अंबिकापुर TET परीक्षा विवाद: फुल बाजू शर्ट काटने पर बवाल
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होलीक्रॉस कॉलेज परीक्षा केंद्र की घटना का वीडियो वायरल, सोशल मीडिया पर परीक्षा प्रबंधन की तीखी आलोचना।
बिना पूर्व सूचना नियम लागू करने पर उठे सवाल, प्रशासनिक जवाबदेही और मानवीय दृष्टिकोण की मांग।
Ambikapur/ छत्तीसगढ़ के अंबिकापुर में आयोजित TET परीक्षा के दौरान परीक्षा केंद्र पर हुई एक घटना ने शिक्षा व्यवस्था और परीक्षा प्रबंधन की कार्यप्रणाली को विवादों में ला दिया है। मामला अंबिकापुर स्थित होलीक्रॉस कॉलेज परीक्षा केंद्र का बताया जा रहा है, जहां परीक्षा में शामिल होने पहुंचे कई अभ्यर्थियों के साथ कथित रूप से अमानवीय व्यवहार किया गया।
परीक्षार्थियों का आरोप है कि परीक्षा केंद्र में प्रवेश से पहले सुरक्षा और अनुशासन के नाम पर उनकी फुल बाजू शर्ट को कैंची से काट दिया गया। यह कार्रवाई परीक्षा शुरू होने से ठीक पहले की गई, जिससे अभ्यर्थी पूरी तरह असहज और मानसिक रूप से विचलित हो गए। कई छात्रों ने बताया कि सार्वजनिक रूप से कपड़े काटे जाने से उन्हें गहरा अपमान और मानसिक आघात महसूस हुआ।
अभ्यर्थियों का कहना है कि यदि परीक्षा में फुल बाजू कपड़े पहनने पर कोई प्रतिबंध था, तो इसकी जानकारी पहले से एडमिट कार्ड या आधिकारिक दिशा-निर्देशों में स्पष्ट रूप से दी जानी चाहिए थी। लेकिन परीक्षा प्रबंधन ने मौके पर अचानक नियम लागू कर दिए, जिससे परीक्षार्थियों को न केवल मानसिक तनाव झेलना पड़ा, बल्कि उनकी परीक्षा की तैयारी और एकाग्रता भी प्रभावित हुई।
कुछ छात्रों ने आरोप लगाया कि उन्होंने परीक्षा केंद्र कर्मियों से वैकल्पिक व्यवस्था या अनुमति देने का अनुरोध किया, लेकिन उनकी बात नहीं सुनी गई। कई अभ्यर्थियों को मजबूरी में अपने कपड़े कटवाने पड़े, क्योंकि उनके पास परीक्षा छोड़ने के अलावा कोई विकल्प नहीं था।
इस पूरे घटनाक्रम को कुछ परीक्षार्थियों ने अपने मोबाइल फोन में रिकॉर्ड कर लिया। वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होते ही मामले ने तूल पकड़ लिया। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर लोग इस घटना को छात्रों की गरिमा का उल्लंघन, प्रशासनिक असंवेदनशीलता और शक्ति के दुरुपयोग का उदाहरण बता रहे हैं। कई यूजर्स ने सवाल उठाया कि क्या परीक्षा में अनुशासन बनाए रखने का यही तरीका है।
घटना के बाद कई गंभीर सवाल सामने आए हैं क्या नियमों को लागू करने से पहले मानवीय पहलुओं पर विचार नहीं किया जाना चाहिए? क्या परीक्षा प्रबंधन की जवाबदेही तय होगी? और क्या भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए स्पष्ट दिशानिर्देश जारी किए जाएंगे?
फिलहाल इस मामले पर जिला प्रशासन या परीक्षा प्राधिकरण की ओर से कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है। हालांकि, यह घटना परीक्षा प्रणाली में अनुशासन और संवेदनशीलता के बीच संतुलन को लेकर एक बड़ी बहस जरूर छेड़ चुकी है।