ईरान-इजरायल युद्ध तेज: चीन की कड़ी प्रतिक्रिया, खाड़ी देशों में बढ़ता तनाव और हमलों की श्रृंखला
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China Reaction Iran Israel War
चीन ने हमलों की कड़ी निंदा करते हुए बल प्रयोग का विरोध किया.
खाड़ी देशों और EU ने ईरान से हमले रोकने की अपील की.
क्षेत्रीय तनाव बढ़ा, अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चिंता गहराई.
China / पश्चिम एशिया में जारी ईरान-इजरायल संघर्ष अब लगातार और खतरनाक मोड़ लेता जा रहा है। हालात इतने गंभीर हो चुके हैं कि दुनिया के बड़े देश खुलकर अपनी प्रतिक्रिया दे रहे हैं। इसी कड़ी में चीन ने भी इस पूरे घटनाक्रम पर कड़ा रुख अपनाया है। चीन के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता लिन जियान ने साफ कहा कि ईरानी नेताओं की हत्या और नागरिक ठिकानों पर हमले किसी भी हालत में स्वीकार्य नहीं हैं। उन्होंने दो टूक कहा कि चीन अंतरराष्ट्रीय संबंधों में बल प्रयोग का हमेशा विरोध करता रहा है।
इस बयान की अहमियत इसलिए भी बढ़ जाती है क्योंकि हाल ही में ईरान के कई शीर्ष अधिकारियों की मौत की खबरें सामने आई हैं। इनमें सर्वोच्च राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद के सचिव अली लारीजानी का नाम भी शामिल है, जिनकी कथित तौर पर इजरायली हमले में मौत हुई। इसके अलावा अली शमखानी, अज़ीज़ नासिरज़ादेह, इस्माइल खतीब और मोहम्मद पाकपुर जैसे कई बड़े नाम भी इस संघर्ष की चपेट में आए हैं। इन घटनाओं ने ईरान की सैन्य और राजनीतिक संरचना को झकझोर कर रख दिया है।
28 फरवरी से शुरू हुए इस संघर्ष में अब तक करीब 1,300 लोगों की मौत की खबर है। लगातार हो रहे हमलों ने आम नागरिकों की जिंदगी भी मुश्किल कर दी है। इजरायल की ओर से ईरान समर्थित समूहों पर कार्रवाई जारी है, वहीं ईरान भी जवाबी हमले कर रहा है।
इस बीच खाड़ी देशों में भी तनाव तेजी से बढ़ा है। सऊदी अरब ने दावा किया है कि उसने यानबू बंदरगाह की ओर दागी गई एक बैलिस्टिक मिसाइल को सफलतापूर्वक रोक दिया। सऊदी सरकार ने चेतावनी दी है कि अगर ईरान हमले जारी रखता है, तो जवाब भी उतना ही कड़ा होगा। सऊदी विदेश मंत्रालय का बयान साफ संकेत देता है कि अब उसका धैर्य जवाब देने लगा है।
कतर ने भी सख्त कदम उठाते हुए ईरानी दूतावास के सैन्य अधिकारी को देश छोड़ने का आदेश दे दिया है। रास लाफान इंडस्ट्रियल सिटी पर हुए हमले के बाद कतर ने इसे अपनी संप्रभुता पर सीधा हमला बताया है।
यूरोपीय संघ ने भी इस पूरे घटनाक्रम पर चिंता जताई है और ईरान से होर्मुज जलडमरूमध्य खोलने तथा ऊर्जा और पानी से जुड़े बुनियादी ढांचे पर हमले तुरंत रोकने की अपील की है। फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने भी साफ कहा है कि ऐसे संवेदनशील ठिकानों को निशाना बनाना अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा है।
दूसरी ओर, इजरायल ने दावा किया है कि उसने ईरान समर्थित “इमाम हुसैन डिवीजन” के नए कमांडर को मार गिराया है, जिससे यह साफ है कि यह संघर्ष अभी और तेज हो सकता है।
कुल मिलाकर, यह टकराव अब सिर्फ दो देशों के बीच नहीं रह गया है, बल्कि पूरे क्षेत्र को अस्थिर कर रहा है। वैश्विक शक्तियों की बढ़ती भागीदारी और लगातार बढ़ते हमले यह संकेत दे रहे हैं कि हालात जल्द शांत होने की संभावना फिलहाल कम नजर आ रही है। दुनिया की नजर अब इस बात पर टिकी है कि क्या कूटनीति इस आग को शांत कर पाएगी या यह संघर्ष और व्यापक रूप ले लेगा।