सर्बानंद सोनोवाल के नाम से फर्जी पत्र
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सर्बानंद सोनोवाल के नाम से वायरल पत्र को कार्यालय ने बताया फर्जी, जाली लेटरहेड और हस्ताक्षर का हुआ इस्तेमाल
मंत्री कार्यालय की अपील, फर्जी राजनीतिक खबरों से बचें और केवल आधिकारिक स्रोतों पर भरोसा करें
Assam/ केंद्रीय मंत्री सर्बानंद सोनोवाल के नाम से असम भाजपा में कथित अंदरूनी कलह को लेकर फैलाई जा रही खबरों पर अब आधिकारिक स्पष्टीकरण सामने आ गया है। मंत्री के कार्यालय ने स्पष्ट किया है कि मीडिया के कुछ हिस्सों में प्रसारित वह पत्र, जिसमें नेतृत्व परिवर्तन और मुख्यमंत्री हिमंत बिस्व सरमा पर आरोपों का दावा किया गया है, पूरी तरह फर्जी है। इस मामले में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू कर दी गई है।
फर्जी पत्र को लेकर सख्त रुख
केंद्रीय मंत्री सर्बानंद सोनोवाल के कार्यालय ने साफ शब्दों में कहा है कि जिस पत्र का हवाला देकर असम भाजपा में मतभेद की खबरें चलाई जा रही हैं, वह न केवल मनगढ़ंत है बल्कि उसमें जाली सरकारी लेटरहेड और फर्जी हस्ताक्षरों का इस्तेमाल किया गया है। कार्यालय ने इसे एक गंभीर आपराधिक कृत्य बताया है, जिसका उद्देश्य राजनीतिक भ्रम और गलत सूचना फैलाना है।
जालसाजी और सरकारी दस्तावेजों के दुरुपयोग का मामला
मंत्री कार्यालय के अनुसार, इस प्रकार की सामग्री का प्रसार जालसाजी, पहचान की नकल और सरकारी दस्तावेजों के दुरुपयोग जैसे गंभीर अपराधों की श्रेणी में आता है। इससे न केवल संवैधानिक पद पर बैठे व्यक्ति की छवि को नुकसान पहुंचाने का प्रयास किया गया है, बल्कि राजनीतिक स्थिरता पर भी असर डालने की कोशिश की गई है।
एफआईआर दर्ज, जांच एजेंसियां सक्रिय
मामले की गंभीरता को देखते हुए संबंधित थाने में एफआईआर दर्ज कर ली गई है। कानून प्रवर्तन एजेंसियों से अनुरोध किया गया है कि वे इस पूरे प्रकरण की प्राथमिकता के आधार पर जांच करें और दोषियों की पहचान कर उनके खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित करें।
आंतरिक मतभेदों के दावों को नकारा
केंद्रीय मंत्री के कार्यालय ने यह भी स्पष्ट किया है कि सर्बानंद सोनोवाल और असम भाजपा नेतृत्व के बीच किसी भी तरह का आंतरिक मतभेद या पत्राचार नहीं हुआ है। मुख्यमंत्री हिमंत बिस्व सरमा के खिलाफ लगाए गए सभी आरोप पूरी तरह निराधार और झूठे हैं।
मीडिया और जनता को सतर्क रहने की अपील
अंत में, मंत्री कार्यालय ने मीडिया संस्थानों और आम जनता से अपील की है कि वे इस तरह की अपुष्ट और फर्जी खबरों पर भरोसा न करें। किसी भी राजनीतिक या प्रशासनिक जानकारी की पुष्टि केवल आधिकारिक और अधिकृत स्रोतों से ही की जाए।