उपराष्ट्रपति बोले- लोकतंत्र को मजबूत बनाने के लिए जिम्मेदार और निष्पक्ष पत्रकारिता जरूरी
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AI in Journalism
उपराष्ट्रपति ने जिम्मेदार और निष्पक्ष पत्रकारिता पर दिया जोर।
IIMC विद्यार्थियों को विकसित भारत 2047 में योगदान का संदेश।
AI और डीपफेक के दौर में सत्य एवं विश्वसनीयता को बताया अहम।
Delhi / उपराष्ट्रपति श्री सी.पी. राधाकृष्णन ने आज उपराष्ट्रपति भवन में आयोजित एक विशेष कार्यक्रम में इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ मास कम्युनिकेशन (IIMC) के अंतिम वर्ष के स्नातकोत्तर विद्यार्थियों के लिए संसद टीवी द्वारा संचालित एक माह के इंटर्नशिप कार्यक्रम के समापन समारोह को संबोधित किया। इस अवसर पर उन्होंने मीडिया और पत्रकारिता के क्षेत्र में युवाओं की भूमिका को रेखांकित करते हुए उन्हें राष्ट्र निर्माण में सक्रिय योगदान देने का आह्वान किया।
उपराष्ट्रपति ने प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा कि इस वर्ष IIMC के दीक्षांत समारोह के दौरान उन्होंने संसद टीवी के माध्यम से छात्रों को व्यावहारिक प्रशिक्षण देने का सुझाव दिया था और यह देखकर संतोष होता है कि उस प्रस्ताव को शीघ्रता से लागू किया गया। उन्होंने संसद टीवी की टीम और उन पेशेवरों की सराहना की जिन्होंने विद्यार्थियों को प्रशिक्षण और मार्गदर्शन प्रदान किया।
अपने संबोधन में श्री राधाकृष्णन ने कहा कि भारत को ऐसे पत्रकारों और संचारकों की आवश्यकता है जो बौद्धिक रूप से ईमानदार, सामाजिक रूप से संवेदनशील, तकनीकी रूप से दक्ष और लोकतांत्रिक मूल्यों के प्रति प्रतिबद्ध हों। उन्होंने कहा कि मीडिया केवल समाचार प्रसारित करने का माध्यम नहीं है, बल्कि यह समाज की सोच और राष्ट्र के भविष्य को भी दिशा देता है।
उन्होंने विद्यार्थियों से विकसित भारत 2047 के लक्ष्य में योगदान देने का आग्रह किया और कहा कि युवा पत्रकारों को देश की प्रगति, उपलब्धियों और चुनौतियों को निष्पक्षता तथा ईमानदारी के साथ दुनिया के सामने प्रस्तुत करना चाहिए। उनके अनुसार, भारत आज जनसांख्यिकीय शक्ति, तकनीकी नवाचार और लोकतांत्रिक मजबूती के कारण वैश्विक स्तर पर नई पहचान बना रहा है।
उपराष्ट्रपति ने वर्तमान मीडिया परिदृश्य में बढ़ती सनसनीखेजता पर भी चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि लोकप्रियता हासिल करने की होड़ में पत्रकारिता की विश्वसनीयता प्रभावित नहीं होनी चाहिए। किसी भी मीडिया संस्थान या पत्रकार की सबसे बड़ी ताकत उसकी तथ्यात्मक सटीकता, निष्पक्षता और जनहित के प्रति प्रतिबद्धता होती है।
कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) के बढ़ते प्रभाव का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि नई तकनीकें पत्रकारिता को अधिक प्रभावी बना सकती हैं, लेकिन अंतिम संपादकीय निर्णय हमेशा मानवीय विवेक और नैतिक मूल्यों के आधार पर ही लिए जाने चाहिए। उन्होंने गलत सूचना, फर्जी खबरों और डीपफेक जैसी चुनौतियों के प्रति भी सतर्क रहने की आवश्यकता बताई।
समावेशी पत्रकारिता पर बल देते हुए उपराष्ट्रपति ने कहा कि केवल महानगरों तक सीमित रिपोर्टिंग पर्याप्त नहीं है। भारत की वास्तविक तस्वीर गांवों, छोटे शहरों और दूरदराज के क्षेत्रों में बसती है। इसलिए पत्रकारों को देश के हर वर्ग की आकांक्षाओं, संघर्षों और उपलब्धियों को सामने लाने का प्रयास करना चाहिए।
इस अवसर पर राज्यसभा के उपसभापति श्री हरिवंश, राज्यसभा के सचिव-जनरल श्री पी.सी. मोदी, संसद टीवी के मुख्य कार्यकारी अधिकारी श्री अमित खरे, सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय के सचिव श्री चंचल कुमार, IIMC की कुलपति डॉ. प्रज्ञा पालीवाल गोर सहित कई गणमान्य अतिथि उपस्थित रहे। कार्यक्रम ने युवा पत्रकारों को जिम्मेदार और राष्ट्रहितकारी पत्रकारिता की दिशा में प्रेरित करने का महत्वपूर्ण संदेश दिया।