मिडिल ईस्ट युद्ध के बाद फिलीपींस ने तेल संकट में एनर्जी इमरजेंसी घोषित की
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फिलीपींस ने मिडिल ईस्ट युद्ध के कारण ऊर्जा संकट से निपटने के लिए नेशनल एनर्जी इमरजेंसी घोषित किया, लागू अवधि एक साल तक होगी।
तेल की बढ़ती कीमतों और सप्लाई कमी से ट्रांसपोर्ट, एयरलाइंस और आम जनता पर गंभीर असर पड़ा, हड़ताल और उड़ानों में कटौती हुई।
Philippines/ पिछले 26 दिनों से मिडिल ईस्ट में जारी युद्ध ने वैश्विक तेल आपूर्ति को गंभीर रूप से प्रभावित किया है। ईरान की होर्मुज स्ट्रेट पर नाकेबंदी और खाड़ी देशों के ऑयल इंफ्रास्ट्रक्चर पर हमलों की वजह से फिलीपींस जैसी तेल-आयातित अर्थव्यवस्था को गंभीर संकट का सामना करना पड़ा है। देश अपनी जरूरत का लगभग 98% तेल खाड़ी देशों से आयात करता है। युद्ध के चलते क्रूड ऑयल की कीमतों में जबरदस्त वृद्धि हुई है और पेट्रोल-डीजल की कीमतें दोगुनी हो चुकी हैं।
फिलीपींस के राष्ट्रपति फर्डिनेंड मार्कोस ने राष्ट्रीय एनर्जी इमरजेंसी लागू करते हुए कहा कि इसका उद्देश्य देश को बिजली कटौती और असामान्य तेल मूल्य से बचाना है। इस आपातकाल का प्रारंभिक कार्यकाल एक साल के लिए तय किया गया है, लेकिन राष्ट्रपति चाहें तो इसे बढ़ा या घटा सकते हैं। इसके तहत सरकार को तेल खरीदने, आपूर्ति और वितरण नियंत्रित करने का विशेष अधिकार प्राप्त होगा।
इस इमरजेंसी के बाद सरकार ने विशेष कमेटी गठित की है, जो ईंधन, अनाज, दवा और अन्य आवश्यक वस्तुओं की आपूर्ति और वितरण पर निगरानी रखेगी। एनर्जी इमरजेंसी के कारण ट्रांसपोर्ट वर्कर्स और टैक्सी यूनियनों की हड़ताल पर कानूनी कार्रवाई की संभावना भी बढ़ गई है। जेट फ्यूल की कमी के कारण एयरलाइंस को उड़ानों में कटौती करनी पड़ी और हवाई अड्डों पर भीड़ बढ़ गई है।
विद्युत आपूर्ति पर भी गंभीर खतरा मंडरा रहा है। फिलीपींस सरकार ने कोयले पर आधारित पावर प्लांटों की निर्भरता बढ़ाने का फैसला किया है। युद्ध ने प्राकृतिक गैस की आपूर्ति को प्रभावित किया है, जिससे बिजली की कीमतों और सप्लाई में अनिश्चितता बढ़ी है। यह कदम प्रदूषण नियंत्रण प्रयासों को अस्थायी रूप से प्रभावित करेगा।
इतिहास में एनर्जी इमरजेंसी की घटनाओं को देखें तो पहली बार यह 1973-74 में अरब-इज़रायल युद्ध के दौरान हुई थी। 1991 में कुवैत पर इराक के हमले और 2022 में रूस-यूक्रेन युद्ध के दौरान भी तेल संकट के कारण आपातकाल लागू हुआ। फिलीपींस अब पहला देश बन गया है जो युद्ध में शामिल न होने के बावजूद तेल संकट से निपटने के लिए आपातकाल लागू कर रहा है।
आर्थिक प्रभाव व्यापक हैं। म्यांमार, कंबोडिया, वियतनाम, श्रीलंका, पाकिस्तान और बांग्लादेश जैसी अर्थव्यवस्थाएं तेल के आयात पर अत्यधिक निर्भर हैं। कंबोडिया में तेल आयात लागत 68% बढ़ गई है और GDP 3% गिरने की संभावना है। वियतनाम में तेल की कीमतें 50% बढ़ी हैं और GDP 1% तक घट सकती है। बांग्लादेश में तेल आयात खर्च लगभग 40% बढ़ा है और GDP 3% घटने की आशंका है।
यूरोप और अमेरिका पर भी युद्ध का व्यापक असर पड़ा है। यूरोपीय देशों में पेट्रोल-डीजल के दाम 34% तक बढ़ गए हैं। प्राकृतिक गैस की कमी और बिजली उत्पादन पर दबाव बढ़ गया है। ब्रिटेन में महंगाई 5% से अधिक होने की संभावना है। अमेरिका में औसत परिवार पर 740 डॉलर का अतिरिक्त बोझ पड़ा है। एशिया और यूरोप की तुलना में अमेरिका घरेलू उत्पादन के चलते बेहतर स्थिति में है, लेकिन महंगाई का दबाव आम नागरिकों को प्रभावित कर रहा है।
इस प्रकार, युद्ध का प्रभाव केवल युद्ध क्षेत्र तक सीमित नहीं रहा। मिडिल ईस्ट में संघर्ष ने पूरी दुनिया में ऊर्जा संकट और आर्थिक अस्थिरता पैदा की है। फिलीपींस का कदम वैश्विक संकट का संकेत है, और आने वाले महीनों में अन्य देशों में भी इसी तरह की एनर्जी इमरजेंसी के हालात बन सकते हैं।