PoK में पाकिस्तान सेना का Mi-17 हेलिकॉप्टर क्रैश, टेक-ऑफ के दौरान हादसे में सभी सैन्य कर्मियों की मौत
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MI 17 Helicopter Crash
मुजफ्फरबाद के पास पाकिस्तान सेना का Mi-17 हेलिकॉप्टर क्रैश।
हादसे में हेलिकॉप्टर में सवार सभी सैन्य कर्मियों की मौत।
दुर्घटना के कारणों की जांच के लिए बोर्ड ऑफ इन्क्वायरी गठित।
Delhi / पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (PoK) में बुधवार को एक बड़ा सैन्य हादसा सामने आया, जब पाकिस्तान आर्मी एविएशन का Mi-17 हेलिकॉप्टर मुजफ्फरबाद के पास टेक-ऑफ के दौरान दुर्घटनाग्रस्त हो गया। इंटर-सर्विसेज पब्लिक रिलेशंस (ISPR) के हवाले से स्थानीय मीडिया रिपोर्टों में बताया गया है कि हेलिकॉप्टर में सवार सभी सैन्य कर्मियों की इस हादसे में मौत हो गई। हालांकि सेना ने अभी तक मृतकों की आधिकारिक संख्या जारी नहीं की है।
प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, हेलिकॉप्टर ने जैसे ही उड़ान भरी, उसमें तकनीकी या यांत्रिक खराबी आ गई। कुछ ही क्षणों में पायलट नियंत्रण खो बैठा और हेलिकॉप्टर जमीन पर गिरकर दुर्घटनाग्रस्त हो गया। हादसे की सूचना मिलते ही सेना की बचाव एवं राहत टीमें मौके पर पहुंचीं और पूरे क्षेत्र को घेरकर राहत कार्य शुरू किया गया। सेना ने दुर्घटना के वास्तविक कारणों का पता लगाने के लिए ‘बोर्ड ऑफ इन्क्वायरी’ गठित कर विस्तृत जांच के आदेश दिए हैं।
यह पहली बार नहीं है जब पाकिस्तान में Mi-17 हेलिकॉप्टर दुर्घटना का शिकार हुआ हो। पिछले कुछ वर्षों में इस मॉडल से जुड़े कई हादसे सामने आ चुके हैं, जिससे इसके रखरखाव और परिचालन व्यवस्था पर भी सवाल उठते रहे हैं।
Mi-17 दुनिया के सबसे लोकप्रिय सैन्य परिवहन हेलिकॉप्टरों में से एक माना जाता है। इसे रूस के मिल मॉस्को हेलिकॉप्टर प्लांट ने विकसित किया था। यह पुराने Mi-8 हेलिकॉप्टर का उन्नत संस्करण है और कई देशों की सेनाओं द्वारा उपयोग किया जाता है। भारत और पाकिस्तान दोनों की सेनाओं में यह लंबे समय से महत्वपूर्ण भूमिका निभाता रहा है।
इस हेलिकॉप्टर की सबसे बड़ी विशेषता इसकी भारी भार वहन क्षमता है। यह पूरी तरह से सुसज्जित लगभग 30 सैनिकों को एक साथ ले जा सकता है। आपातकालीन परिस्थितियों में इसमें 12 स्ट्रेचर भी लगाए जा सकते हैं। इसके अलावा, हेलिकॉप्टर अपने केबिन के भीतर करीब 4 टन सामान और बाहरी स्लिंग के माध्यम से लगभग 3 टन अतिरिक्त भार उठा सकता है।
Mi-17 में दो शक्तिशाली क्लिमोव TV3-117 टर्बोशाफ्ट इंजन लगाए जाते हैं, जो इसे पहाड़ी और दुर्गम क्षेत्रों में भी प्रभावी ढंग से उड़ान भरने की क्षमता प्रदान करते हैं। इसकी अधिकतम गति लगभग 250 किलोमीटर प्रति घंटा तक पहुंच सकती है।
विशेषज्ञों का मानना है कि Mi-17 अपनी बहुउपयोगी क्षमताओं के कारण आज भी कई देशों की सैन्य जरूरतों का अहम हिस्सा है, लेकिन पुराने हो रहे बेड़े और रखरखाव संबंधी चुनौतियों के चलते दुर्घटनाओं का जोखिम बढ़ता जा रहा है। मुजफ्फरबाद में हुआ यह ताजा हादसा भी इसी चिंता को और गंभीर बना देता है।