कर्नाटक राजनीतिक संकट: रामलिंगा रेड्डी का इस्तीफा, डीके शिवकुमार सरकार को पहला झटका
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Ramalinga Reddy Resignation
कर्नाटक सरकार में विभाग बंटवारे पर विवाद.
रामलिंगा रेड्डी ने मंत्री पद से दिया इस्तीफा.
डीके शिवकुमार सरकार को शुरुआती राजनीतिक झटका.
Karnataka / कर्नाटक की नई डीके शिवकुमार सरकार में गठन के कुछ ही दिनों बाद बड़ा राजनीतिक विवाद सामने आ गया है। मुख्यमंत्री बनने के बाद सरकार के भीतर असंतोष की खबरों ने कांग्रेस खेमे में हलचल बढ़ा दी है। वरिष्ठ मंत्री रामलिंगा रेड्डी ने विभागों के बंटवारे से नाराज होकर मंत्री पद से इस्तीफा दे दिया, जिससे सरकार को शुरुआती झटका लगा है।
सूत्रों के अनुसार, रामलिंगा रेड्डी बेंगलुरु विकास विभाग की मांग कर रहे थे, लेकिन यह विभाग उन्हें नहीं दिया गया और इसके बजाय उन्हें मेजर व मीडियम सिंचाई विभाग सौंपा गया। इसी निर्णय से वे असंतुष्ट थे। बताया जा रहा है कि उन्हें पहले से आश्वासन मिला था कि बेंगलुरु विकास विभाग उन्हें दिया जाएगा, लेकिन बाद में यह विभाग कृष्णा बैरे गौड़ा को दे दिया गया।
रामलिंगा रेड्डी ने मीडिया से बातचीत में साफ किया कि उन्होंने कांग्रेस पार्टी नहीं छोड़ी है और वे अभी भी पार्टी के प्रति समर्पित हैं। उन्होंने कहा कि वे पिछले कई दशकों से कांग्रेस में काम कर रहे हैं और कभी भी उन्होंने किसी पद की मांग नहीं की।
इस घटनाक्रम के बीच यह भी चर्चा तेज हो गई है कि मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने वित्त विभाग अपने पास रखा है, जबकि पहले उपमुख्यमंत्री रहते हुए उनके पास बेंगलुरु विकास विभाग था। विभागों के इस पुनर्वितरण ने पार्टी के अंदर असंतोष को और बढ़ा दिया है।
कांग्रेस के भीतर यह असंतोष ऐसे समय पर सामने आया है जब पार्टी अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे और राहुल गांधी भी राज्य में मौजूद हैं। ऐसे में इस विवाद को राजनीतिक रूप से और भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
रामलिंगा रेड्डी कर्नाटक कांग्रेस के वरिष्ठ और अनुभवी नेताओं में से एक हैं, जो कई बार विधायक रह चुके हैं और गृह, परिवहन जैसे अहम मंत्रालय संभाल चुके हैं। उनके इस्तीफे ने राज्य की राजनीति में नई हलचल पैदा कर दी है और अब सभी की नजर पार्टी नेतृत्व के अगले कदम पर टिकी है।