गुरु रविदास जयंती पर राष्ट्रपति मुर्मु का संदेश
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राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने गुरु रविदास जयंती पर समानता, सामाजिक न्याय और प्रेम के संदेश को आत्मसात करने का आह्वान किया।
राष्ट्रपति ने गुरु रविदास जी को समाज सुधारक बताते हुए राष्ट्र निर्माण में उनकी शिक्षाओं की भूमिका को रेखांकित किया।
Delhi/ राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने अपने आधिकारिक संदेश में कहा कि गुरु रविदास जी की जन्म जयंती का पावन अवसर हमें आत्मचिंतन और सामाजिक समरसता का संदेश देता है। उन्होंने कहा कि गुरु रविदास जी ने अपने उपदेशों और काव्य के माध्यम से समाज में फैली कुरीतियों, भेदभाव और असमानता के खिलाफ आवाज उठाई।
राष्ट्रपति ने कहा कि गुरु रविदास जी सादगी, नैतिक अनुशासन और मानवता के प्रतीक थे। उन्होंने जाति, धर्म और सामाजिक स्थिति के आधार पर होने वाले भेदभाव को नकारते हुए एक समतामूलक समाज की कल्पना प्रस्तुत की। उनका संदेश था कि सभी मनुष्य समान हैं और प्रेम, करुणा व न्याय ही सच्चे धर्म हैं।
श्रीमती मुर्मु ने यह भी कहा कि गुरु रविदास जी के विचार आज के समय में सामाजिक एकता और राष्ट्र निर्माण के लिए अत्यंत प्रेरणादायक हैं। उनके सिद्धांत हमें मानवीय मूल्यों को अपनाने और समाज के कमजोर वर्गों के उत्थान के लिए कार्य करने की प्रेरणा देते हैं। राष्ट्रपति ने देशवासियों से आह्वान किया कि वे गुरु रविदास जी की शिक्षाओं को अपने जीवन में आत्मसात करें और एक समरस, न्यायपूर्ण और संवेदनशील समाज के निर्माण में सक्रिय भूमिका निभाएं।