सेक्स बनाम सेक्स ट्रेंड, बदलते समाज में रिश्ते, पसंद और यौन व्यवहार पर बढ़ती बहस
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Sex Trends India
बदलते समाज में यौन व्यवहार को लेकर नए ट्रेंड उभर रहे.
सहमति, सुरक्षा और मानसिक स्वास्थ्य सबसे अहम.
वैज्ञानिक और सामाजिक नजरिए से चर्चा जरूरी.
Nagpur / तेजी से बदलते सामाजिक ढांचे और डिजिटल दौर में यौन व्यवहार को लेकर सोच भी लगातार बदल रही है। हाल ही में सामने आई एक मेडिकल सर्वे रिपोर्ट के हवाले से यह चर्चा तेज हुई है कि आज के समय में यौन संतुष्टि और संबंधों को लेकर चार तरह के प्रमुख ट्रेंड देखने को मिल रहे हैं। ये ट्रेंड केवल शारीरिक जरूरतों तक सीमित नहीं हैं, बल्कि मानसिक संतुलन, सहमति, सामाजिक स्वीकार्यता और रिश्तों की परिभाषा से भी जुड़े हुए हैं। विशेषज्ञ मानते हैं कि इन प्रवृत्तियों को समझने के लिए नैतिक टिप्पणी से ज्यादा जरूरी है वैज्ञानिक और सामाजिक दृष्टि से इनका विश्लेषण।
रिपोर्ट के अनुसार पहला ट्रेंड मैस्टरबेशन यानी हस्तमैथुन से जुड़ा है, जिसे यौन स्वास्थ्य विशेषज्ञ एक व्यक्तिगत और निजी विकल्प के रूप में देखते हैं। डॉक्टरों का मानना है कि जब किसी व्यक्ति को पार्टनर उपलब्ध न हो या वह मानसिक रूप से तनाव में हो, तो संतुलन और आत्मनियंत्रण के साथ यह एक विकल्प हो सकता है। हालांकि, विशेषज्ञ यह भी कहते हैं कि किसी भी आदत में अति नुकसानदेह हो सकती है। पुरुष और स्त्री दोनों के लिए यह जरूरी है कि वे इसे जीवन का केंद्र न बनाएं, बल्कि इसे मानसिक संतुलन और स्वास्थ्य के दायरे में समझें। सेक्सोलॉजिस्ट मानते हैं कि यौन असंतोष की स्थिति में खुलकर संवाद और सही जानकारी ज्यादा अहम है, बजाय इसके कि व्यक्ति अपराधबोध या तनाव में चला जाए।
दूसरा ट्रेंड एनल सेक्स से जुड़ा बताया गया है, जिसे लेकर समाज में अब भी मिश्रित राय देखने को मिलती है। मेडिकल विशेषज्ञ साफ तौर पर कहते हैं कि किसी भी तरह का यौन व्यवहार केवल और केवल आपसी सहमति, सुरक्षा और स्वास्थ्य संबंधी सावधानियों के साथ ही होना चाहिए। बिना जानकारी और सावधानी के किए गए प्रयोग संक्रमण, दर्द और अन्य स्वास्थ्य समस्याओं का कारण बन सकते हैं। इसलिए इस तरह के ट्रेंड पर चर्चा करते समय रोमांच या दबाव की बजाय स्वास्थ्य और सुरक्षा को प्राथमिकता देना जरूरी है। डॉक्टरों का कहना है कि किसी भी साथी पर किसी विशेष यौन व्यवहार के लिए दबाव डालना मानसिक और शारीरिक दोनों रूप से गलत है।
तीसरा ट्रेंड लिव इन रिलेशनशिप को लेकर सामने आया है, जिसे आज की युवा पीढ़ी रिश्तों को समझने और परखने का एक तरीका मान रही है। रिपोर्ट के मुताबिक कई लोग इसे शादी से पहले एक-दूसरे को जानने और आपसी अनुकूलता परखने का माध्यम मानते हैं। समाजशास्त्री कहते हैं कि यह बदलाव शहरी जीवनशैली, आर्थिक स्वतंत्रता और व्यक्तिगत पसंद से जुड़ा है। हालांकि, विशेषज्ञ यह भी जोड़ते हैं कि ऐसे रिश्तों में पारदर्शिता, जिम्मेदारी और भावनात्मक समझ बेहद जरूरी है, ताकि किसी भी पक्ष को मानसिक नुकसान न पहुंचे।
चौथा और सबसे विवादास्पद ट्रेंड उन संबंधों से जुड़ा है, जिन्हें निजी दायरे तक सीमित रखने की बात कही जाती है। इस पर मनोवैज्ञानिक और सामाजिक विशेषज्ञ चेतावनी देते हैं कि ऐसे मामलों में भावनात्मक उलझन, अपराधबोध और पारिवारिक तनाव का खतरा सबसे ज्यादा होता है। सहमति अपनी जगह जरूरी है, लेकिन रिश्तों की जटिलता और उसके दूरगामी प्रभावों को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। विशेषज्ञों के अनुसार किसी भी यौन या भावनात्मक संबंध में तात्कालिक संतुष्टि से ज्यादा जरूरी दीर्घकालिक मानसिक और सामाजिक संतुलन है।
कुल मिलाकर, मेडिकल और सामाजिक विशेषज्ञ इस बात पर एकमत हैं कि सेक्स ट्रेंड पर चर्चा करते समय सनसनी या प्रचार की बजाय समझदारी, वैज्ञानिक जानकारी और आपसी सम्मान को आधार बनाना चाहिए। बदलते समय के साथ पसंद और व्यवहार बदल सकते हैं, लेकिन सहमति, सुरक्षा और मानसिक स्वास्थ्य हर दौर में सबसे अहम रहेंगे।