बीफ़ के शक में भीड़ का इंसाफ? अकलेरा मॉब लिंचिंग ने सरकार और सिस्टम की चुप्पी उजागर की
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अकलेरा में भीड़ ने बुज़ुर्ग को मारा.
बीफ़ और रोहिंग्या-बांग्लादेशी होने के आरोप.
मॉब लिंचिंग पर सख्त कानून की मांग.
Jhalawar / देश में मॉब लिंचिंग की घटनाएं लगातार बढ़ती जा रही हैं, लेकिन अफसोस की बात यह है कि न तो केंद्र सरकार और न ही राज्य सरकारें इस पर कोई सख्त और ठोस कार्रवाई करती नजर आ रही हैं। खासकर भाजपा शासित राज्यों में ऐसी घटनाएं अब असामान्य नहीं रहीं, बल्कि धीरे-धीरे एक खतरनाक “नॉर्मल” बनती जा रही हैं। हर बार किसी की जान चली जाती है, कुछ दिनों तक शोर होता है, बयानबाज़ी होती है और फिर मामला ठंडे बस्ते में चला जाता है।
एंजेल चकमा की मौत भी इसी भीड़तंत्र की क्रूरता का नतीजा थी। इससे पहले एक गायक को भी मॉब लिंचिंग में अपनी जान गंवानी पड़ी, लेकिन इन घटनाओं के बाद भी सरकार की संवेदनशीलता कहीं दिखाई नहीं दी। सवाल यह है कि आखिर कितनी और जानें जाएंगी, तब जाकर सिस्टम जागेगा?
ताज़ा मामला राजस्थान के झालावाड़ जिले के अकलेरा का है, जहां एक बुज़ुर्ग व्यक्ति को कथित तौर पर बीफ़ खाने के आरोप में बेरहमी से पीटा गया। इतना ही नहीं, भीड़ ने उस पर रोहिंग्या और बांग्लादेशी होने का आरोप भी लगा दिया। बिना किसी जांच, बिना किसी सबूत, कुछ लोग खुद को कानून से ऊपर समझ बैठे और एक इंसान को जानवरों की तरह मार डाला।
यह घटनाएं किसी एक धर्म, जाति या समुदाय का मुद्दा नहीं हैं, बल्कि पूरे समाज की इंसानियत पर सवाल हैं। कानून का काम कानून करे, यह बात बार-बार दोहरानी पड़ रही है, जो अपने आप में शर्मनाक है। अगर सरकारें अब भी चुप रहीं और दोषियों को सख्त सज़ा नहीं मिली, तो यह भीड़तंत्र लोकतंत्र और मानवता—दोनों को निगलता चला जाएगा।