गाँधी टॉक्स का ट्रेलर लॉन्च: ज़ी स्टूडियोज़ की तरफ से एक साहसी, मौन सिनेमाई बयान
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Gandhi Talks Trailer Released
गाँधी टॉक्स का अनोखा, संवादहीन ट्रेलर लॉन्च.
खामोशी और भावनाओं के जरिए प्रभावशाली कहानी.
ए. आर. रहमान का संगीत बना फिल्म की आत्मा.
Mumbai / ज़ी स्टूडियोज़ ने क्यूरियस डिजिटल प्राइवेट लिमिटेड, पिंकमून मेटा स्टूडियोज़ और मूवी मिल एंटरटेनमेंट के साथ मिलकर गाँधी टॉक्स का ट्रेलर लॉन्च कर दिया है। यह एक ऐसी फिल्म है, जो साहसी, कंटेंट-चालित सिनेमा में मेकर्स के विश्वास को मजबूती से पुनः स्थापित करती है और पारंपरिक ढांचे को चुनौती देने वाली कहानी पेश करती है।
जहाँ आज का अधिकांश सिनेमा शोर और तमाशे से भरा हुआ है, वहीं गाँधी टॉक्स संयम और आत्मविश्वास के साथ सामने आती है। यह ट्रेलर बिना संवाद बोले बहुत कुछ कह जाता है, जहाँ प्रभावशाली दृश्य, ठहराव और भावनात्मक गहराई कहानी को आगे बढ़ाते हैं। यह एक ऐसा सिनेमाई बयान है, जो दर्शकों से केवल सुनने नहीं, बल्कि महसूस करने और समझने की उम्मीद करता है।
विजय सेतुपति, अरविंद स्वामी, अदिति राव हैदरी और सिद्धार्थ जाधव जैसे दमदार कलाकारों से सजे इस ट्रेलर में सूक्ष्म अभिनय, आंतरिक संघर्ष और बिना शब्दों की अभिव्यक्ति की झलक मिलती है। यहाँ संवादों की जगह अभिव्यक्ति और उपस्थिति कहानी का केंद्र बनती है।
अपने अनुभव को साझा करते हुए विजय सेतुपति कहते हैं, "गाँधी टॉक्स ने मुझे बिना शब्दों के भाव व्यक्त करने की चुनौती दी। यह एक दुर्लभ फिल्म है, जहाँ मौन ही सबसे ताकतवर संवाद बन जाता है।"
इसी भावना को आगे बढ़ाते हुए अरविंद स्वामी कहते हैं, "एक ऐसी दुनिया में जो शोर से भरी है, गाँधी टॉक्स हमें याद दिलाती है कि खामोशी अब भी आत्मा को झकझोर सकती है। इस फिल्म में शब्द पीछे हट जाते हैं और सच चुपचाप सामने आ जाता है। रहमान का संगीत इसकी भाषा बन जाता है।"
फिल्म के भावनात्मक पक्ष पर बात करते हुए अदिति राव हैदरी कहती हैं, "इस फिल्म में मुझे सबसे ज्यादा प्रभावित किया कि भावनाओं को बोला नहीं, महसूस किया जाता है। यह फिल्म संवेदनशीलता और खामोशी को एक साथ बहुत खूबसूरती से जीने देती है।"
सिद्धार्थ जाधव के लिए यह फिल्म सिनेमा की सार्वभौमिकता का प्रमाण रही। वे कहते हैं, "ऐसी फिल्म का हिस्सा बनना, जो बिना संवादों के इतना प्रभावी रूप से बात करती है, बेहद खास अनुभव था। यह याद दिलाती है कि सिनेमा शब्दों से कहीं आगे जाता है।"
दिग्दर्शक किशोर पांडुरंग बेलेकर द्वारा निर्देशित गाँधी टॉक्स को ए. आर. रहमान के प्रभावशाली संगीत और बैकग्राउंड स्कोर का सशक्त सहारा मिला है। रहमान का संगीत फिल्म के मौन दृश्यों में प्राण भरता है और प्रतिष्ठित गायकों की आवाज़ें अनकहे पलों को और गहन बनाती हैं।
एक साहसी और अनोखे कदम के रूप में मेकर्स ने ट्रेलर को इसके संगीत समारोह से तीन दिन पहले रिलीज़ किया। ए. आर. रहमान लाइव कॉन्सर्ट के दौरान सिनेमा और लाइव म्यूज़िक का दुर्लभ और विचारपूर्ण मेल सामने आया। यह विशिष्ट प्रमोशनल रणनीति डूबकर महसूस करने वाली, अनुभववादी और कलात्मक दृष्टिकोण वाली फिल्म की अपनी फिलॉसफी को दर्शाती है।