फ्यूचर वॉरफेयर कोर्स 2026: आधुनिक युद्ध के लिए तीनों सेनाएं तैयार
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तीनों सेनाओं के लिए फ्यूचर वॉरफेयर कोर्स में आधुनिक युद्ध, उभरती तकनीक और रणनीतिक सोच पर गहन मंथन।
भू-राजनीति, रेयर अर्थ एलिमेंट और आपूर्ति श्रृंखला जैसे भविष्य के अभियानों से जुड़े अहम विषय शामिल।
New Delhi/ तीनों सेनाओं के लिए तीसरा फ्यूचर वॉरफेयर कोर्स 2 से 25 फरवरी, 2026 तक नई दिल्ली स्थित मानेकशॉ सेंटर में आयोजित किया जा रहा है। यह कोर्स एकीकृत रक्षा स्टाफ मुख्यालय के तत्वावधान में और संयुक्त युद्ध अध्ययन केंद्र (CENJOWS) के सहयोग से संचालित किया जा रहा है। इसका उद्देश्य आधुनिक और भविष्य के युद्ध की जटिलताओं को समझने के लिए सैन्य नेतृत्व की सोच, रणनीति और संचालन अवधारणाओं को नए सिरे से परिभाषित करना है।
इस उन्नत कोर्स का मुख्य फोकस इस बात पर है कि तेजी से विकसित हो रही प्रौद्योगिकियां युद्ध संचालन को किस तरह प्रभावित कर रही हैं। कृत्रिम बुद्धिमत्ता, साइबर क्षमताएं, अंतरिक्ष आधारित प्रणालियां और डेटा-संचालित निर्णय जैसे विषयों ने युद्ध के स्वरूप को पूरी तरह बदल दिया है। इसी संदर्भ में कोर्स के दौरान सैन्य सिद्धांतों, रणनीतियों और युद्धक अवधारणाओं पर गहन मंथन किया जा रहा है।
कोर्स में महत्वपूर्ण विषयों पर विस्तृत सत्रों के साथ-साथ उभरती प्रौद्योगिकियों के व्यावहारिक प्रदर्शन भी शामिल हैं। इसके अलावा रक्षा क्षमताओं के लिए महत्वपूर्ण संस्थानों के दौरे कराए जा रहे हैं, जिससे प्रतिभागियों को वास्तविक तकनीकी और औद्योगिक पारिस्थितिकी तंत्र की समझ मिल सके।
इस कार्यक्रम की एक प्रमुख विशेषता यह है कि इसमें तीनों सेनाओं के अधिकारियों के साथ-साथ रक्षा क्षेत्र से जुड़े स्टार्टअप, एमएसएमई, डीपीएसयू और निजी उद्योगों के प्रतिनिधि भी भाग ले रहे हैं। सैन्य प्रतिभागियों में अधिकारियों की वरिष्ठता मेजर से लेकर मेजर जनरल और उनके समकक्ष स्तर तक है। जहां कनिष्ठ अधिकारी अपनी तकनीकी दक्षता और नवाचार आधारित दृष्टिकोण साझा कर रहे हैं, वहीं वरिष्ठ अधिकारी अपने संचालन अनुभव और रणनीतिक समझ के माध्यम से व्यापक परिप्रेक्ष्य प्रदान कर रहे हैं।
फ्यूचर वॉरफेयर कोर्स का उद्देश्य सशस्त्र बलों की संचालन संबंधी प्राथमिकताओं को स्वदेशी रक्षा उद्योग की क्षमताओं के साथ बेहतर तालमेल में लाना है। इससे आधुनिक और भविष्य के युद्ध से जुड़े विषयों पर खुली और सार्थक चर्चा को बढ़ावा मिल रहा है। कोर्स में पूर्व-सैनिकों, सेवारत अधिकारियों, पूर्व राजदूतों, उद्योग विशेषज्ञों और अकादमिक पेशेवरों की भागीदारी यह सुनिश्चित करती है कि भारत की सुरक्षा चुनौतियों का बहुआयामी और व्यावहारिक विश्लेषण किया जाए।
इसके अतिरिक्त, रेयर अर्थ एलिमेंट, आपूर्ति श्रृंखला की कमजोरियां और भविष्य के अभियानों को प्रभावित करने वाली क्षेत्रीय व वैश्विक भू-राजनीति जैसे विषयों पर भी विशेष सत्र आयोजित किए जा रहे हैं। सितंबर 2024 में आयोजित पहले कोर्स की सफलता को आगे बढ़ाते हुए, यह विस्तारित कार्यक्रम रक्षा प्रमुख जनरल अनिल चौहान के उस दृष्टिकोण को साकार करता है, जिसका लक्ष्य अधिकारियों को आधुनिक युद्ध की जटिल चुनौतियों के लिए तैयार करना है।