धान खरीदी अवधि बढ़ी

Sat 07-Feb-2026,01:12 PM IST +05:30

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धान खरीदी अवधि बढ़ी Bastar-Paddy-Procurement-Extension-Farmers-Relief
  • धान खरीदी की अवधि बढ़ने से बस्तर संभाग के हजारों किसानों को अपनी उपज बेचने का अवसर मिला और असंतोष की स्थिति कम हुई।

  • कांकेर जिले ने सबसे अधिक धान विक्रय कर अतिरिक्त खरीदी में बस्तर संभाग में शीर्ष स्थान हासिल किया।

Chhattisgarh / Bastar :

Bastar/ धान खरीदी की अंतिम तिथि समाप्त होने के बाद प्रदेश के कई हिस्सों से शिकायतें सामने आ रही थीं कि किसान तकनीकी कारणों, भीड़ और सीमित समय के चलते अपनी उपज नहीं बेच पा रहे हैं। खासकर बस्तर संभाग में स्थिति गंभीर थी, जहां बड़ी संख्या में किसान खरीदी केंद्रों तक पहुंचने से वंचित रह गए थे। इससे किसानों में असंतोष और चिंता का माहौल बन गया था।

इन परिस्थितियों को देखते हुए राज्य सरकार ने मानवीय और किसान हितैषी दृष्टिकोण अपनाते हुए धान खरीदी की अवधि को दो अतिरिक्त दिनों के लिए बढ़ाने का निर्णय लिया। सरकार के इस फैसले का तुरंत सकारात्मक असर देखने को मिला और खरीदी केंद्रों पर गतिविधियां तेज हो गईं।

अतिरिक्त दो दिनों के भीतर बस्तर संभाग के सातों जिलों में सैकड़ों किसान खरीदी केंद्रों तक पहुंचे और अपनी उपज का सफलतापूर्वक विक्रय किया। इस दौरान कुल 121 राइस मिलों के माध्यम से धान का अतिरिक्त उठाव संभव हो सका, जिससे खरीदी प्रक्रिया सुचारू बनी रही।

उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, अतिरिक्त अवधि में बस्तर संभाग में कुल 83,255.23 मीट्रिक टन धान की अतिरिक्त खरीदी दर्ज की गई। इसमें कांकेर जिले का योगदान सबसे अधिक रहा, जहां किसानों ने लगभग 49,971.20 मीट्रिक टन धान बेचा।

जिलेवार आंकड़ों की बात करें तो बस्तर जिले में 79 खरीदी केंद्रों से 6,486 मीट्रिक टन, बीजापुर में 30 केंद्रों से 3,069.80 मीट्रिक टन, दंतेवाड़ा में 15 केंद्रों से 5,663 मीट्रिक टन, कोंडागांव में 67 केंद्रों से 5,236.24 मीट्रिक टन, नारायणपुर में 17 केंद्रों से 5,815.29 मीट्रिक टन और सुकमा में 25 केंद्रों से 7,013.70 मीट्रिक टन धान की खरीदी हुई।

कुल मिलाकर बस्तर संभाग के 382 खरीदी केंद्रों के माध्यम से यह अतिरिक्त उठाव किया गया। यह आंकड़े साफ तौर पर दर्शाते हैं कि समय-सीमा में थोड़ी सी राहत भी किसानों के लिए कितनी निर्णायक साबित हो सकती है। सरकार के इस फैसले से न केवल किसानों को राहत मिली, बल्कि प्रशासनिक व्यवस्था की संवेदनशीलता भी सामने आई।