खजुराहो में मृत व्यक्ति के नाम शासकीय जमीन बेचने का करोड़ों का घोटाला उजागर
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खजुराहो क्षेत्र में मृत व्यक्ति को जीवित दिखाकर शासकीय भूमि की फर्जी रजिस्ट्री का मामला उजागर हुआ।
पुलिस ने दोनों मामलों को जोड़कर जांच तेज की, दलाल और मध्यस्थ भी रडार पर आए।
Madhya Pradesh/ यह मामला छतरपुर जिले की राजनगर तहसील के बमीठा थाना क्षेत्र अंतर्गत चंद्रनगर के शिवराजपुर हल्का से जुड़ा हुआ है। जानकारी के अनुसार वर्ष 1990 में शासन ने सेना में कार्यरत रामसेवक तिवारी को शासकीय भूमि का पट्टा आवंटित किया था। वर्ष 1996 में उनकी मृत्यु हो गई, लेकिन नियमानुसार भूमि को पुनः शासकीय अभिलेखों में दर्ज नहीं किया गया।
इसी प्रशासनिक चूक का फायदा उठाते हुए वर्ष 2013 में भू-माफियाओं और कुछ कर्मचारियों की कथित मिलीभगत से एक बड़ी साजिश रची गई। मृतक रामसेवक तिवारी को राजस्व रिकॉर्ड में जीवित दर्शाया गया और बिना मृत्यु प्रमाण पत्र के सत्यापन व रिकॉर्ड मिलान के शासकीय भूमि को निजी व्यक्तियों के नाम रजिस्ट्री करा दी गई। हैरानी की बात यह रही कि इस प्रक्रिया के दौरान किसी भी स्तर पर आपत्ति दर्ज नहीं की गई।
इस फर्जीवाड़े का खुलासा तब हुआ जब धमना गांव निवासी ओमप्रकाश पाठक को मामले की जानकारी मिली। उन्होंने न्यायालय में याचिका दायर की। लंबी सुनवाई के बाद वर्ष 2024 में कोर्ट के आदेश पर बमीठा थाने में प्रकरण दर्ज किया गया। इसमें धांधू कुशवाहा, गिरजू कुशवाहा, कमलेश कुशवाहा, एस.एस. सिसोदिया, अमित जैन, बच्ची कुशवाहा और संतोष कुशवाहा के खिलाफ धोखाधड़ी, जालसाजी और आपराधिक षड्यंत्र की धाराएं लगाई गईं।
मामला यहीं समाप्त नहीं हुआ। दिसंबर 2025 में आरोपी जबलपुर हाईकोर्ट से जमानत पर रिहा हुए और उन्होंने एक बार फिर उसी विवादित भूमि को बेचने का प्रयास किया। इस बार लगभग 2 करोड़ रुपये में जंगल कैंपस इंडिया लिमिटेड नामक कंपनी से सौदा किया गया।
राशि ट्रांसफर होने और रजिस्ट्री प्रक्रिया शुरू होने पर दस्तावेजों की जांच में पूरा फर्जीवाड़ा उजागर हो गया। इसके बाद कंपनी के डायरेक्टर गजेंद्र सिंह ने 14 जनवरी 2026 को बमीठा थाने में शिकायत दर्ज कराई। फिलहाल पुलिस दोनों मामलों को जोड़कर जांच कर रही है और दलालों व मध्यस्थों की भूमिका भी रडार पर है।