ममता कुलकर्णी ने किन्नर अखाड़ा के महामंडलेश्वर पद से दिया इस्तीफा, बोलीं– सत्य को किसी पद की ज़रूरत नहीं
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Mamta Kulkarni
ममता कुलकर्णी ने महामंडलेश्वर पद से स्वेच्छा से इस्तीफा दिया.
पद और वस्त्र को आध्यात्मिकता से अलग बताया.
किन्नर अखाड़े से सम्मान मिलने पर आभार जताया.
Prayagraj / ममता कुलकर्णी ने किन्नर अखाड़ा के महामंडलेश्वर पद से इस्तीफा देकर अपने आध्यात्मिक सफर को एक नया मोड़ दे दिया है। महाकुंभ के दौरान किन्नर अखाड़े द्वारा उन्हें महामंडलेश्वर की उपाधि देकर “श्री यमाई ममता नंद गिरि” नाम दिया गया था, लेकिन अब उन्होंने स्पष्ट कर दिया है कि पद, वस्त्र या किसी पहचान से उनका आध्यात्मिक मार्ग निर्धारित नहीं होता। अपने इस्तीफे में ममता कुलकर्णी ने कहा कि वह पूरी तरह मानसिक रूप से स्वस्थ हैं और 27 जनवरी 2026 को स्वेच्छा से यह पद छोड़ रही हैं।
एबीपी न्यूज़ को दिए एक इंटरव्यू में उन्होंने पहले ही संकेत दे दिए थे कि भगवा वस्त्र पहनना किसी राजनीतिक दल या विचारधारा का एजेंट होना नहीं है। उन्होंने यह भी कहा था कि वह जल्द ही भगवा वस्त्र उतार देंगी। अपने लिखित बयान में ममता कुलकर्णी ने साफ किया कि डॉ. आचार्य लक्ष्मी नारायण त्रिपाठी से उन्हें कोई शिकायत नहीं है और उन्हें सम्मान देने के लिए वह आभार प्रकट करती हैं। उनका कहना था कि उनका आध्यात्मिक ज्ञान जे. कृष्णमूर्ति की तरह स्वतंत्र रूप से बहेगा, क्योंकि सत्य को किसी वस्त्र, पद या प्रतिमा की आवश्यकता नहीं होती।
उन्होंने अपने गुरु श्री चैतन्य गगनगिरि नाथ का उदाहरण देते हुए कहा कि उनके गुरु ने भी कभी किसी पद को स्वीकार नहीं किया। ममता कुलकर्णी ने बताया कि उन्होंने 25 वर्षों तक अंतर्मुखी जीवन जीते हुए साधना की है और आगे भी उसी तरह अपने अभ्यास को जारी रखेंगी। उनका मानना है कि आध्यात्मिकता किसी मंच, संगठन या उपाधि की मोहताज नहीं होती। जब भी आवश्यकता होगी, वह अपने ज्ञान को साझा करेंगी, लेकिन किसी पार्टी, समूह या विचारधारा से बंधकर नहीं।
इस पूरे घटनाक्रम के बीच यह भी चर्चा में रहा कि प्रयागराज माघ मेले में शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद को लेकर दिए गए बयानों के बाद किन्नर अखाड़े से उन्हें निष्कासित किया गया था। हालांकि ममता कुलकर्णी ने अपने इस्तीफे के जरिए यह संदेश देने की कोशिश की है कि उन्हें निकाला नहीं गया, बल्कि उन्होंने स्वयं पद त्यागने का निर्णय लिया। यही कारण है कि अपने पत्र में उन्होंने अपना नाम “ममता मुकुंद कुलकर्णी” लिखा और किन्नर अखाड़े से मिला नाम शामिल नहीं किया।
पिछले एक साल में ममता कुलकर्णी का किन्नर अखाड़े के साथ जुड़ाव कई बार विवादों और असहमति के कारण चर्चा में रहा। जनवरी में अखाड़े से जुड़ने के बाद उन्होंने अलग-अलग मौकों पर अपनी नाराजगी जाहिर की थी। अब पद से अलग होकर उन्होंने यह स्पष्ट कर दिया है कि उनका आस्तिक जीवन किसी उपाधि से परिभाषित नहीं होता। उनका कहना है कि वह पद के बिना भी अपने विश्वास और साधना के मार्ग पर पूरी निष्ठा से चलती रहेंगी।