Nepal Crisis: ओली की गिरफ्तारी से क्यों भड़का देश? सड़कों पर उतरे समर्थक, बढ़ा तनाव
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KP Sharma Oli Arrest
ओली की गिरफ्तारी से नेपाल में तनाव.
काठमांडू में हिंसक झड़प और गिरफ्तारी.
जेन-ज़ेड आंदोलन से बढ़ा राजनीतिक संकट.
Kathmandu / नेपाल की राजनीति इस समय जबरदस्त उथल-पुथल के दौर से गुजर रही है। देश के पूर्व प्रधानमंत्री और CPN-UML के अध्यक्ष K. P. Sharma Oli को ‘जेन-ज़ेड’ विरोध प्रदर्शनों के दौरान हुई मौतों के मामले में पुलिस हिरासत में लिए जाने के बाद हालात तेजी से बिगड़ते नजर आ रहे हैं। उनकी गिरफ्तारी की खबर सामने आते ही देशभर में विरोध प्रदर्शन शुरू हो गए हैं, खासकर राजधानी Kathmandu में माहौल काफी तनावपूर्ण बना हुआ है।
ताजा घटनाक्रम में काठमांडू में प्रदर्शनकारियों और सुरक्षा बलों के बीच झड़प देखने को मिली, जिसमें एक व्यक्ति गंभीर रूप से घायल हो गया, जबकि पुलिस ने 9 लोगों को गिरफ्तार किया है। हालात को काबू में करने के लिए पुलिस को लाठीचार्ज भी करना पड़ा।
Kathmandu District Court ने एक महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए K. P. Sharma Oli और पूर्व गृह मंत्री Ramesh Lekhak को पांच दिनों की पुलिस रिमांड पर भेज दिया है। इन दोनों नेताओं पर सितंबर 2025 में हुए ‘जेन-ज़ेड’ आंदोलन के दौरान अत्यधिक बल प्रयोग करने और प्रदर्शनकारियों की मौत से जुड़े गंभीर आरोप लगाए गए हैं। रमेश लेखक अदालत में व्यक्तिगत रूप से पेश हुए, जबकि ओली ने अस्पताल से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए अपनी उपस्थिति दर्ज कराई।
ओली की गिरफ्तारी के विरोध में उनके समर्थक सड़कों पर उतर आए हैं। CPN-UML के कार्यकर्ताओं का आरोप है कि यह कार्रवाई राजनीतिक प्रतिशोध का हिस्सा है। उन्होंने वर्तमान गृह मंत्री सुधन गुरुंग के इस्तीफे की मांग भी की है। कई जगहों पर प्रदर्शनकारियों ने पुलिस पर पथराव किया, जिसके जवाब में पुलिस ने बल प्रयोग किया।
इस पूरे मामले में एक और गंभीर पहलू ओली की स्वास्थ्य स्थिति है। 74 वर्षीय ओली इस समय Tribhuvan University Teaching Hospital में भर्ती हैं और कई जटिल बीमारियों से जूझ रहे हैं। उनका दो बार किडनी ट्रांसप्लांट हो चुका है और वे एट्रियल फिब्रिलेशन, मधुमेह, उच्च रक्तचाप और हाइड्रोनेफ्रोसिस जैसी समस्याओं से पीड़ित हैं। डॉक्टरों ने उन्हें लगातार निगरानी में रखा हुआ है, जिससे कानूनी प्रक्रिया और भी जटिल हो गई है।
पार्टी समर्थकों ने गौरी बहादुर कार्की की अगुवाई में तैयार की गई जांच रिपोर्ट को “पूर्वाग्रह से ग्रसित” बताते हुए खारिज कर दिया है। उनका कहना है कि यह रिपोर्ट केवल विपक्षी नेताओं को फंसाने के लिए बनाई गई है। साथ ही, उन्होंने मांग की है कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच हो और उन गैर-सरकारी संगठनों की भूमिका की भी पड़ताल की जाए, जिन पर हिंसा भड़काने के आरोप लगाए जा रहे हैं।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि ओली की गिरफ्तारी से नेपाल में असंतोष और बढ़ सकता है। विपक्षी दल इसे “लोकतंत्र की हत्या” बता रहे हैं, जबकि सरकार का कहना है कि कानून अपना काम कर रहा है और किसी को भी मानवाधिकारों के उल्लंघन की छूट नहीं दी जा सकती।
आने वाले पांच दिन बेहद अहम माने जा रहे हैं, क्योंकि इस दौरान पुलिस ओली और लेखक से पूछताछ करेगी। वहीं CPN-UML ने चेतावनी दी है कि अगर उनके नेताओं को जल्द रिहा नहीं किया गया, तो वे पूरे देश में चक्का जाम और अनिश्चितकालीन हड़ताल करेंगे।
इस पूरे घटनाक्रम का सबसे दिलचस्प पहलू ‘जेन-ज़ेड’ पीढ़ी का उभार है। पहली बार नेपाल में युवाओं का एक स्वतःस्फूर्त आंदोलन इतना प्रभावशाली साबित हुआ है कि उसने देश के बड़े नेताओं को कानूनी घेरे में ला खड़ा किया है। यह संकेत देता है कि आने वाले समय में नेपाल की राजनीति में बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है, जहां युवा अपनी ताकत और आवाज के साथ पारंपरिक राजनीति को चुनौती देने के लिए पूरी तरह तैयार हैं।