रूस-यूक्रेन युद्ध पर शांति की पहल तेज: यूएई में संभावित त्रिपक्षीय बैठक, ट्रंप-जेलेंस्की वार्ता से उम्मीदें बढ़ीं
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Peace Talks UAE
यूएई में अमेरिका-रूस-यूक्रेन की संभावित त्रिपक्षीय बैठक.
ट्रंप-जेलेंस्की वार्ता के बाद शांति की उम्मीदें मजबूत.
‘बोर्ड ऑफ पीस’ के जरिए वैश्विक मध्यस्थता की कोशिश.
America / चार साल से जारी रूस-यूक्रेन युद्ध को समाप्त करने की दिशा में पहली बार ठोस कूटनीतिक पहल रंग लाती दिख रही है। दावोस में विश्व आर्थिक मंच (डब्ल्यूईएफ) के वार्षिक सम्मेलन के बाद यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमीर जेलेंस्की ने संकेत दिए हैं कि यूक्रेन, अमेरिका और रूस के बीच एक ऐतिहासिक त्रिपक्षीय बैठक 23 या 24 फरवरी को संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) में हो सकती है। अगर यह बैठक होती है, तो यह तीनों देशों के बीच युद्ध शुरू होने के बाद पहली सीधी त्रिपक्षीय बातचीत होगी, जिससे वैश्विक स्तर पर शांति की उम्मीदें बढ़ गई हैं।
ट्रंप-जेलेंस्की मुलाकात के बाद बदला माहौल
दावोस में जेलेंस्की और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बीच करीब एक घंटे तक चली बैठक को इस पूरी प्रक्रिया का अहम मोड़ माना जा रहा है। बैठक के बाद ट्रंप ने साफ शब्दों में कहा कि यह युद्ध अब खत्म होना चाहिए। उन्होंने रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के लिए भी सीधा संदेश दिया कि बहुत हो चुका है और अब और जानें नहीं जानी चाहिए।
जेलेंस्की ने भी इस बातचीत को सकारात्मक बताते हुए कहा कि किसी भी राष्ट्राध्यक्ष की तरह उनका पहला कर्तव्य अपने देश के हितों की रक्षा करना है। उन्होंने माना कि इस तरह की वार्ताएं आमतौर पर कठिन होती हैं, लेकिन इस बार बातचीत उम्मीद जगाने वाली रही। उनके अनुसार, अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल पहले रूस और यूक्रेन की टीमों से अलग-अलग बातचीत करेगा और इसके बाद यूएई में त्रिपक्षीय बैठक की संभावना है।
युद्ध की भयावह कीमत
डोनाल्ड ट्रंप ने युद्ध की भयावहता को रेखांकित करते हुए कहा कि सिर्फ पिछले महीने ही करीब 30 हजार लोगों की जान गई, जिनमें अधिकांश सैनिक थे। उन्होंने कहा कि अगर इस युद्ध को नहीं रोका गया, तो यह मानवता के लिए शर्मनाक होगा। ट्रंप का दावा है कि वह इस संघर्ष को रोकने के लिए किसी भी हद तक जाने को तैयार हैं और उन्होंने पहले भी कई युद्धों को रुकवाने में भूमिका निभाई है।
हालांकि ट्रंप ने यह भी स्वीकार किया कि रूस-यूक्रेन युद्ध को वह शुरू में आसान मान रहे थे, लेकिन यह उम्मीद से कहीं अधिक जटिल साबित हो रहा है। इसके बावजूद उनका कहना है कि समझौता अब ज्यादा दूर नहीं है।
ट्रंप की ‘बोर्ड ऑफ पीस’ पहल
इसी बीच ट्रंप ने वैश्विक शांति के लिए एक नई पहल करते हुए ‘बोर्ड ऑफ पीस’ के पहले चार्टर का औपचारिक ऐलान किया है। यह बोर्ड वैश्विक नेताओं का एक समूह है, जिसे भविष्य में संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद जैसे मंच के समान मध्यस्थ भूमिका निभाने के लिए तैयार किया जा रहा है। ट्रंप का दावा है कि हर देश इसका हिस्सा बनना चाहता है, हालांकि वास्तविकता में कई देशों ने इसमें शामिल होने से इनकार भी किया है।
‘टीम 20’: बोर्ड ऑफ पीस में शामिल देश
अब तक ट्रंप के ‘बोर्ड ऑफ पीस’ में 20 देश शामिल हो चुके हैं, जिन्हें ‘टीम 20’ कहा जा रहा है। इनमें अमेरिका के अलावा बहरीन, मोरक्को, अर्जेंटीना, आर्मेनिया, अजरबैजान, बुल्गारिया, हंगरी, इंडोनेशिया, जॉर्डन, कजाकिस्तान, कोसोवो, पाकिस्तान, पराग्वे, कतर, सऊदी अरब, तुर्की, संयुक्त अरब अमीरात, उज्बेकिस्तान और मंगोलिया शामिल हैं। ट्रंप का कहना है कि यह समूह भविष्य में वैश्विक संघर्षों को सुलझाने में अहम भूमिका निभा सकता है।
रूस और यूरोपीय देशों की आपत्ति
हालांकि रूस ने अब तक ‘बोर्ड ऑफ पीस’ में शामिल होने पर कोई अंतिम फैसला नहीं लिया है। पुतिन का कहना है कि इस तरह का निर्णय रणनीतिक साझेदारों से विचार-विमर्श के बाद ही किया जाएगा। उन्होंने यह भी कहा कि रूस अंतरराष्ट्रीय स्थिरता को मजबूत करने वाले प्रयासों का समर्थन करता रहा है और यूक्रेन संकट के समाधान में अमेरिकी प्रयासों को भी महत्व देता है।
वहीं यूरोप के कुछ देशों ने ट्रंप की इस पहल को साफ तौर पर खारिज कर दिया है। फ्रांस, नॉर्वे और स्वीडन ने बोर्ड ऑफ पीस में शामिल होने से इनकार कर दिया है। स्वीडन के प्रधानमंत्री उल्फ क्रिस्टर्सन ने कहा कि मौजूदा स्वरूप में यह बोर्ड उनके देश के सिद्धांतों के अनुरूप नहीं है। नॉर्वे ने भी स्पष्ट किया कि वह किसी ऐसी पहल का हिस्सा नहीं बन सकता जो संयुक्त राष्ट्र की बुनियाद को कमजोर करे।
क्या युद्ध का अंत करीब है?
ट्रंप बार-बार यह दावा कर रहे हैं कि उन्होंने हाल के वर्षों में आठ युद्ध रुकवाए हैं और रूस-यूक्रेन युद्ध भी जल्द ही उसी राह पर जा सकता है। उन्होंने भारत-पाकिस्तान के तनाव का जिक्र करते हुए कहा कि एक और बड़ा संघर्ष कभी भी भड़क सकता है, इसलिए वैश्विक स्तर पर शांति के लिए मजबूत प्रयास जरूरी हैं।
रूस-यूक्रेन युद्ध ने अब तक हजारों सैनिकों और नागरिकों की जान ली है और यह संघर्ष पूरी दुनिया के लिए आर्थिक और मानवीय संकट बन चुका है। ऐसे में अगर यूएई में प्रस्तावित त्रिपक्षीय बैठक होती है और उसमें किसी तरह की सहमति बनती है, तो यह न सिर्फ यूक्रेन और रूस बल्कि पूरी दुनिया के लिए राहत की खबर होगी। फिलहाल सबकी नजरें फरवरी के उस संभावित शांति प्रयास पर टिकी हैं, जो चार साल से चल रही इस खौफनाक जंग को खत्म करने की दिशा में निर्णायक साबित हो सकता है।