उपराष्ट्रपति ने दीक्षांत में दिया संदेश, नवाचार और राष्ट्र निर्माण पर जोर
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उपराष्ट्रपति ने राजस्थान विश्वविद्यालय के दीक्षांत समारोह में छात्रों को समाज के लिए ज्ञान का उपयोग करने और नवाचार के माध्यम से देश निर्माण में योगदान देने का संदेश दिया।
आत्मनिर्भर भारत और विकसित भारत के विजन का जिक्र करते हुए युवाओं को रोजगार सृजनकर्ता, नवप्रवर्तक और जिम्मेदार नागरिक बनने के लिए प्रेरित किया।
महिला सशक्तिकरण पर जोर देते हुए कहा कि महिलाओं की बढ़ती भागीदारी देश के समग्र विकास और सामाजिक बदलाव का सकारात्मक संकेत है।
Jaipur/ भारत के उपराष्ट्रपति सी.पी. राधाकृष्णन ने जयपुर में राजस्थान विश्वविद्यालय के 35वें दीक्षांत समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में भाग लिया। इस अवसर पर उन्होंने राजस्थान को समृद्ध विरासत, वीरता और गहरी सांस्कृतिक परंपराओं की भूमि बताते हुए कहा कि यह राज्य लंबे समय से उत्कृष्टता और चरित्र निर्माण का केंद्र रहा है।
अपने संबोधन में उपराष्ट्रपति ने कहा कि दीक्षांत समारोह केवल एक शैक्षणिक पड़ाव का अंत नहीं, बल्कि नए जीवन की शुरुआत है। उन्होंने स्नातक छात्रों को बधाई देते हुए उन्हें अपने ज्ञान का उपयोग समाज की बेहतरी, नवाचार और नैतिक मूल्यों के साथ करने का आह्वान किया। उन्होंने जोर देकर कहा कि शिक्षा का वास्तविक उद्देश्य केवल व्यक्तिगत सफलता नहीं, बल्कि समाज के लिए सकारात्मक बदलाव लाना है।
उन्होंने नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में ‘आत्मनिर्भर भारत’ और ‘विकसित भारत’ के विजन का उल्लेख करते हुए युवाओं से रोजगार सृजनकर्ता और नवप्रवर्तक बनने का आग्रह किया। साथ ही उन्होंने भजनलाल शर्मा के नेतृत्व में राजस्थान सरकार द्वारा युवाओं के लिए किए जा रहे नवाचार और अवसरों के विस्तार की सराहना की।
महिला सशक्तिकरण पर बोलते हुए उपराष्ट्रपति ने कहा कि हाल के वर्षों में स्वर्ण पदक विजेताओं में महिलाओं की संख्या अधिक रही है, जो समाज में सकारात्मक बदलाव का संकेत है। उन्होंने कहा कि बिना महिलाओं को समान अवसर और नेतृत्व की भूमिका दिए किसी भी राष्ट्र का पूर्ण विकास संभव नहीं है। उन्होंने ‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम’ के माध्यम से महिलाओं की भागीदारी बढ़ने की उम्मीद भी जताई।
तेजी से बदलती वैश्विक परिस्थितियों का जिक्र करते हुए उन्होंने छात्रों को आलोचनात्मक सोच, नैतिक आचरण और आजीवन सीखने की आदत विकसित करने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि सफलता तभी सार्थक है, जब उसमें विनम्रता और सहानुभूति का समावेश हो।
कार्यक्रम में हरिभाऊ बागडे, प्रेम चंद बैरवा, राधा मोहन दास अग्रवाल और कुलपति प्रोफेसर अल्पना कटेजा सहित कई गणमान्य लोग उपस्थित रहे।
उपराष्ट्रपति ने अंत में स्नातकों से समाज में सकारात्मक योगदान देने, विविधता का सम्मान करने और नशे से दूर रहने का संदेश दिया। उन्होंने सोशल मीडिया के रचनात्मक उपयोग पर भी जोर दिया।