ईज ऑफ डूइंग बिजनेस पर बड़ा कदम: बंदरगाह और लॉजिस्टिक्स सुधार पर सरकार की समीक्षा बैठक
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Ease of Doing Business
बंदरगाह और लॉजिस्टिक्स प्रणाली में सुधार पर चर्चा.
कार्गो मूवमेंट और ईज ऑफ डूइंग बिजनेस को बढ़ावा.
अंतर-एजेंसी समन्वय और आधुनिक समाधान पर जोर.
Delhi / भारत सरकार ने देश में कारोबारी सुगमता (Ease of Doing Business – EODB) को मजबूत करने और वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला में उत्पन्न चुनौतियों का समाधान करने के लिए एक महत्वपूर्ण और निर्णायक कदम उठाया है। बदलते वैश्विक व्यापारिक हालात और लॉजिस्टिक्स दबावों को देखते हुए सरकार ने एक समन्वित “समग्र-सरकारी” दृष्टिकोण अपनाते हुए एग्जिम समुदाय की समस्याओं को दूर करने की दिशा में तेज कार्रवाई शुरू की है।
इस पहल के तहत केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री Piyush Goyal और केंद्रीय पत्तन, पोत परिवहन एवं जलमार्ग मंत्री Sarbananda Sonowal ने ‘ऑल इंडिया लिक्विड बल्क इम्पोर्टर्स एंड एक्सपोर्टर्स एसोसिएशन’ के प्रतिनिधियों के साथ उच्च स्तरीय बैठक की। बैठक में मुख्य रूप से कार्गो की आवाजाही को तेज, सुचारु और अधिक प्रभावी बनाने पर चर्चा की गई।
बंदरगाहों पर बढ़ते दबाव की चुनौती
हाल के समय में खाड़ी देशों की ओर जाने वाले कंटेनरों के रूट बदलने के कारण जवाहरलाल नेहरू पत्तन प्राधिकरण (JNPA) पर अत्यधिक दबाव देखा गया है। इससे बंदरगाहों पर भीड़भाड़ और लॉजिस्टिक्स सिस्टम पर अतिरिक्त भार बढ़ गया है। इस स्थिति को नियंत्रित करने के लिए सरकार ने त्वरित कार्रवाई करते हुए कई संचालनात्मक सुधार लागू किए हैं।
जेएनपीए ने कंटेनरों की तेजी से निकासी के लिए रेलवे नेटवर्क का उपयोग बढ़ाया और पास के कंटेनर फ्रेट स्टेशनों (CFS) तक माल भेजने की व्यवस्था को मजबूत किया। साथ ही, स्कैनिंग प्रक्रिया को तेज करने के लिए एक साथ दो कंटेनरों की जांच की सुविधा भी शुरू की गई, जिससे समय की बचत हो रही है।
व्यापारियों को राहत और सुधारात्मक कदम
सरकार ने व्यापार समुदाय को राहत देने के लिए कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए हैं। इंटर-टर्मिनल रेलवे हैंडलिंग ऑपरेशन (ITRHO) शुल्क और ट्रांसशिपमेंट शुल्क को माफ कर दिया गया है। इसके अलावा, टर्मिनलों पर भूमि किराए में छूट और अन्य रियायतें भी दी जा रही हैं।
भीड़भाड़ को कम करने के लिए “ग्रीन चैनल” की व्यवस्था खाली ट्रेलरों के लिए लागू की गई है। वहीं, सीएफएस ऑपरेटरों ने मिलकर ट्रेलर संसाधनों को बढ़ाया है ताकि लंबे समय से फंसे कंटेनरों को जल्दी निकाला जा सके।
इन प्रयासों से बंदरगाहों की कार्यक्षमता में सुधार हुआ है और पुराने कंटेनरों की संख्या में भी कमी आई है।
दीर्घकालिक सुधार और आधुनिक लॉजिस्टिक्स प्रणाली
सरकार केवल तात्कालिक समाधान पर ही नहीं, बल्कि दीर्घकालिक सुधारों पर भी ध्यान दे रही है। जेएनपीए ने लॉजिस्टिक्स क्षमता बढ़ाने के लिए एक विस्तृत रोडमैप तैयार किया है। इसमें प्रशिक्षित ड्राइवरों की उपलब्धता बढ़ाना, रेलवे के माध्यम से कार्गो परिवहन को विस्तार देना और ड्राइविंग प्रशिक्षण संस्थानों के साथ साझेदारी शामिल है।
इसके साथ ही इलेक्ट्रिक वाहनों को अपनाने की दिशा में भी कदम उठाए जा रहे हैं, ताकि लॉजिस्टिक्स को अधिक पर्यावरण अनुकूल बनाया जा सके। “ट्रक अपॉइंटमेंट सिस्टम” लागू करने की योजना भी बनाई जा रही है, जिससे टर्मिनलों पर ट्रैफिक प्रबंधन बेहतर होगा।
कुल मिलाकर, सरकार का यह “समग्र दृष्टिकोण” भारत के व्यापार और लॉजिस्टिक्स ढांचे को अधिक मजबूत, तेज और वैश्विक प्रतिस्पर्धा के योग्य बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम है। इन सुधारों से न केवल ईज ऑफ डूइंग बिजनेस को बढ़ावा मिलेगा, बल्कि भारत की आपूर्ति श्रृंखला भी अधिक स्थिर और प्रभावी बनेगी।