केरल में सीईओ ट्रांसफर विवाद: कांग्रेस–भाजपा में तीखी बहस, राहुल गांधी पर आरोप

Sun 24-May-2026,02:14 PM IST +05:30

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केरल में सीईओ ट्रांसफर विवाद: कांग्रेस–भाजपा में तीखी बहस, राहुल गांधी पर आरोप Kerala Politics
  • केरल में सीईओ को मुख्यमंत्री सचिव बनाए जाने पर विवाद. 

  • भाजपा ने कांग्रेस और राहुल गांधी पर दोहरे रवैये का आरोप लगाया. 

  • सरकार ने नियुक्ति को सामान्य प्रशासनिक तबादला बताया. 

Kerala / Thiruvananthapuram :

Kerala / केरल की राजनीति एक बार फिर तीखी बहस के केंद्र में आ गई है। भाजपा नेता के. सुरेंद्रन ने कांग्रेस पर हमला बोलते हुए कहा कि “राहुल गांधी और कांग्रेस दोनों ही पाखंडी हैं और उनका दोहरा चरित्र अब सामने आ चुका है।” यह बयान उस विवाद के बाद आया है जिसमें केरल सरकार ने मुख्य निर्वाचन अधिकारी डॉ. रतन यू. केलकर को मुख्यमंत्री के सचिव पद पर नियुक्त किया है।

दरअसल, सरकारी आदेश के अनुसार 2003 बैच के आईएएस अधिकारी रतन यू. केलकर, जो हाल ही तक केरल के मुख्य निर्वाचन अधिकारी और चुनाव विभाग के सचिव थे, उन्हें अब मुख्यमंत्री वी.डी. सतीशन का सचिव नियुक्त किया गया है। उन्होंने हाल ही में संपन्न विधानसभा चुनावों की पूरी प्रक्रिया की निगरानी भी की थी।

इस फैसले को लेकर विपक्षी दलों ने गंभीर सवाल उठाए हैं। भाजपा का कहना है कि जब ऐसी ही नियुक्ति अन्य राज्यों में होती है, तब कांग्रेस और राहुल गांधी उस पर तीखी प्रतिक्रिया देते हैं, लेकिन जब यही स्थिति केरल में बनती है तो वे चुप रहते हैं। यही कारण है कि सुरेंद्रन ने कांग्रेस पर दोहरे रवैये का आरोप लगाया।

वहीं, सीपीआई (एम) के नेताओं ने भी इस निर्णय पर आपत्ति जताई है और कांग्रेस से स्पष्टीकरण मांगा है। उनका कहना है कि चुनावी प्रक्रिया की निष्पक्षता बनाए रखने के लिए ऐसे ट्रांसफर पर पारदर्शिता जरूरी है।

हालांकि, राज्य सरकार ने इस पूरे मामले को एक सामान्य प्रशासनिक तबादला बताया है। सरकार का कहना है कि अनुभवी अधिकारी को महत्वपूर्ण जिम्मेदारी देना प्रशासनिक प्रक्रिया का हिस्सा है और इसमें कोई राजनीतिक मंशा नहीं है।

केलकर के पास स्वास्थ्य, जिला प्रशासन और राष्ट्रीय मिशनों में काम करने का लंबा अनुभव रहा है। इसी वजह से उन्हें यह जिम्मेदारी दी गई है। लेकिन विपक्ष का आरोप है कि चुनाव प्रक्रिया से जुड़े अधिकारी का इस तरह से तबादला सवाल खड़े करता है।

फिलहाल यह मामला केरल की राजनीति में गर्म बहस का मुद्दा बना हुआ है और सत्ता तथा विपक्ष दोनों अपने-अपने तर्कों पर अड़े हुए हैं।