भारत पर्व 2026 में पंजाब की लोक संगीत व सूफी क़लंदरी धमाल की छटा
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भारत पर्व 2026 में पंजाबी लोक ऑर्केस्ट्रा पारंपरिक वाद्ययंत्रों के जरिए पंजाब की जीवंत लोक संगीत परंपरा का सशक्त मंचीय प्रदर्शन करेगा।
लाल किले में आयोजित कार्यक्रम में संगीत और नृत्य के माध्यम से पंजाब की सांस्कृतिक व आध्यात्मिक विरासत का अनूठा संगम दिखेगा।
New Delhi/ भारत पर्व 2026 के मंच पर इस बार पंजाब की लोक संगीत और सूफी परंपरा की अनूठी झलक देखने को मिलेगी। नई दिल्ली के ऐतिहासिक लाल किले में आयोजित इस राष्ट्रीय सांस्कृतिक उत्सव में 31 जनवरी को पंजाबी लोक ऑर्केस्ट्रा और क़लंदरी धमाल की संयुक्त प्रस्तुतियां दर्शकों को पंजाब की जीवंत सांस्कृतिक पहचान से रूबरू कराएंगी।
पंजाबी लोक ऑर्केस्ट्रा एक विशिष्ट संगीत समूह है, जिसमें ढोल, ढोलकी, ताल-कोज़े, तंसारी, बांसुरी, नगाड़ा, चिमटा, सप, कड़ा और वंजली जैसे पारंपरिक लोक वाद्ययंत्रों का समावेश किया गया है। इन वाद्ययंत्रों को एक सुव्यवस्थित और सामूहिक संरचना में पिरोकर ऐसी प्रस्तुति तैयार की गई है, जो पंजाबी लोक संगीत की मौलिक आत्मा को संरक्षित रखते हुए आधुनिक मंचीय स्वरूप में प्रस्तुत करती है।
यह ऑर्केस्ट्रा बारह छात्रों के एक समूह द्वारा प्रस्तुत किया जाता है, जहां प्रत्येक कलाकार एक विशेष वाद्ययंत्र बजाने की जिम्मेदारी निभाता है। उनका समन्वित प्रदर्शन न केवल टीमवर्क और अनुशासन को दर्शाता है, बल्कि पंजाबी लोक संगीत परंपराओं की गहरी समझ को भी उजागर करता है। यह पहल युवा कलाकारों को पारंपरिक लोक वाद्ययंत्रों और समूहिक प्रस्तुति की तकनीकों में प्रशिक्षित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।
कार्यक्रम में आध्यात्मिक रंग भरते हुए सिंध और पंजाब की साझा सूफी विरासत से जुड़ा क़लंदरी धमाल भी प्रस्तुत किया जाएगा। यह भक्तिमय लोक नृत्य लाल शाहबाज क़लंदर की दरगाह से जुड़ा हुआ है और ईश्वर व सूफी संतों के प्रति प्रेम, समर्पण और आध्यात्मिक स्वतंत्रता का प्रतीक माना जाता है।
क़लंदरी धमाल की प्रस्तुति में ढोल, घड़ियाल, सोरना, शंख और तुम्बा जैसे वाद्ययंत्रों की ऊर्जावान ध्वनियां गूंजती हैं। तालियों की गड़गड़ाहट और “दमदम मस्त क़लंदर” जैसे जयकारे पूरे वातावरण को भक्तिमय बना देते हैं। नृतकों की स्वतंत्र और अभिव्यंजक मुद्राएं, नंगे पांव नृत्य और धुंधरुओं की गूंज आध्यात्मिक समर्पण का प्रतीक बन जाती हैं।
भारत पर्व 2026 में पंजाबी लोक ऑर्केस्ट्रा और क़लंदरी धमाल की ये प्रस्तुतियां न केवल पंजाब की सांस्कृतिक पहचान को सशक्त रूप से सामने लाएंगी, बल्कि प्रेम, एकता और सांप्रदायिक सद्भाव का संदेश भी देंगी।