तमिलनाडु में FPO को मजबूत बनाने के लिए उच्चस्तरीय समिति का गठन

Wed 28-Jan-2026,04:48 PM IST +05:30

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तमिलनाडु में FPO को मजबूत बनाने के लिए उच्चस्तरीय समिति का गठन FPO-Strengthening-Tamilnadu-Committee
  • शिवराज सिंह चौहान के नेतृत्व में एफपीओ को मजबूत, स्थायी और आत्मनिर्भर बनाकर तमिलनाडु में मूल्य संवर्धन एवं कृषि विकास को बढ़ावा मिलेगा।

  • समिति एफपीओ की संस्थागत दक्षता, तकनीकी सहायता, प्रशिक्षण और विपणन मॉडल में सुधार हेतु दो महीने के भीतर रिपोर्ट प्रस्तुत करेगी।

Tamil Nadu / Thirukattupalli :

Tamilnadu/ समीक्षा समिति में नाबार्ड, नाफेड, एसएफएसी-तमिलनाडु, आईसीएआर-राष्ट्रीय केला अनुसंधान केंद्र (एनआरसीबी), एफएपीओ प्रतिनिधि, गैर सरकारी संगठन और कृषि एवं किसान कल्याण विभाग के अधिकारी शामिल हैं। यह टीम जमीनी स्तर पर एफपीओ की गतिविधियों का विस्तृत मूल्यांकन करेगी। समिति एफपीओ के संस्थागत शासन, प्रबंधन पद्धतियों, व्यावसायिक परिचालन, स्थिरता, तकनीकी सहायता, सदस्य प्रशिक्षण, एकत्रीकरण और विपणन चुनौतियों पर विशेष ध्यान देगी।

साथ ही, समिति एफपीओ की दक्षता बढ़ाने के लिए बेहतर व्यापार और परिचालन मॉडल, उन्नत तकनीकी सलाहकार समर्थन, संस्थागत समन्वय और मजबूत बाजार संपर्क हेतु सिफारिश करेगी। इसके अलावा, समिति तमिलनाडु की प्रमुख फसलों जैसे केला, हल्दी, नारियल, टैपिओका और प्राकृतिक तथा जैविक कृषि प्रणालियों पर भी ध्यान केंद्रित करेगी।

सिफारिशों की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए समिति एफपीओ सदस्यों, किसानों, प्रसंस्करणकर्ताओं, बाजार चैनलों और अन्य हितधारकों से जमीनी परामर्श करेगी। इसके साथ ही केंद्र और राज्य सरकार के विभागों, आईसीएआर संस्थानों और निजी क्षेत्र एजेंसियों से जानकारी एकत्रित की जाएगी। समिति अपनी अंतिम रिपोर्ट दो महीने के भीतर कृषि एवं किसान कल्याण विभाग को सौंपेगी।

आईसीएआर-एनआरसीबी, तिरुचिरापल्ली, केवीके और आईसीएआर-एटीएआरआई, हैदराबाद के माध्यम से इस पहल में मेजबानी का कार्य करेंगे और आवश्यक रसद तथा सचिवीय सहयोग प्रदान करेंगे।

कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने इस पहल के माध्यम से कहा कि सरकार का उद्देश्य किसानों के लिए आत्मनिर्भर, स्थायी और मजबूत एफपीओ बनाना है। इस कदम से किसानों की आय में वृद्धि होगी और तमिलनाडु के कृषि क्षेत्र में मूल्य संवर्धन एवं बाजार एकीकरण को बल मिलेगा।

इस पहल का व्यापक असर केवल आर्थिक नहीं बल्कि सामाजिक दृष्टि से भी होगा, क्योंकि एफपीओ के बेहतर संचालन से छोटे और सीमांत किसानों को लाभ मिलेगा, उन्हें तकनीकी सहायता मिलेगी और उनकी फसलों के लिए नए बाजार खुलेंगे।