शराब घोटाला: कवासी लखमा को सशर्त जमानत

Fri 06-Feb-2026,01:04 PM IST +05:30

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शराब घोटाला: कवासी लखमा को सशर्त जमानत Kawasi-Lakhma-Conditional-Bail-Odisha-Stay
  • सुप्रीम कोर्ट से सशर्त जमानत मिलने के बाद कवासी लखमा को छत्तीसगढ़ में रहने पर रोक, ओडिशा में प्रवास अनिवार्य।

  • शराब घोटाले के आरोपी लखमा को प्रतिदिन स्थानीय थाने में हाजिरी और पासपोर्ट जमा करने के निर्देश।

Chhattisgarh / Bastar :

Bastar/ छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित दो हजार करोड़ रुपये के शराब घोटाले में बड़ा घटनाक्रम सामने आया है। इस मामले के मुख्य आरोपी और दक्षिण बस्तर के कोंटा विधानसभा क्षेत्र से सात बार के कांग्रेस विधायक कवासी लखमा को सुप्रीम कोर्ट से सशर्त जमानत मिल गई है। हालांकि अदालत ने जमानत के साथ कड़ी शर्तें भी लगाई हैं, जिनके तहत लखमा को छत्तीसगढ़ की सीमा से बाहर रहना होगा। जमानत के बाद उनका ठिकाना पड़ोसी राज्य ओडिशा का मलकानगिरी जिला तय माना जा रहा है।

सुप्रीम कोर्ट ने कवासी लखमा को जमानत देते हुए स्पष्ट किया है कि वे जमानत अवधि के दौरान छत्तीसगढ़ राज्य में प्रवेश या निवास नहीं कर सकेंगे। अदालत ने यह भी निर्देश दिया है कि जिस राज्य और जिले में वे रहेंगे, वहां के स्थानीय थाना में उन्हें प्रतिदिन अपनी उपस्थिति दर्ज करानी होगी। इसके अलावा उन्हें अपना पासपोर्ट जमा करना होगा और बिना अनुमति राज्य बदलने की छूट नहीं होगी।

सूत्रों के अनुसार, जमानत के बाद कवासी लखमा ओडिशा के सीमावर्ती जिले मलकानगिरी में निवास करेंगे। यह जिला छत्तीसगढ़ के सुकमा से सटा हुआ है, जिससे उनके परिवार और करीबी लोगों के संपर्क में बने रहना अपेक्षाकृत आसान रहेगा। मलकानगिरी जिला मुख्यालय में उनके ठहरने को लेकर स्थानीय प्रशासनिक स्तर पर आवश्यक तैयारियां शुरू कर दी गई हैं।

बताया जा रहा है कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद कवासी लखमा को रायपुर केंद्रीय जेल से रिहा कर दिया गया है। जेल से बाहर आने के बाद उन्होंने अपने वकीलों से चर्चा कर ओडिशा रवाना होने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। विधायक होने के कारण उनकी सुरक्षा और प्रशासनिक समन्वय को लेकर भी विशेष सतर्कता बरती जा रही है।

राजनीतिक दृष्टि से मलकानगिरी क्षेत्र में भी कवासी लखमा के समर्थकों की संख्या कम नहीं है। ऐसे में उनके वहां प्रवास के दौरान किसी भी प्रकार की राजनीतिक गतिविधियों पर प्रशासन और जांच एजेंसियों की कड़ी नजर बनी रहेगी। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह जमानत दक्षिण बस्तर की राजनीति में नए समीकरण पैदा कर सकती है।