शिक्षा क्षेत्र में कई बड़ी घोषणाएं की गई हैं। ‘रानी लक्ष्मीबाई योजना’ के तहत मेधावी छात्राओं को स्कूटी देने के लिए 400 करोड़ रुपये का प्रावधान रखा गया है। बेसिक शिक्षा के लिए 77,622 करोड़ रुपये का भारी बजट दिया गया है। साथ ही छात्रों को डिजिटल रूप से सशक्त बनाने के लिए 40 लाख टैबलेट वितरित करने का लक्ष्य तय किया गया है। हर जिले में छात्राओं के लिए हॉस्टल बनाने और जिला अस्पतालों में इमरजेंसी व ट्रॉमा सेंटर स्थापित करने की योजना भी शामिल है।
स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने पर भी सरकार ने जोर दिया है। 14 नए मेडिकल कॉलेजों के संचालन के लिए 1,023 करोड़ रुपये आवंटित किए गए हैं। प्रदेश में एमबीबीएस सीटें 4,540 से बढ़कर 12,800 हो चुकी हैं, जो स्वास्थ्य शिक्षा के विस्तार का संकेत है। लखनऊ के कैंसर संस्थान के लिए 315 करोड़ रुपये और असाध्य रोगों के मुफ्त इलाज के लिए 130 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। मुख्यमंत्री जन आरोग्य योजना के लिए 500 करोड़ रुपये भी बजट में शामिल हैं।
रोजगार और उद्योग को बढ़ावा देने के लिए MSME सेक्टर को 3,822 करोड़ रुपये दिए गए हैं। यह सेक्टर प्रदेश में 3.11 करोड़ लोगों को रोजगार देता है। ‘सरदार वल्लभ भाई पटेल इम्प्लायमेंट एंड इंडस्ट्रियल जोन’ के लिए 575 करोड़ रुपये प्रस्तावित हैं। वहीं मुख्यमंत्री युवा उद्यमी विकास अभियान के तहत 1,000 करोड़ रुपये का बजट रखा गया है, जिसका लक्ष्य हर साल एक लाख सूक्ष्म उद्यम स्थापित करना है। ‘एक जनपद एक व्यंजन’ जैसी नई योजना भी शुरू की गई है।
ग्रामीण विकास और जल आपूर्ति पर भी बड़ा निवेश किया गया है। नमामि गंगे और ग्रामीण जलापूर्ति योजनाओं के लिए 22,676 करोड़ रुपये प्रस्तावित हैं, जबकि जल जीवन मिशन के लिए 22,452 करोड़ रुपये की व्यवस्था की गई है। अब तक 2.43 करोड़ ग्रामीण परिवारों को नल से जल कनेक्शन दिया जा चुका है। गंगा को प्रदूषण मुक्त बनाने के लिए 74 सीवरेज परियोजनाओं पर काम जारी है।
पर्यटन और विरासत को बढ़ावा देने के लिए लखनऊ में 207 करोड़ रुपये की लागत से नाइट सफारी विकसित की जाएगी। अयोध्या के विकास के लिए विशेष बजट का प्रावधान है। सारनाथ और हस्तिनापुर जैसे स्थलों के विकास और 10 हजार टूरिस्ट गाइडों को प्रशिक्षण देने की योजना भी शामिल है।
किसानों के लिए नलकूपों से सिंचाई हेतु मुफ्त बिजली की सुविधा जारी रखने का निर्णय भी बजट में दोहराया गया है। कुल मिलाकर यह बजट विकास, कल्याण और रोजगार के संतुलन के साथ राज्य को नई दिशा देने का प्रयास करता दिखता है।