव जल्द थमेगा या फिर यह एक बड़े क्षेत्रीय युद्ध में बदल सकता है। फिलहाल, हालात बेहद नाजुक हैं और हर कदम आने वाले समय की दिशा तय करेगा।