छत्तीसगढ़ में 12 गांवों के नाम बदलेंगे

Fri 13-Feb-2026,12:17 PM IST +05:30

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छत्तीसगढ़ में 12 गांवों के नाम बदलेंगे Chhattisgarh-Rename-12-Villages-Social-Reform
  • छत्तीसगढ़ सरकार ने जातिगत अपमान और अंधविश्वास से जुड़े 12 गांवों के नाम बदलने की प्रक्रिया शुरू की।

  • नाम परिवर्तन से ग्रामीणों के आत्मसम्मान, सामाजिक गरिमा और नई सकारात्मक पहचान को मिलेगी मजबूती।

Chhattisgarh / Raipur :

Raipur/ छत्तीसगढ़ सरकार ने सामाजिक सम्मान और समानता को बढ़ावा देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए राज्य के 12 गांवों के नाम बदलने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। ये वे गांव हैं जिनके नाम जातिगत अपमान, सामाजिक हीनभावना या अंधविश्वास से जुड़े माने जाते रहे हैं। सरकार का मानना है कि यह निर्णय केवल औपचारिक बदलाव नहीं, बल्कि ग्रामीणों के आत्मसम्मान और नई पहचान से जुड़ा ऐतिहासिक प्रयास है।

राज्य के विभिन्न जिलों, विशेषकर कुरुद क्षेत्र से इस परिवर्तन की मांग लंबे समय से उठ रही थी। प्रशासनिक रिपोर्टों में यह बात सामने आई कि कुछ गांवों के नाम सामाजिक तिरस्कार का कारण बनते थे। युवाओं को नौकरी के आवेदन या परिचय के दौरान असहजता झेलनी पड़ती थी, वहीं बेटियों के विवाह प्रस्तावों में भी कठिनाइयों का सामना करना पड़ता था।

सरकार ने सामाजिक संवेदनशीलता को ध्यान में रखते हुए निर्णय लिया कि ऐसे नाम, जो जातिगत पहचान को अपमानजनक रूप में दर्शाते हैं या अंधविश्वास से जुड़े हैं, उन्हें बदला जाएगा। ‘चमारपारा’, ‘भंगी बस्ती’, ‘डोमटोला’ जैसे नामों के साथ-साथ ‘प्रेतनडीह’ और ‘टोनहीनारा’ जैसे शब्द भी सूची में शामिल हैं। अधिकारियों का कहना है कि विकास का अर्थ केवल सड़कों और भवनों का निर्माण नहीं, बल्कि मानसिक स्वतंत्रता और सामाजिक गरिमा की स्थापना भी है।

राजस्व अभिलेखों, पंचायत दस्तावेजों और शासकीय राजपत्र में नाम परिवर्तन की प्रक्रिया तेज कर दी गई है। पंचायतों से प्रस्ताव प्राप्त होने के बाद नए नामों को अंतिम रूप दिया जाएगा। जल्द ही सरकारी रिकॉर्ड और संकेत पट्टिकाओं पर नए, प्रेरणादायक और सम्मानजनक नाम दर्ज होंगे।

जिन 12 गांवों के नाम बदलने की प्रक्रिया चल रही है, उनमें प्रमुख रूप से चंडालपुर, नकटी, भंगी बस्ती, चमारपारा, डोमटोला, मेहरटोला, कटवारपारा, सुवरतला, कोलिहा, प्रेतनडीह, टोनहीनारा और चूहड़ा टोला शामिल हैं। इसे सामाजिक समरसता की दिशा में बड़ा संदेश माना जा रहा है, जहां पहचान अब हीनभावना नहीं बल्कि सम्मान और समानता का प्रतीक बनेगी।