इज़राइल हमले में IRGC प्रवक्ता नैनी की मौत: ईरान-इज़राइल संघर्ष और भड़का
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Ali Mohammad Naini Death
इज़रायली हमले में IRGC के वरिष्ठ अधिकारियों की मौत.
ईरान-इज़राइल के बीच जवाबी हमलों का सिलसिला जारी.
कुवैत की रिफाइनरी पर हमला, ऊर्जा संकट की आशंका.
Delhi / ईरान और इज़राइल के बीच जारी संघर्ष ने एक बार फिर गंभीर मोड़ ले लिया है। शुक्रवार को हुए इज़रायली हवाई हमले में ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड्स कोर (IRGC) के प्रवक्ता जनरल अली मोहम्मद नैनी की मौत की पुष्टि ईरानी सरकारी टीवी ने की है। उनके साथ बासिज फोर्स के खुफिया प्रमुख जनरल इस्माइल अहमदी भी इस हमले में मारे गए। यह घटना न केवल सैन्य दृष्टि से अहम है, बल्कि इससे क्षेत्रीय तनाव और बढ़ने की आशंका भी गहरा गई है।
दिलचस्प बात यह है कि अपनी मौत से कुछ घंटे पहले ही जनरल नैनी ने इज़रायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के उस दावे को खारिज किया था, जिसमें कहा गया था कि ईरान अब यूरेनियम संवर्धन और बैलिस्टिक मिसाइल निर्माण में सक्षम नहीं है। नैनी ने स्पष्ट रूप से कहा था कि ईरान का मिसाइल कार्यक्रम पूरी तरह सक्रिय है और युद्ध की स्थिति में भी उत्पादन जारी है। उन्होंने इसे “आश्चर्यजनक क्षमता” बताते हुए कहा था कि देश के पास पर्याप्त भंडार मौजूद है और किसी तरह की चिंता की जरूरत नहीं है।
नैनी ने अपने बयान में यह भी कहा था कि ईरान की जनता सरकार के साथ खड़ी है और चाहती है कि यह युद्ध तब तक जारी रहे जब तक दुश्मन पूरी तरह से पराजित न हो जाए। लेकिन इसी बयान के कुछ घंटों बाद उनकी मौत ने हालात को और अधिक संवेदनशील बना दिया।
शुक्रवार को दोनों देशों के बीच जवाबी हमलों का सिलसिला भी जारी रहा। इज़राइल ने तेहरान को निशाना बनाकर कई हमले किए, जबकि इसके जवाब में ईरान ने भी मिसाइलें दागीं। हालांकि, इज़राइल ने दावा किया कि उसकी रक्षा प्रणाली ने इन मिसाइलों को इंटरसेप्ट कर लिया और किसी तरह का बड़ा नुकसान नहीं हुआ।
इस संघर्ष का असर केवल ईरान और इज़राइल तक सीमित नहीं रहा। कुवैत की मीना अल-अहमदी तेल रिफाइनरी पर ईरानी मिसाइल हमले के बाद आग लग गई, जिससे वहां के कई हिस्सों को बंद करना पड़ा। इस घटना ने खाड़ी क्षेत्र में ऊर्जा आपूर्ति को लेकर चिंता और बढ़ा दी है।
कुल मिलाकर, यह घटनाक्रम दर्शाता है कि मध्य-पूर्व में हालात तेजी से बिगड़ रहे हैं। बड़े सैन्य अधिकारियों की मौत, लगातार हमले और तेल ठिकानों को निशाना बनाए जाने से यह संघर्ष अब क्षेत्रीय सीमा से आगे बढ़कर वैश्विक चिंता का विषय बनता जा रहा है।