थायरॉयड हार्मोन की कमी से नाक बंद, चेहरे की सूजन और कब्ज की समस्या बढ़ने का खतरा
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Thyroid Hormone Deficiency
थायरॉयड की कमी से नाक बंद और चेहरे पर सूजन.
पाचन तंत्र धीमा होने से कब्ज की समस्या.
समय पर जांच और उपचार बेहद जरूरी.
Nagpur / शरीर के संतुलित कामकाज के लिए थायरॉयड हार्मोन बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। जब शरीर में इस हार्मोन की मात्रा कम हो जाती है तो कई तरह की शारीरिक समस्याएं धीरे-धीरे सामने आने लगती हैं। आमतौर पर लोग थायरॉयड को केवल वजन बढ़ने या थकान से जोड़कर देखते हैं, लेकिन चिकित्सकों के अनुसार इसका असर शरीर के कई अन्य अंगों पर भी पड़ता है। विशेषज्ञ बताते हैं कि थायरॉयड हार्मोन की कमी की स्थिति को Hypothyroidism कहा जाता है, और इस स्थिति में नाक, चेहरा और पाचन तंत्र पर भी स्पष्ट प्रभाव दिखाई देता है। सबसे पहले इसका असर नाक के अंदर मौजूद नासिका म्यूकोसा यानी अंदरूनी परत पर पड़ता है। जब हार्मोन का स्तर कम होता है तो इस परत में सूजन आने लगती है। यह सूजन ऐसी होती है कि व्यक्ति को अक्सर नाक बंद रहने की शिकायत होती है, ठीक वैसे ही जैसे सर्दी या जुकाम में महसूस होती है। फर्क इतना होता है कि यहां संक्रमण नहीं होता बल्कि हार्मोन की कमी इसके पीछे की मुख्य वजह होती है। सूजन के कारण नाक की अंदरूनी ग्रंथियां भी प्रभावित होती हैं और सांस लेने में असुविधा महसूस हो सकती है। इसके साथ-साथ चेहरे पर भी सूजन दिखाई देने लगती है, जिससे चेहरा फूला हुआ या पफी नजर आता है। कई मरीजों में यह सूजन सुबह के समय अधिक स्पष्ट होती है। डॉक्टरों का कहना है कि थायरॉयड हार्मोन शरीर में द्रव और ऊतकों के संतुलन को नियंत्रित करता है, इसलिए इसकी कमी होने पर शरीर में अतिरिक्त पदार्थ जमा होने लगते हैं, जो सूजन का कारण बनते हैं। यही कारण है कि थायरॉयड की समस्या वाले कई मरीजों में नाक बंद रहने, चेहरे पर सूजन और थकान जैसे लक्षण एक साथ दिखाई देते हैं।
चिकित्सकीय अध्ययनों में भी इस स्थिति के कई वैज्ञानिक कारण सामने आए हैं। शोधों में पाया गया है कि थायरॉयड हार्मोन कम होने पर शरीर में Thyroid‑stimulating hormone यानी TSH का स्तर बढ़ जाता है। यह हार्मोन थायरॉयड ग्रंथि को सक्रिय करने का काम करता है, लेकिन जब इसकी मात्रा अधिक हो जाती है तो शरीर के विभिन्न ऊतकों में बदलाव आने लगते हैं। वैज्ञानिकों द्वारा किए गए कुछ प्रयोगों में यह देखा गया कि हाइपोथायरॉयडिज्म की स्थिति में नाक की अंदरूनी ग्रंथियां बड़ी हो जाती हैं और ऊतकों में अतिरिक्त पदार्थ जमा होने लगता है। इससे नासिका की परत मोटी हो जाती है और सूजन बढ़ जाती है, जिसे हाइपरट्रॉफी कहा जाता है। इतना ही नहीं, नाक की अंदरूनी परत में थायरॉयड हार्मोन के विशेष रिसेप्टर्स भी मौजूद होते हैं, इसलिए जब हार्मोन की कमी होती है तो उसका सीधा असर इस हिस्से पर पड़ता है। इसके परिणामस्वरूप सूजन, जलन और नई रक्त वाहिकाओं के बनने जैसी प्रक्रियाएं तेज हो जाती हैं। यह बदलाव मिलकर नाक बंद होने की समस्या को और बढ़ा देते हैं। इसके अलावा यही प्रक्रिया शरीर के अंदर भी चलती रहती है, खासकर पाचन तंत्र में। जब थायरॉयड हार्मोन कम हो जाता है तो आंतों की गति धीमी पड़ जाती है, जिससे पाचन प्रक्रिया प्रभावित होती है और कब्ज की समस्या पैदा हो सकती है। डॉक्टरों के अनुसार शरीर में पानी और अन्य पदार्थों के जमा होने की प्रवृत्ति भी बढ़ जाती है, जिससे चेहरे पर सूजन, नाक में बंदपन और कब्ज जैसे लक्षण एक साथ देखने को मिलते हैं। विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि यदि किसी व्यक्ति को लंबे समय तक नाक बंद रहना, चेहरे की सूजन, थकान या कब्ज जैसी समस्याएं बनी रहती हैं तो उसे थायरॉयड की जांच जरूर करानी चाहिए, क्योंकि समय पर जांच और उपचार से इन समस्याओं को काफी हद तक नियंत्रित किया जा सकता है।