राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने अयोध्या में रामलला के किए दर्शन, राम राज्य के आदर्शों पर दिया जोर

Thu 19-Mar-2026,11:08 PM IST +05:30

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राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने अयोध्या में रामलला के किए दर्शन, राम राज्य के आदर्शों पर दिया जोर Droupadi Murmu Ayodhya Visit
  • राष्ट्रपति ने अयोध्या में रामलला के किए दर्शन और पूजा.

  • राम राज्य के आदर्शों और समावेशी समाज पर दिया जोर.

  • 2047 तक विकसित भारत के लक्ष्य पर रखी बात.

Uttar Pradesh / Ayodhya :

Ayodhya / राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मु ने 19 मार्च 2026 को उत्तर प्रदेश के अयोध्या में स्थित श्री राम जन्मभूमि मंदिर पहुंचकर भगवान रामलला के दर्शन किए। यह अवसर न केवल धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण था, बल्कि सांस्कृतिक और राष्ट्रीय भावनाओं से भी जुड़ा हुआ रहा। राष्ट्रपति ने मंदिर परिसर में विभिन्न स्थानों पर पूजा-अर्चना की, आरती में भाग लिया और श्री राम यंत्र की स्थापना एवं पूजन भी किया।

अपने संबोधन में राष्ट्रपति ने अयोध्या की पवित्रता का उल्लेख करते हुए कहा कि इस नगरी की धूलि का स्पर्श करना उनके लिए अत्यंत सौभाग्य की बात है। उन्होंने इसे वह पवित्र भूमि बताया, जहां प्रभु श्री राम का जन्म हुआ और जिसने भारत की आस्था और संस्कृति को सदियों से दिशा दी है। उन्होंने यह भी कहा कि चैत्र शुक्ल संवत्सर 2083 के आरंभ और नवरात्रि के पहले दिन यहां उपस्थित होना उनके लिए एक विशेष आध्यात्मिक अनुभव है।

राष्ट्रपति मुर्मु ने श्री राम जन्मभूमि मंदिर से जुड़े ऐतिहासिक क्षणों का भी उल्लेख किया। उन्होंने भूमि पूजन, रामलला के दिव्य विग्रह की प्राण प्रतिष्ठा, राम दरबार के दर्शन और मंदिर के शिखर पर धर्म ध्वजारोहण जैसे अवसरों को भारत के इतिहास और संस्कृति की स्वर्णिम तिथियां बताया।

उन्होंने अपने संबोधन में ‘राम राज्य’ के आदर्श को वर्तमान समय के लिए भी प्रासंगिक बताया। गोस्वामी तुलसीदास के विचारों का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि राम राज्य में कोई दुखी, निर्धन या असहाय नहीं होता, बल्कि समाज में समरसता और संतुलन होता है। राष्ट्रपति ने कहा कि भारत आज एक समावेशी समाज और विकसित राष्ट्र बनने की दिशा में आगे बढ़ रहा है और यह लक्ष्य 2047 तक, या उससे पहले भी प्राप्त किया जा सकता है।

उन्होंने इस बात पर भी जोर दिया कि आर्थिक समृद्धि और सामाजिक न्याय, दोनों ही राष्ट्र निर्माण के महत्वपूर्ण स्तंभ हैं। प्रभु श्री राम के जीवन से हमें नैतिकता, कर्तव्य और समावेशी सोच की प्रेरणा मिलती है, जिसे अपनाकर एक सशक्त और संवेदनशील समाज का निर्माण किया जा सकता है।

राष्ट्रपति ने अंत में देशवासियों से एकता और भाईचारे की भावना के साथ आगे बढ़ने की अपील की। उन्होंने कहा कि प्रभु श्री राम के प्रति आस्था हमें जोड़ती है और इसी भावना के साथ हमें राष्ट्र निर्माण में योगदान देना चाहिए। उनके इस संदेश ने न केवल आध्यात्मिक ऊर्जा प्रदान की, बल्कि एक मजबूत और समावेशी भारत के निर्माण की दिशा में प्रेरणा भी दी।