ईरान विरोध-प्रदर्शन: 5 हजार मौतों का सरकारी दावा, कुर्द इलाकों में सबसे ज्यादा हिंसा

Sun 18-Jan-2026,06:35 PM IST +05:30

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ईरान विरोध-प्रदर्शन: 5 हजार मौतों का सरकारी दावा, कुर्द इलाकों में सबसे ज्यादा हिंसा Iran Protests
  • ईरान में विरोध-प्रदर्शनों में 5 हजार मौतों का सरकारी दावा.

  • कुर्द इलाकों में सबसे ज्यादा हिंसा और झड़पें.

  • 19 दिन की हिंसा में देशभर में भारी नुकसान.

Tehran Province / Tehran :

Tehran / ईरान में हाल के विरोध-प्रदर्शनों को लेकर चौंकाने वाली जानकारी सामने आई है। एक वरिष्ठ ईरानी अधिकारी ने रविवार को दावा किया कि सरकार अब तक कम से कम 5,000 मौतों की पुष्टि कर चुकी है। इनमें लगभग 500 सुरक्षाकर्मी भी शामिल हैं। सुरक्षा कारणों से नाम उजागर न करने वाले इस अधिकारी के अनुसार, इन मौतों के लिए आतंकवादी और हथियारबंद उपद्रवी जिम्मेदार हैं, जिन्होंने प्रदर्शन के नाम पर निर्दोष नागरिकों को निशाना बनाया।

कुर्द इलाकों में सबसे ज्यादा हिंसा
अधिकारी ने बताया कि सबसे ज्यादा हिंसा उत्तर-पश्चिम ईरान के कुर्द बहुल इलाकों में देखने को मिली। यह क्षेत्र पहले से ही अशांति और अलगाववादी गतिविधियों के लिए संवेदनशील माना जाता रहा है। बीते वर्षों में भी जब-जब बड़े विरोध-प्रदर्शन हुए, कुर्द इलाकों में झड़पें सबसे ज्यादा हिंसक रहीं। सरकार का कहना है कि इन इलाकों में सक्रिय कुर्द अलगाववादी समूहों ने हालात को और बिगाड़ा।

विदेशी साजिश का आरोप
ईरानी अधिकारी ने आरोप लगाया कि सड़कों पर उतरे प्रदर्शनकारियों को इजराइल और विदेशों में मौजूद हथियारबंद समूहों से समर्थन और हथियार मिले। ईरान सरकार लंबे समय से देश में अशांति के लिए विदेशी ताकतों को जिम्मेदार ठहराती आई है। उसका दावा है कि कट्टर दुश्मन इजराइल इन गतिविधियों के पीछे है। गौरतलब है कि पिछले साल जून में इजराइल द्वारा ईरान पर सैन्य हमले भी किए गए थे, जिससे दोनों देशों के बीच तनाव और बढ़ गया था।

मानवाधिकार संगठनों के अलग आंकड़े
हालांकि, सरकारी आंकड़ों से अलग अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संगठनों के दावे कुछ और ही कहानी बयां करते हैं। अमेरिका स्थित मानवाधिकार संगठन HRANA ने शनिवार को कहा कि उसके अनुसार अब तक 3,308 लोगों की मौत हुई है, जबकि 4,382 मामलों की जांच अभी जारी है। संगठन का यह भी दावा है कि प्रदर्शनों के दौरान 24,000 से अधिक लोगों को गिरफ्तार किया गया। वहीं, नॉर्वे स्थित ईरानी कुर्द मानवाधिकार संगठन ‘हेंगाव’ ने भी कहा कि दिसंबर के आखिर में शुरू हुए प्रदर्शनों के दौरान सबसे हिंसक झड़पें कुर्द इलाकों में ही हुईं।

19 दिन की हिंसा, भारी तबाही
ईरान में करीब 19 दिन तक चले हिंसक विरोध-प्रदर्शनों के बाद अब हालात शांत बताए जा रहे हैं, लेकिन इस दौरान देश को भारी नुकसान उठाना पड़ा। आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक, 30 प्रांतों में लगभग 250 मस्जिदें और 20 धार्मिक केंद्र क्षतिग्रस्त हुए। 182 एम्बुलेंस और फायर डिपार्टमेंट से जुड़े संसाधनों को नुकसान पहुंचा, जिससे करीब 5.3 मिलियन डॉलर का नुकसान हुआ।

बैंक, एटीएम और शिक्षा संस्थानों को नुकसान
हिंसा के दौरान बैंकों को भी बड़े पैमाने पर नुकसान पहुंचा। 317 बैंक शाखाएं पूरी तरह तबाह हो गईं, जबकि 4,700 बैंकों को 10% से 90% तक नुकसान हुआ। करीब 1,400 एटीएम क्षतिग्रस्त हुए और 250 एटीएम पूरी तरह बंद हो गए। बिजली क्षेत्र में भी 6.6 मिलियन डॉलर का नुकसान हुआ। इसके अलावा शिक्षा और संस्कृति से जुड़ी धरोहरें भी हिंसा की चपेट में आईं—265 स्कूल और शिक्षा केंद्र, 3 बड़ी लाइब्रेरियां, 8 सांस्कृतिक व पर्यटन स्थल और 4 सिनेमाघर क्षतिग्रस्त हुए।

शांति बहाल, लेकिन सवाल बाकी
हालात फिलहाल काबू में बताए जा रहे हैं, लेकिन मौतों की संख्या, तबाही का स्तर और अलग-अलग आंकड़े कई सवाल खड़े कर रहे हैं। यह स्पष्ट है कि इन 19 दिनों की हिंसा ने ईरान की सामाजिक, आर्थिक और सांस्कृतिक संरचना पर गहरा असर डाला है, जिसकी भरपाई आने वाले वर्षों तक चुनौती बनी रहेगी।