हाईकमान से नाराज़गी या व्यस्तता का बहाना, सोनिया गांधी के घर हुई अहम बैठक में फिर नहीं पहुंचे शशि थरूर
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Congress Internal Politics
लगातार दो अहम बैठकों से शशि थरूर की गैरमौजूदगी.
कांग्रेस नेतृत्व और थरूर के रिश्तों पर अटकलें.
पार्टी ने अब तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं दी.
Delhi / कांग्रेस की आंतरिक राजनीति में उस समय हलचल तेज़ हो गई, जब वरिष्ठ नेता और तिरुवनंतपुरम से सांसद शशि थरूर एक बार फिर पार्टी की अहम बैठक में शामिल नहीं हुए। यह बैठक कांग्रेस संसदीय रणनीति और संगठनात्मक मुद्दों को लेकर सोनिया गांधी के आवास पर बुलाई गई थी, जिसमें पार्टी अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे, राहुल गांधी समेत कई वरिष्ठ नेता मौजूद रहे। बीते चार दिनों में यह दूसरा मौका है, जब शशि थरूर किसी महत्वपूर्ण कांग्रेस बैठक से नदारद रहे हैं। इससे पहले वे केरल विधानसभा चुनाव को लेकर पार्टी की रणनीति तय करने के लिए बुलाई गई बैठक में भी शामिल नहीं हुए थे। लगातार दो बैठकों से दूरी ने राजनीतिक गलियारों में यह सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या यह महज़ संयोग है या फिर कांग्रेस हाईकमान और शशि थरूर के बीच बढ़ती दूरी का संकेत।
शशि थरूर की गैरमौजूदगी को लेकर पार्टी के भीतर अलग-अलग तरह की चर्चाएं चल रही हैं। एक धड़ा इसे उनकी पूर्व निर्धारित व्यस्तताओं और अंतरराष्ट्रीय कार्यक्रमों से जोड़कर देख रहा है, जबकि दूसरा धड़ा इसे पार्टी नेतृत्व से नाराज़गी के तौर पर देख रहा है। खुद शशि थरूर की ओर से यह कहा गया है कि उन्हें बैठक की सूचना काफी देर से मिली थी और उस समय वे पहले से तय विदेश यात्रा में थे। थरूर का यह भी कहना है कि उनकी अनुपस्थिति को राजनीतिक रंग देना ठीक नहीं है और वे पार्टी के प्रति पूरी तरह प्रतिबद्ध हैं। हालांकि, कांग्रेस के कुछ नेताओं का मानना है कि बार-बार अहम बैठकों से दूरी बनना स्वाभाविक सवाल खड़े करता है, खासकर ऐसे समय में जब पार्टी केरल जैसे महत्वपूर्ण राज्य में चुनावी तैयारियों में जुटी हुई है।
पिछले कुछ समय से शशि थरूर का राजनीतिक रुख भी चर्चा में रहा है। कभी सरकार की कुछ नीतियों की तारीफ, तो कभी पार्टी लाइन से हटकर दिए गए बयान उन्हें अलग पहचान देते हैं। यही वजह है कि उनकी बैठकों से गैरहाज़िरी को केवल व्यक्तिगत व्यस्तता मानने के बजाय एक राजनीतिक संदेश के तौर पर भी देखा जा रहा है। हालांकि कांग्रेस नेतृत्व ने अभी तक इस मुद्दे पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया या सख्त रुख नहीं अपनाया है। जानकारों का मानना है कि पार्टी फिलहाल किसी भी तरह के आंतरिक विवाद को सार्वजनिक होने से रोकना चाहती है, खासकर तब जब आगामी चुनावों और संसद सत्र को लेकर रणनीति बेहद अहम मानी जा रही है। शशि थरूर की यह दूरी आगे चलकर पार्टी के भीतर किस दिशा में जाती है, इस पर सबकी निगाहें टिकी हुई हैं।