होर्मुज जलडमरूमध्य पर तनाव: ईरान की शर्त से बढ़ी भारत की चिंता, तेल आपूर्ति पर मंडराया संकट
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Strait of Hormuz Crisis News
होर्मुज जलडमरूमध्य बंद होने से वैश्विक तेल आपूर्ति पर असर.
ईरान ने भारत के सामने तीन टैंकर छोड़ने की शर्त रखी.
ऊर्जा सुरक्षा और कूटनीति के बीच भारत के सामने बड़ी चुनौती.
Tehran / मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव के बीच वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति को लेकर चिंता गहराती जा रही है। Iran और Israel के बीच टकराव तथा United States की सैन्य कार्रवाई के बाद ईरान ने रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण Strait of Hormuz को बंद करने का कदम उठाया है। इस फैसले का असर पूरी दुनिया के तेल बाजार पर पड़ रहा है, क्योंकि वैश्विक कच्चे तेल की आपूर्ति का लगभग 20 प्रतिशत इसी समुद्री मार्ग से होकर गुजरता है। इस स्थिति ने भारत सहित कई देशों की ऊर्जा सुरक्षा को लेकर नई चिंता पैदा कर दी है।
भारत लगातार ईरान से अपील कर रहा है कि भारतीय जहाजों को इस जलमार्ग से सुरक्षित आवाजाही की अनुमति दी जाए। इसी बीच एक नई रिपोर्ट सामने आई है, जिसमें दावा किया गया है कि ईरान ने भारत के सामने एक शर्त रखी है। अंतरराष्ट्रीय समाचार एजेंसी Reuters के अनुसार, ईरान ने भारत से कहा है कि यदि उसे अपने जहाजों के लिए होर्मुज जलडमरूमध्य से सुरक्षित रास्ता चाहिए, तो बदले में भारत को उन तीन टैंकरों को छोड़ना होगा जिन्हें हाल ही में भारतीय अधिकारियों ने जब्त किया था।
रिपोर्ट के मुताबिक, भारत में ईरान के राजदूत ने सोमवार को नई दिल्ली में विदेश मंत्रालय के अधिकारियों से मुलाकात की। इस बैठक में समुद्री सुरक्षा और तेल आपूर्ति से जुड़े मुद्दों पर चर्चा हुई। इसी दौरान ईरान की ओर से यह प्रस्ताव रखा गया कि यदि भारत उन टैंकरों को मुक्त कर देता है जिन्हें संदेह के आधार पर रोका गया था, तो ईरान भारतीय जहाजों के लिए सुरक्षित मार्ग उपलब्ध कराने पर विचार कर सकता है। हालांकि इस प्रस्ताव को लेकर न तो भारत सरकार की ओर से कोई आधिकारिक बयान आया है और न ही ईरान ने सार्वजनिक रूप से इसकी पुष्टि की है।
दरअसल, 6 फरवरी को भारतीय तटीय सुरक्षा एजेंसियों ने तीन तेल टैंकरों को मुंबई तट के पास रोक लिया था। इन जहाजों के नाम स्टेलर रूबी, एस्फाल्ट स्टार और अल जाफजिया बताए गए हैं। जांच एजेंसियों को संदेह था कि ये जहाज अवैध तेल व्यापार में शामिल हो सकते हैं और इनका संबंध ईरान से हो सकता है। उस समय यह भी कहा गया था कि इन जहाजों पर अमेरिका द्वारा लगाए गए प्रतिबंधों का उल्लंघन होने की आशंका है। इसी कारण इन टैंकरों को जांच के लिए जब्त कर लिया गया था।
अब ईरान ने इन्हीं जहाजों को छोड़ने की मांग भारत के सामने रखी है। यदि यह मामला आगे बढ़ता है तो भारत के सामने एक जटिल कूटनीतिक चुनौती खड़ी हो सकती है। एक तरफ उसे अपनी ऊर्जा जरूरतों को सुरक्षित रखना है, तो दूसरी तरफ उसे अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों और वैश्विक राजनीतिक संतुलन का भी ध्यान रखना होगा।
इससे पहले ईरान की ओर से यह भी कहा गया था कि भारत और ईरान के बीच लंबे समय से मैत्रीपूर्ण संबंध रहे हैं। दोनों देशों के बीच ऊर्जा, व्यापार और रणनीतिक सहयोग के कई आयाम हैं। इसी संदर्भ में ईरान ने संकेत दिया था कि भारतीय जहाजों को अनावश्यक रूप से परेशान नहीं किया जाएगा। इसके बाद होर्मुज जलडमरूमध्य से भारत के लिए दो तेल टैंकर रवाना भी किए गए थे। इनमें से एक टैंकर भारत पहुंच चुका है, जबकि दूसरा टैंकर मंगलवार तक भारतीय बंदरगाह पर पहुंचने की संभावना है।
विशेषज्ञों का मानना है कि होर्मुज जलडमरूमध्य में तनाव लंबे समय तक बना रहा तो इसका असर वैश्विक तेल कीमतों पर भी पड़ सकता है। भारत जैसे देश, जो अपनी ऊर्जा जरूरतों का बड़ा हिस्सा आयात से पूरा करते हैं, उनके लिए यह स्थिति विशेष रूप से चुनौतीपूर्ण हो सकती है। फिलहाल पूरी दुनिया की नजर इस बात पर टिकी है कि भारत और ईरान के बीच बातचीत किस दिशा में आगे बढ़ती है और क्या कोई ऐसा समाधान निकलता है जिससे ऊर्जा आपूर्ति भी बनी रहे और कूटनीतिक संतुलन भी कायम रहे।