होर्मुज संकट पर ट्रंप का हमला: नाटो सहयोगियों को बताया कायर, वैश्विक तनाव बढ़ा
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Donald Trump NATO Criticism
ट्रंप ने नाटो सहयोगियों को कायर बताया.
होर्मुज स्ट्रेट संकट से तेल आपूर्ति प्रभावित.
होर्मुज स्ट्रेट संकट से तेल आपूर्ति प्रभावित.
America / अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक बार फिर अपने तीखे बयानों से अंतरराष्ट्रीय राजनीति में हलचल मचा दी है। इस बार उन्होंने नाटो सहयोगी देशों को सीधे तौर पर “कायर” बताते हुए आरोप लगाया है कि वे ईरान के खिलाफ होर्मुज जलडमरूमध्य को सुरक्षित करने में अमेरिका का साथ नहीं दे रहे हैं। ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर लिखा कि अमेरिका के बिना नाटो केवल “कागजी शेर” है और सहयोगी देश जिम्मेदारी उठाने से बच रहे हैं।
यह विवाद उस समय उभरा है जब ईरान और अमेरिका-इजरायल के बीच तनाव चरम पर पहुंच चुका है। हाल ही में अमेरिका और इजरायल ने ईरान पर बड़े पैमाने पर सैन्य कार्रवाई की, जिसके जवाब में ईरान ने होर्मुज स्ट्रेट को ब्लॉक कर दिया। यह जलडमरूमध्य वैश्विक तेल आपूर्ति के लिए बेहद महत्वपूर्ण है, जहां से दुनिया का करीब 20 प्रतिशत कच्चा तेल और एलपीजी गुजरता है। इसके बंद होने से अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की कीमतें तेजी से बढ़ने लगी हैं और कई देशों की अर्थव्यवस्था पर दबाव बढ़ गया है।
ट्रंप का आरोप है कि जब अमेरिका और इजरायल ने जोखिम उठाकर ईरान के खिलाफ कार्रवाई की और अब स्थिति को नियंत्रित करना अपेक्षाकृत आसान हो गया है, तब भी नाटो देश मदद के लिए आगे नहीं आ रहे। उन्होंने खासतौर पर उन देशों को निशाने पर लिया जो तेल की बढ़ती कीमतों की शिकायत कर रहे हैं, लेकिन सुरक्षा मिशन में शामिल होने से बच रहे हैं।
हालांकि, ब्रिटेन, फ्रांस, जर्मनी और जापान जैसे देशों ने स्पष्ट किया है कि वे स्थिति को संभालने के लिए कूटनीतिक और सीमित सहयोग देने को तैयार हैं, लेकिन किसी औपचारिक सैन्य मिशन में सीधे शामिल होने के पक्ष में नहीं हैं। इन देशों का कहना है कि यह संघर्ष बिना व्यापक अंतरराष्ट्रीय परामर्श के शुरू किया गया था, इसलिए वे इसमें सीधी भागीदारी से बच रहे हैं।
यूरोपीय देशों का यह भी मानना है कि ट्रंप के आक्रामक बयान और एकतरफा नीतियां सहयोग की संभावनाओं को कमजोर कर रही हैं। जर्मनी और इटली जैसे देशों ने तो साफ कर दिया है कि जब तक मध्य-पूर्व में युद्धविराम नहीं होता, वे किसी भी सैन्य कार्रवाई का हिस्सा नहीं बनेंगे।
ट्रंप की यह टिप्पणी न केवल नाटो की एकता पर सवाल खड़े करती है, बल्कि वैश्विक कूटनीति में बढ़ती खाई को भी उजागर करती है। अगर यह मतभेद बढ़ते हैं, तो इसका असर न केवल सैन्य गठबंधनों पर बल्कि वैश्विक अर्थव्यवस्था और ऊर्जा सुरक्षा पर भी पड़ सकता है।