Haryana 590 Crore Bank Scam: IDFC First Bank घोटाले में मास्टरमाइंड गिरफ्तार, CBI जांच की मांग तेज

Wed 25-Feb-2026,12:05 PM IST +05:30

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Haryana 590 Crore Bank Scam: IDFC First Bank घोटाले में मास्टरमाइंड गिरफ्तार, CBI जांच की मांग तेज Haryana Bank Scam
  • 590 करोड़ रुपये का बैंक घोटाला उजागर.

  • मास्टरमाइंड समेत चार आरोपी गिरफ्तार.

  • CBI जांच की मांग, फोरेंसिक ऑडिट जारी.

Haryana / Bhiwani :

Bhiwani / हरियाणा में IDFC First Bank से जुड़ा करीब 590 करोड़ रुपये का घोटाला सामने आते ही सियासी और प्रशासनिक हलकों में हड़कंप मच गया। चंडीगढ़ ब्रांच से जुड़े इस मामले में विजिलेंस ने 24 फरवरी की शाम कार्रवाई करते हुए कथित मास्टरमाइंड रिभव ऋषि समेत चार आरोपियों—अभय कुमार, स्वाति सिंगला और अभिषेक सिंगला—को गिरफ्तार कर लिया। सरकार का दावा है कि पूरी रकम सुरक्षित वापस मंगा ली गई है, लेकिन पूरे घटनाक्रम ने कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

घोटाला सामने कैसे आया?
मामले की शुरुआत एक प्रशासनिक आदेश से हुई। फरवरी 2026 के आसपास हरियाणा सरकार ने IDFC First Bank और AU Small Finance Bank को सरकारी कामकाज से डी-एम्पैनल कर दिया और विभागों को निर्देश दिया कि वे इन बैंकों से अपना पैसा निकालकर अन्य अधिकृत बैंकों में ट्रांसफर करें।

जब एक विभाग ने चंडीगढ़ शाखा से खाता बंद करने और फंड ट्रांसफर करने का अनुरोध किया, तब खातों में दिख रही रकम और वास्तविक बैलेंस में बड़ा अंतर सामने आया। जांच बढ़ी तो कई सरकारी खातों से जुड़ी रकम गायब मिली। शुरुआत में गड़बड़ी करीब 490 करोड़ रुपये की बताई गई, जो आगे चलकर 590 करोड़ तक पहुंच गई।

पारंपरिक तरीके से अंजाम दिया गया खेल
जांच एजेंसियों के अनुसार यह कोई हाई-टेक साइबर फ्रॉड नहीं था। आरोप है कि बैंक के कुछ कर्मचारियों ने बाहरी लोगों के साथ मिलकर फर्जी चेक और अनधिकृत ट्रांजेक्शन के जरिए सरकारी खातों से रकम निकालकर दूसरे खातों में ट्रांसफर की।

फर्जी कंपनियों का इस्तेमाल किया गया, ताकि पैसों के ट्रेल को छिपाया जा सके। सूत्रों के मुताबिक, रिभव ऋषि—जो पहले IDFC First Bank में मैनेजर था और बाद में AU Small Finance Bank में तैनात था—ने इस पूरे नेटवर्क को तैयार किया।

सरकार और बैंक की त्वरित कार्रवाई
घोटाला उजागर होते ही बैंक ने चार कर्मचारियों को सस्पेंड किया, पुलिस में शिकायत दर्ज कराई और RBI को सूचित किया। साथ ही KPMG से फोरेंसिक ऑडिट शुरू कराया गया।

हरियाणा सरकार ने भी सभी विभागों को निर्देश दिया कि वे तुरंत अपने खाते बंद कर रकम सुरक्षित स्थानांतरित करें। विजिलेंस और एंटी करप्शन ब्यूरो को जांच सौंपी गई। मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने विधानसभा में कहा कि सरकार ने समय रहते गड़बड़ी पकड़ ली और पूरी रकम सुरक्षित वापस ले ली गई है।

राजनीतिक बयानबाजी और CBI जांच की मांग
मामला सामने आते ही राजनीति भी गरमा गई। विपक्ष के नेता भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने CBI जांच की मांग करते हुए कहा कि सिर्फ पैसा वापस आना काफी नहीं है, असली जिम्मेदारों की पहचान जरूरी है। कांग्रेस नेता बीबी बत्रा ने भी सरकार से जवाबदेही तय करने की मांग की।

शेयर बाजार पर असर
इस घोटाले का असर बाजार पर भी दिखा। IDFC First Bank के शेयरों में करीब 20% की गिरावट दर्ज की गई, जिससे निवेशकों को भारी नुकसान हुआ। अनुमान है कि कुछ ही घंटों में लगभग 14,000 करोड़ रुपये की मार्केट वैल्यू मिट गई।

RBI गवर्नर संजय मल्होत्रा ने कहा कि यह एक “लोकलाइज्ड” मामला है और बैंकिंग सिस्टम पर व्यापक खतरा नहीं है, लेकिन केंद्रीय बैंक स्थिति पर नजर रखे हुए है।

अभी भी अनसुलझे सवाल
हालांकि सरकार का दावा है कि पूरा पैसा वापस मिल गया है, लेकिन कई प्रश्न अब भी बाकी हैं। क्या यह सिर्फ कुछ कर्मचारियों की मिलीभगत थी या इसके पीछे बड़ा नेटवर्क? फर्जी कंपनियों के जरिए पैसा कहां गया? क्या इसमें सरकारी अधिकारियों की भी भूमिका थी?

सरकार ने संकेत दिए हैं कि कुछ सरकारी कर्मचारियों की भूमिका भी जांच के दायरे में है। फिलहाल फोरेंसिक ऑडिट, बैंक रिकॉर्ड और मनी ट्रेल की गहन पड़ताल जारी है। प्रशासन का कहना है कि दोषी चाहे बैंक से हों या सरकारी तंत्र से, किसी को बख्शा नहीं जाएगा।