मध्यप्रदेश मंत्री करण सिंह वर्मा ने लाडली बहनें बयान पर स्पष्ट किया
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मंत्री करण सिंह वर्मा ने धामंदा कार्यक्रम में लाडली बहनों की कम उपस्थिति पर दिए गए कथन पर स्पष्टीकरण देकर विवाद को सुलझाया।
मंत्री ने स्पष्ट किया कि उनके पूरे संबोधन में महिलाओं के प्रति सम्मानभाव और सरकारी योजनाओं से लाभ उठाने की अपील की गई।
Bhopal/ मध्यप्रदेश के मंत्री करण सिंह वर्मा अपने विधानसभा क्षेत्र के ग्राम धामंदा में आयोजित कार्यक्रम के दौरान लाडली बहनों की कम उपस्थिति पर अपने कथन को लेकर विवाद में आ गए। उनका कथन सोशल मीडिया पर वायरल हुआ, जिससे लोगों में भ्रम और चर्चा पैदा हो गई। इसके बाद मंत्री ने स्पष्ट किया कि उनके संबोधन के कुछ अंशों को गलत संदर्भ में प्रस्तुत किया गया, और उनका उद्देश्य महिलाओं के सशक्तिकरण और सम्मान को बढ़ावा देना था।
मंत्री करण सिंह वर्मा ने अपने संबोधन में स्पष्ट किया कि उन्होंने कार्यक्रम की शुरुआत सभी उपस्थित बहनों और नागरिकों को सम्मानपूर्वक प्रणाम करके की थी। उनका मुख्य उद्देश्य स्व-सहायता समूहों, महिला सशक्तिकरण और सरकारी योजनाओं के माध्यम से महिलाओं को अधिकतम लाभ पहुंचाना था।
मंत्री ने कहा कि उनके संबोधन के कुछ अंशों को सोशल मीडिया पर गलत तरीके से पेश किया गया, जिससे भ्रम और विवाद की स्थिति उत्पन्न हुई। उन्होंने दोहराया कि उनके पूरे संबोधन में महिलाओं के प्रति सम्मानभाव ही दिखाई दिया और उन्होंने अपने भाषण का अंत भी प्रणाम करते हुए किया।
मंत्री वर्मा ने कहा कि मध्यप्रदेश सरकार लगातार महिलाओं के लिए आर्थिक सहायता और सरकारी योजनाओं का लाभ सुनिश्चित कर रही है। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि मुख्यमंत्री द्वारा 15 अगस्त जैसे राष्ट्रीय पर्व पर बहनों को सम्मानपूर्वक सहायता प्रदान की जाती है, जो सरकार की महिलाओं के सम्मान और सशक्तिकरण के प्रति प्रतिबद्धता को दर्शाता है।
इसके साथ ही मंत्री ने कहा कि यदि उनके किसी कथन से किसी को ठेस पहुंची है, तो वे इसके लिए खेद प्रकट करते हैं। उन्होंने जनता से अपील की कि किसी भी बयान को पूरे संदर्भ में समझा जाए और सोशल मीडिया पर भ्रामक प्रस्तुतियों से बचा जाए।
मंत्री का यह स्पष्टीकरण महिलाओं के सशक्तिकरण और सम्मान के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता को स्पष्ट करता है। अधिकारियों और नागरिकों ने भी कहा कि यह योजना बहनों के सम्मान और स्वावलंबन से जुड़ी हुई है और इसे कोई समाप्त नहीं कर सकता।
इस विवाद के बाद मंत्री के स्पष्टीकरण ने सोशल मीडिया पर चर्चा और प्रतिक्रिया का ध्यान आकर्षित किया है। विशेषज्ञों का मानना है कि राजनीतिक और सामाजिक संदर्भों में बयानों को सही ढंग से पेश करना और पूरे संदर्भ में समझना अत्यंत आवश्यक है।