UGC इक्विटी रेगुलेशंस विवाद: दिग्विजय सिंह बोले-संसदीय समिति नहीं
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UGC के नए इक्विटी रेगुलेशंस पर बढ़ते विरोध के बीच दिग्विजय सिंह ने विवाद के लिए सीधे आयोग को जिम्मेदार ठहराया।
छात्रों में भ्रम और आक्रोश दूर करने की जिम्मेदारी अब UGC और शिक्षा मंत्रालय पर डाली गई।
Madhya pradesh/ राज्यसभा सांसद दिग्विजय सिंह ने UGC के नए इक्विटी रेगुलेशंस पर चल रहे विवाद को लेकर कहा कि संसदीय समिति की रिपोर्ट को गलत तरीके से पेश किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि समिति की कई अहम सिफारिशों को UGC ने नजरअंदाज कर दिया, जिससे छात्रों में भ्रम और आक्रोश की स्थिति बनी है।
दिग्विजय सिंह के अनुसार, झूठे या दुर्भावनापूर्ण मामलों में छात्रों के खिलाफ दंडात्मक प्रावधान हटाने का निर्णय संसदीय समिति का नहीं था। यह फैसला UGC द्वारा एकतरफा लिया गया, जबकि समिति ने ऐसा कोई सुझाव नहीं दिया था। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि जनरल कैटेगरी के छात्रों को इन नियमों के दायरे से बाहर रखने का निर्णय भी UGC का अपना फैसला था।
उन्होंने सोशल मीडिया के माध्यम से अपनी बात रखते हुए कहा कि संसदीय समिति ने UGC को स्पष्ट रूप से सुझाव दिया था कि भेदभावपूर्ण व्यवहार की एक विस्तृत और स्पष्ट सूची तैयार की जाए। इसका उद्देश्य यह था कि नियमों की व्याख्या में अस्पष्टता न रहे और कानून का दुरुपयोग रोका जा सके। हालांकि, UGC ने इस महत्वपूर्ण सिफारिश को स्वीकार नहीं किया।
दिग्विजय सिंह का कहना है कि यदि भेदभाव की परिभाषा स्पष्ट रूप से तय की गई होती, तो छात्रों के बीच ‘फर्जी केस’ दर्ज होने का डर पैदा ही नहीं होता। इसी अस्पष्टता के कारण आज कैंपस में असंतोष और भ्रम का माहौल बना हुआ है।
उन्होंने दो टूक कहा कि अब इस पूरे मुद्दे को सुलझाने की जिम्मेदारी UGC और शिक्षा मंत्रालय की है। छात्रों के गुस्से की वजह संसदीय समिति नहीं, बल्कि UGC द्वारा लिए गए फैसले हैं। उन्होंने शिक्षा मंत्रालय से अपील की कि वह जल्द हस्तक्षेप कर स्थिति को स्पष्ट करे और छात्रों का भरोसा बहाल करे।