Jharkhand Rajya Sabha Election : महागठबंधन में सीट बंटवारे पर टकराव, सरकार पर संकट की आहट
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Jharkhand Rajya Sabha Election
झारखंड राज्यसभा चुनाव में सीट बंटवारे पर विवाद.
जेएमएम और कांग्रेस के बीच खींचतान तेज.
महागठबंधन में राजनीतिक अस्थिरता के संकेत.
Ranchi / झारखंड की राजनीति में एक बार फिर राज्यसभा चुनाव को लेकर हलचल तेज हो गई है। दो सीटों पर होने वाले इस चुनाव ने महागठबंधन के भीतर खींचतान और असमंजस की स्थिति पैदा कर दी है। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के नेतृत्व वाले गठबंधन में शामिल जेएमएम, कांग्रेस, राजद और भाकपा माले के बीच सीट बंटवारे को लेकर सहमति नहीं बन पा रही है।
महागठबंधन के पास कुल 58 विधायक हैं, जो दोनों सीटें जीतने के लिए पर्याप्त संख्या है, लेकिन इसके लिए सभी दलों का एकजुट रहना जरूरी है। सबसे बड़ी पार्टी जेएमएम के पास 34 विधायक हैं और एक सीट पर उसकी जीत लगभग तय मानी जा रही है। इसके बाद दूसरी सीट को लेकर विवाद गहराता जा रहा है। कांग्रेस इस सीट पर अपना दावा मजबूत कर रही है और प्रणव झा को उम्मीदवार भी बनाया गया है, लेकिन अभी तक मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की ओर से अंतिम सहमति नहीं मिली है।
कांग्रेस का तर्क है कि उसे भी एक सीट मिलनी चाहिए, जबकि जेएमएम का मानना है कि शिबू सोरेन के नाम पर रिक्त हुई सीट पर उसका अधिकार है। दूसरी सीट को वह अपने संख्या बल के आधार पर रखना चाहती है। यही वजह है कि गठबंधन में तनाव बढ़ता जा रहा है।
राजद, जिसके पास चार विधायक हैं, ने भी नाराजगी जताई है कि उससे कोई सलाह नहीं ली गई। वहीं भाकपा माले के दो विधायक भी चाहते हैं कि जल्द महागठबंधन की बैठक बुलाकर फैसला लिया जाए।
अगर कांग्रेस और जेएमएम में सहमति नहीं बनी, तो क्रॉस वोटिंग की संभावना भी बढ़ सकती है, जिससे समीकरण पूरी तरह बदल सकते हैं। भाजपा भी इस स्थिति का फायदा उठाने की कोशिश में है, लेकिन उसके पास अपने बल पर सीट जीतने के लिए पर्याप्त संख्या नहीं है।
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि अगर अंदरूनी खींचतान बढ़ी, तो यह चुनाव सिर्फ सीटों का नहीं बल्कि झारखंड सरकार की एकजुटता की परीक्षा बन सकता है। फिलहाल सभी की नजर मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के अगले कदम और महागठबंधन की बैठक पर टिकी है।