श्रीलंका पहुंचे पवित्र देवनीमोरी अवशेष
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प्रधानमंत्री मोदी की 2025 यात्रा की घोषणा के अनुरूप कोलंबो में पहली बार भारत के बाहर देवनीमोरी अवशेषों की सार्वजनिक प्रदर्शनी।
श्रीलंका के स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर आयोजित प्रदर्शनी, शांति, करुणा और अहिंसा के बुद्ध संदेश को वैश्विक मंच।
Colombo/ भगवान बुद्ध के पवित्र देवनीमोरी अवशेषों का श्रीलंका में आगमन भारत और श्रीलंका के बीच सदियों पुराने आध्यात्मिक और सभ्यतागत संबंधों का एक ऐतिहासिक प्रतीक बन गया है। इन पवित्र अवशेषों की कोलंबो के गंगारामया मंदिर में प्रदर्शनी दोनों देशों की साझा बौद्ध विरासत को नई ऊर्जा प्रदान करती है। यह आयोजन न केवल धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है, बल्कि सांस्कृतिक कूटनीति का भी एक सशक्त उदाहरण माना जा रहा है।
पवित्र देवनीमोरी अवशेष भारतीय वायु सेना के एक विशेष विमान के माध्यम से श्रीलंका पहुंचे। भारत और श्रीलंका के बीच तय प्रोटोकॉल के अनुसार इन्हें पूर्ण राजकीय सम्मान दिया गया। अवशेषों के साथ गुजरात के राज्यपाल श्री आचार्य देवव्रत और उपमुख्यमंत्री श्री हर्ष संघवी के नेतृत्व में एक उच्च स्तरीय भारतीय प्रतिनिधिमंडल भी श्रीलंका पहुंचा, जिसमें वरिष्ठ बौद्ध भिक्षु, सरकारी अधिकारी और अन्य विशिष्ट अतिथि शामिल थे।
यह प्रदर्शनी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अप्रैल 2025 में श्रीलंका की राजकीय यात्रा के दौरान की गई घोषणा के अनुरूप आयोजित की गई है। उस यात्रा के दौरान प्रधानमंत्री ने दोनों देशों के बीच आध्यात्मिक और सांस्कृतिक रिश्तों को और गहरा करने की प्रतिबद्धता व्यक्त की थी। साथ ही, उन्होंने बौद्ध संबंधों को बढ़ावा देने के लिए पहले से घोषित 15 मिलियन अमेरिकी डॉलर के अनुदान के अतिरिक्त अनुराधापुरा पवित्र नगर परिसर परियोजना के विकास हेतु अतिरिक्त सहायता की भी घोषणा की थी।
पवित्र देवनीमोरी अवशेषों की प्रदर्शनी का औपचारिक उद्घाटन 4 फरवरी 2026 को कोलंबो के गंगारामया मंदिर में श्रीलंका के राष्ट्रपति श्री अनुरा कुमार दिसानायके ने गुजरात के राज्यपाल और उपमुख्यमंत्री के साथ मिलकर किया। इस अवसर पर गंगारामया मंदिर के मुख्य पुजारी डॉ. किरिंदे असाजी थेरो भी उपस्थित रहे। इसके अलावा श्रीलंका सरकार के कई वरिष्ठ मंत्री और गणमान्य व्यक्ति समारोह में शामिल हुए।
प्रदर्शनी के अंतर्गत गंगारामया मंदिर परिसर में “पवित्र पिपरावा का अनावरण” और “समकालीन भारत के पवित्र अवशेष और सांस्कृतिक जुड़ाव” शीर्षक से दो विशेष प्रदर्शनियों का भी शुभारंभ किया गया। पारंपरिक धार्मिक रीति-रिवाजों के साथ पवित्र अवशेषों का विधिवत स्वागत कर उन्हें मंदिर में स्थापित किया गया।
यह प्रदर्शनी 5 फरवरी 2026 से आम जनता के लिए खोल दी गई है, जिससे श्रीलंका सहित दुनिया भर के श्रद्धालु इन अवशेषों के दर्शन कर सकेंगे। उल्लेखनीय है कि यह आयोजन श्रीलंका के 78वें स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर हुआ, जिससे इसका प्रतीकात्मक महत्व और बढ़ गया। यह भारत के बाहर देवनीमोरी अवशेषों की पहली सार्वजनिक प्रदर्शनी है। इससे पहले भारत ने 2012 में कपिलवस्तु और 2018 में सारनाथ अवशेषों की श्रीलंका में प्रदर्शनी आयोजित की थी।
देवनीमोरी अवशेषों की यह प्रदर्शनी भगवान बुद्ध के करुणा, शांति और अहिंसा के संदेश को जीवंत करती है और भारत-श्रीलंका के बीच सांस्कृतिक, आध्यात्मिक और जन-संपर्क संबंधों को और सुदृढ़ बनाती है।