चंडीगढ़ नगर निगम में 116 करोड़ का फर्जी FD घोटाला, IDFC बैंक से जुड़े दस्तावेजों पर उठे सवाल

Tue 10-Mar-2026,12:38 PM IST +05:30

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ISFC First Bank Controversy
  • चंडीगढ़ नगर निगम में 116.84 करोड़ के फर्जी FD घोटाले का खुलासा।

  • IDFC First Bank से जुड़े दस्तावेजों में पाई गई गंभीर अनियमितताएं।

  • पुलिस ने एफआईआर दर्ज कर आर्थिक अपराध शाखा को जांच सौंपी।

Chandigarh / Chandigarh :

Chandigarh / केंद्र शासित प्रदेश चंडीगढ़ में एक बड़ा वित्तीय घोटाला सामने आया है, जिसने प्रशासनिक और वित्तीय व्यवस्था को हिला कर रख दिया है। शुरुआती जांच में सैकड़ों करोड़ रुपये के सरकारी फंड में गड़बड़ी की आशंका जताई जा रही है। यह मामला खास तौर पर फर्जी फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) और बैंक ट्रांजैक्शन से जुड़ी अनियमितताओं से संबंधित है।

इस घोटाले में चंडीगढ़ नगर निगम और शहर की प्रमुख एजेंसी CREST Chandigarh के खातों की जांच की जा रही है। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, सबसे पहले वित्तीय गड़बड़ी का पता CREST के वित्तीय रिकॉर्ड की जांच के दौरान चला।

शुरुआती जांच में सामने आया 98 करोड़ का हेरफेर
जांच के शुरुआती चरण में करीब 98 करोड़ रुपये के हेरफेर की आशंका जताई गई थी। लेकिन जैसे-जैसे वित्तीय रिकॉर्ड, बैंक ट्रांजैक्शन और निवेश से जुड़े दस्तावेजों की जांच आगे बढ़ी, यह राशि बढ़कर कई सौ करोड़ तक पहुंचने की संभावना जताई जाने लगी।

चंडीगढ़ यूटी प्रशासन के वित्त विभाग के लेखा अधिकारी अब पुराने और नए वित्तीय रिकॉर्ड का विस्तृत मिलान कर रहे हैं। बैंक खातों से जुड़े हर ट्रांजैक्शन की जांच की जा रही है ताकि यह पता लगाया जा सके कि आखिर गड़बड़ी कहां और कैसे हुई।

नगर निगम के खातों में भी मिली बड़ी गड़बड़ी
जांच के दौरान चंडीगढ़ नगर निगम के खातों में भी गंभीर वित्तीय अनियमितताएं सामने आई हैं। जानकारी के अनुसार, नगर निगम के नाम पर करीब 108 करोड़ रुपये की 11 फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) दर्ज पाई गई हैं।

हालांकि जब इन एफडी से जुड़े दस्तावेजों की जांच की गई तो उनमें कई संदिग्ध बातें सामने आईं। प्रारंभिक जांच में इन एफडी के फर्जी होने का संदेह जताया जा रहा है।

फरवरी 2026 में सामने आया मामला
सूत्रों के अनुसार यह पूरा मामला फरवरी 2026 में उस समय सामने आया जब नगर निगम के वित्तीय रिकॉर्ड और निवेश से जुड़ी फाइलों की आंतरिक जांच की गई।

इस जांच के दौरान 11 एफडी से जुड़े दस्तावेजों में कई विसंगतियां सामने आईं। इन एफडी की कुल राशि लगभग 108 करोड़ रुपये बताई जा रही है।

बताया जा रहा है कि ये निवेश नगर निगम के फंड से किए गए बताए गए थे और इनमें स्मार्ट सिटी परियोजनाओं से जुड़ा पैसा भी शामिल हो सकता है।

बैंक रिकॉर्ड से मेल नहीं खाए दस्तावेज
जब इन एफडी के दस्तावेजों का बैंक के आधिकारिक रिकॉर्ड से मिलान किया गया, तो कई दस्तावेज बैंक सिस्टम में दर्ज रिकॉर्ड से मेल नहीं खाते पाए गए।

सूत्रों के अनुसार इन एफडी का संबंध IDFC First Bank से जोड़ा जा रहा है। जांच के दौरान यह भी सामने आया कि कुछ एफडी के दस्तावेज बैंक के रिकॉर्ड में दर्ज ही नहीं हैं।

इससे यह आशंका और मजबूत हो गई है कि एफडी के कागजात फर्जी तरीके से तैयार किए गए हो सकते हैं।

आर्थिक अपराध शाखा को सौंपी गई जांच
मामले की गंभीरता को देखते हुए जांच चंडीगढ़ पुलिस की आर्थिक अपराध शाखा (Economic Cell) को सौंप दी गई है। पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता (BNS) की कई धाराओं के तहत मामला दर्ज किया है।

  • इन धाराओं में 318(4), 338, 336(3), 340(2), 61(2) और 316(5) शामिल हैं।
  • अब जांच एजेंसियां बैंक रिकॉर्ड, निवेश दस्तावेजों और नगर निगम के वित्तीय लेनदेन की गहराई से जांच कर रही हैं।
  • जांच के केंद्र में कई अहम सवाल
  • जांच एजेंसियां इस मामले में कई महत्वपूर्ण सवालों के जवाब तलाशने की कोशिश कर रही हैं, जैसे:
  • फर्जी एफडी के दस्तावेज किसने तैयार किए
  • क्या इसमें बैंक कर्मचारियों की कोई भूमिका है
  • नगर निगम के वित्त विभाग के किन अधिकारियों या कर्मचारियों की संलिप्तता हो सकती है
  • क्या वास्तव में पैसा बैंक में जमा हुआ था या केवल कागजी एफडी बनाई गई
  • इन सवालों के जवाब मिलने के बाद ही पूरे घोटाले की असली तस्वीर सामने आ सकेगी।

स्मार्ट सिटी फंड से जुड़ा हो सकता है मामला
सूत्रों के अनुसार इस पूरे मामले का संबंध स्मार्ट सिटी मिशन से जुड़े फंड से भी हो सकता है। बताया जा रहा है कि केंद्र सरकार से मिलने वाली स्मार्ट सिटी ग्रांट पहले IDFC First Bank और AU Small Finance Bank के खातों में आती थी।

जब स्मार्ट सिटी मिशन की परियोजनाएं समाप्त हुईं, तो यह राशि नगर निगम चंडीगढ़ को ट्रांसफर कर दी गई थी।

इसी दौरान जब निगम अधिकारियों ने बैंक ट्रांजैक्शन और अकाउंट एंट्री का मिलान किया, तो कई लेनदेन में गड़बड़ी सामने आने लगी।

116 करोड़ रुपये तक पहुंच सकती है गड़बड़ी
नगर निगम के अंदरूनी सूत्रों के अनुसार अब तक की जांच में करीब 116 करोड़ रुपये के फंड में गड़बड़ी सामने आने की संभावना जताई जा रही है। हालांकि अभी तक इस राशि की आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है।

जांच पूरी होने के बाद ही वास्तविक रकम और पूरे घोटाले का आकार स्पष्ट हो सकेगा।

एक अकाउंटेंट अचानक लापता
इस पूरे मामले के बीच नगर निगम की वित्तीय शाखा में कार्यरत एक अनुबंधित अकाउंटेंट भी अचानक संपर्क से बाहर बताया जा रहा है।

बताया जा रहा है कि यह कर्मचारी फंड से जुड़े लेनदेन और दस्तावेजी प्रक्रिया का काम देखता था। सूत्रों के अनुसार उसका फोन बंद आ रहा है, जिससे जांच एजेंसियों का शक और गहरा गया है।

देर रात तक खंगाले जा रहे वित्तीय रिकॉर्ड
मामले के सामने आने के बाद नगर निगम की अकाउंट शाखा के अधिकारी देर रात तक कार्यालय में बैठकर वित्तीय रिकॉर्ड की जांच कर रहे हैं।

पुराने और नए बैंक ट्रांजैक्शन का मिलान किया जा रहा है और यह भी देखा जा रहा है कि किन अधिकारियों या कर्मचारियों के हस्ताक्षर से पैसे निकाले गए या निवेश किए गए।

प्रशासनिक तंत्र पर उठे गंभीर सवाल
इतनी बड़ी वित्तीय अनियमितता सामने आने के बाद चंडीगढ़ प्रशासन और नगर निगम के वित्तीय नियंत्रण तंत्र पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।

विशेषज्ञों का कहना है कि यदि इतनी बड़ी राशि की एफडी बिना उचित सत्यापन के रिकॉर्ड में दर्ज हो गई, तो यह प्रशासनिक लापरवाही या संभावित मिलीभगत का संकेत हो सकता है।

आगे हो सकते हैं और बड़े खुलासे
जांच एजेंसियों का मानना है कि जैसे-जैसे दस्तावेजों की जांच आगे बढ़ेगी, इस मामले में और भी वित्तीय अनियमितताएं सामने आ सकती हैं।

फिलहाल पुलिस, प्रशासन और वित्त विभाग संयुक्त रूप से रिकॉर्ड की जांच कर रहे हैं और जल्द ही संबंधित अधिकारियों से पूछताछ की संभावना भी जताई जा रही है।

सूत्रों के अनुसार यह मामला चंडीगढ़ नगर निगम के इतिहास का अब तक का सबसे बड़ा वित्तीय घोटाला साबित हो सकता है, जिसने पूरे प्रशासनिक तंत्र में हड़कंप मचा दिया है।